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Brijesh Mishra· 7 years ago
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पेड़ से पत्ते गिरने का क्या कारण है?

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पर्णपाती प्रक्रिया एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसके कारण पेड़ों से पत्ते गिरते हैं। यह प्रक्रिया पेड़ों के जीवन चक्र और पर्यावरण के अनुकूलन (adaptation) का हिस्सा होती है।

पेड़ों से पत्ते गिरने का सबसे मुख्य कारण मौसम में बदलाव होता है, खासकर सर्दी और शरद ऋतु (autumn) में। इन मौसमों में धूप कम हो जाती है और तापमान गिर जाता है, जिससे पेड़ों के लिए भोजन बनाने की प्रक्रिया (photosynthesis) धीमी हो जाती है। जब पेड़ों को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, तो वे पुराने पत्तों को गिराकर ऊर्जा बचाते हैं।

इसके अलावा, पानी की कमी भी एक बड़ा कारण होती है। गर्मियों या शुष्क मौसम में जब मिट्टी में नमी कम हो जाती है, तो पेड़ अपने पत्तों को गिराकर पानी की बचत करते हैं। पत्ते पानी के वाष्पीकरण (transpiration) का मुख्य माध्यम होते हैं, इसलिए उन्हें गिराकर पेड़ अपनी नमी को सुरक्षित रखते हैं।

पत्तों के गिरने की प्रक्रिया में पेड़ स्वयं एक जैविक नियंत्रण प्रणाली का उपयोग करते हैं। जब पत्ता पुराना हो जाता है, तो उसके डंठल (petiole) और तने के बीच एक अलग होने वाली परत बन जाती है, जिससे पत्ता धीरे-धीरे टूटकर गिर जाता है।

कुछ पेड़ जैसे नीम, पीपल और बरगद में यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है, जबकि पर्णपाती पेड़ों (deciduous trees) जैसे आम, सेब और सागौन में यह प्रक्रिया स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

पेड़ों से पत्ते गिरने का एक और कारण यह भी है कि इससे नए पत्तों को उगने का अवसर मिलता है। पुराने पत्ते गिरने के बाद पेड़ नए और स्वस्थ पत्ते विकसित करते हैं, जिससे उनकी वृद्धि बेहतर होती है।

निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि पेड़ों से पत्ते गिरना एक प्राकृतिक और जरूरी प्रक्रिया है, जो मौसम परिवर्तन, पानी की बचत और पेड़ों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। यह प्रक्रिया पेड़ों को जीवित रहने और पर्यावरण के अनुसार खुद को ढालने में मदद करती है।

यहां एक और दिलचस्प विषय है जिसका आप आनंद ले सकते हैं: किस पेड़ का पत्ता हीरे से भी महंगा है?
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Aanya SharmaTranslating science and technology into stories that inform, challenge, and matter.
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Aanya Sharma is a science and technology writer with over 5 years of experience and 300+ published articles across leading digital platforms. She holds a Bachelor's degree in Science (Physics) from Delhi University, which grounds her writing in scientific literacy and gives her the ability to evaluate technical claims with accuracy. Her work has appeared on platforms including The Wire Science, Analytics India Magazine, and Digit.in, where she has covered artificial intelligence, space exploration, consumer technology, environmental science, and emerging tech policy. With a focus on accuracy and clarity, her writing makes complex scientific and technological developments accessible to readers without a technical background. Aanya has participated in science communication panels at events including the India Science Festival and has been recognised as a contributor to responsible tech journalism in India. She is an active member of the National Association of Science Writers (NASW) and maintains a public portfolio of her published work. Across all her work, her writing is grounded in verified sources and a commitment to editorial standards — delivering content that readers can rely on in a space where misinformation spreads easily.

Updated on06/05/26
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पेड़ों से पत्तों का गिरना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो पर्यावरण और पौधे की जरूरतों से जुड़ी होती है।मौसम बदलने पर, खासकर पतझड़ के समय, पेड़ अपने पुराने पत्तों को गिरा देते हैं।

ठंड या पानी की कमी के दौरान पेड़ ऊर्जा बचाने के लिए पत्ते छोड़ देते हैं, क्योंकि पत्तों के जरिए पानी ज्यादा खर्च होता है। इस प्रक्रिया को एब्सशिशन कहा जाता है, जिसमें पत्ते अपने आप टहनी से अलग हो जाते हैं। पुराने या खराब पत्तों को हटाकर पेड़ नए पत्तों के लिए जगह बनाता है।

यह प्रक्रिया पेड़ के जीवन चक्र का एक जरूरी हिस्सा होती है। पेड़ों का यह बदलाव प्रकृति के संतुलन और नए विकास की शुरुआत को दर्शाता है।

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Answered on03/18/26
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आइए दोस्तों आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से बताएंगे पेड़ से पत्ते गिरने का क्या कारण है। यह तो हम लोग जानते ही हैं की पेड़ की पत्तियां हरी होती हैं. लेकिन ज्यादातर बसंत के मौसम में ही हरी पत्तियां देखने को मिलती हैं हरी पत्तियां देखने में बहुत अच्छी लगती है। बताते हैं कि पेड़ से पत्ते गिरने का कारण यह है कि खाना तो सभी के लिए जरूरी है चाहे वह मनुष्य हो,जीव जंतु हो, या पेड़ पौधे हो, सभी अपने अपने तरीके से अपना अपना भोजन ग्रहण करते हैं। पेड़ अपना भोजन सूर्य की किरणों की मदद से और जड़ों की सहायता से करता है।लेकिन जब पेड़ को सूर्य की सहायता से खाना नहीं मिल पाता तो तो वह अपना भोजन इकट्ठा करके रखता है। पेड़ में जो पानी होता है वह भी छोटे-छोटे छेद से बाहर निकल जाता. इसीलिए पेड़ खुद को बचाने के लिए पत्तों तक पानी जाने के लिए रोक देता है। इसीलिए पत्ते झड़ने लगते हैं।Article image

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Krishna Patel
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Answered on05/28/22
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एक जादुई बदलाव
पत्तियां हरी होती हैं, ये सच है. लेकिन सच यह भी है कि कई पेड़ों की पत्तियां सिर्फ वसंत और गर्मियों में हरी होती हैं. पतझड़ आते ही वह पीली, भूरी और लाल पड़ने लगती है. लेकिन ये रंग अचानक कहां से आते हैं?
 
ऊर्जा की बचत
जिस तरह आम जीव जन्तुओं की बहुत सारी ऊर्जा खाना पचाने में खर्च होती है, वैसे ही पेड़ों पौधों की भी सबसे ज्यादा ऊर्जा प्रकाश संश्लेषण में खर्च होती है. सिर्फ हरी पत्तियां प्रकाश संश्लेषण कर सकती हैं. क्लोरोफिल की मदद से पौधे धूप को सोखते हैं और पानी और कॉर्बन डाय ऑक्साइड को शुगर में बदलते हैं. पतझड़ वाले पेड़ सर्दियों में इस प्रक्रिया को रोक देते हैं.
 
तैयारी शुरू
सर्दियों से ठीक पहले दिन छोटे होने लगते हैं. पौधे इस बात को समझ लेते हैं और तैयारी करने में जुट जाते हैं. वे क्लोरोफिल को छोटे छोटे अणुओं में बदलकर तने और जड़ों में जमा कर लेते हैं. क्लोरोफिल जैसी अहम चीज को पौधे बिल्कुल बर्बाद नहीं करते.
 
यूं बदलता है रंग
क्लोरोफिल के साथ ही पत्तियों में लाल और पीले वर्णक (पिगमेंट्स) होते हैं. वसंत और गर्मियों के दौरान क्लोरोफिल इतना ज्यादा हावी होता है कि ये दो रंग छुप जाते हैं. लेकिन अक्टूबर-नवंबर में क्लोरोफिल तने और जड़ों की तरफ जाने लगता है और पीला और लाल रंग सामने आने लगता है.
 
कुदरत का कैनवस
कारोटेनॉएड्स की वजह से पत्तियां सुनहरी या नारंगी दिखायी पड़ती हैं. एंथोसाइनिस उन्हें लाल और गुलाबी रंग देता है. लेकिन यह रंग तभी दिखायी देते हैं जब हरा गुम हो जाता है.
 
पत्तियों की मौत
क्लोरोफिल को पूरी तरह अणुओं में तोड़ने के बाद पेड़ को पत्तियों की बिल्कुल जरूरत नहीं रहती. इसके बाद टहनी और पत्तियों की शाखा के बीच पेड़ एक परत बनाते हैं. यह परत पत्तियों में पानी और पोषक तत्वों की सप्लाई को काट देती है. फिर पत्तियां मरने और गिरने लगती है.
 
पत्तियों से खतरा क्यों
पत्तियों की कोशिकाओं में बहुत सारा पानी जमा होता है. अगर पेड़ पत्तियां नहीं गिराएंगे तो कड़ाके की सर्दी में पत्तों में मौजूद पानी जम जाएगा और पेड़ को गलाने लगेगा. इससे बचाव करने में बहुत ज्यादा ऊर्जा खर्च होगी, इसीलिए पेड़ पत्तों को पहले ही गिरा देते हैं.
 
धैर्य भरा इंतजार
कड़ाके की सर्दी में जब पानी जम जाता है तो पेड़ों को प्रकाश संश्लेषण के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलता. इस लिहाज से भी पत्तियों का कोई मतलब नहीं बनता. लिहाजा पेड़ नग्न खड़े रहते हैं और चुपचाप वंसत का इंतजार करते हैं.
 
फिर हरा भरा जीवन
करीब पांच महीने के इंतजार के बाद दिन फिर लंबे होने लगते हैं, तापमान बढ़ने लगता है और तने व जड़ों में जमा क्लोरोफिल फिर ऊपर आने लगता है. और कोपलें फूट पड़ती हैं. इस तरह पेड़ों का इंतजार खत्म होता है.
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Updated on01/02/26
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पेड़ से पत्ते गिरने का मुख्य कारण यह होता है। यह हम सब को तो पता ही है भोजन सभी प्राणियों के लिए एवं जीव-जंतु पेड़-पौधे के लिए उपयोगी है । और पेड़ पौधे अपना भोजन सूर्य के प्रकाश की किरणों के द्वारा प्राप्त करते हैं। लेकिन जब सर्दियों के दिनों में पेड़ में पानी कट्ठा जमा हो जाता है और जो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया होती है वह सही तरीके से नहीं हो पाती है तो ऐसे में पत्तियों की उपयोगिता बिल्कुन नहीं रह जाती है जिसके कारण पेड़ से पत्तियां गिरने लगती हैं.।Article image

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Aanchal Singh
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Answered on05/29/22
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