बहुत से लोगों का मानना है कि कर्मों का फल मरने के बाद ऊपर जब हम भगवान के पास जाते हैं तो हमें वहीं पर कर्मों का फल मिलता है लेकिन भागवत गीता में कहा गया है कि कर्मों का फल आपको पृथ्वी लोक पर ही भुगतना पड़ेगा यानी कि जो व्यक्ति जैसा कर्म करेगा उसे उसी के अनुसार पर भी प्राप्त होता है जैसे कि कोई व्यक्ति अच्छा कार्य करता है तो उसे अच्छे फल की प्राप्ति होती है और यदि कोई बुरा कर्म करता है तो उसे नर्क की प्राप्ति होती है इसलिए हमें कभी भी किसी के साथ बुरा नहीं करना चाहिए हमेशा सब के बारे में हित ही सोचना चाहिए।
कर्मों का फल कहां मिलता है?
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कर्मो का फल भगवान ही देता है, और कर्मो का फल जन्म से लेकर मृत्यु के बीच इसी धरती लोक मे मिलता है कही जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। यदि हम कुछ अच्छे कर्म करते है तो उसका फल अच्छा ही मिलता है, जैसे कि हम किसी व्यक्ति के साथ अच्छा व्यवहार करते है तो उसका फल हमें अच्छा ही मिलता है, यदि हम किसी के साथ बुरे कर्म करते है यानि कि किसी व्यक्ति के साथ बुरा करते है उसका फल हमें भी बुरा ही मिलेगा।

आप जानने के इच्छुक है कि कर्मों का फल कहां मिलता है तो चलिए हम आपको इसकी जानकारी देते हैं।दोस्तों मैं आपको बता दूं कि कर्मों का फल आपको इसी धरती पर ही मिलेगा।आज नहीं तो कल आपको अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ेगा।यदि आप अच्छा कर्म करते हैं तो आपको अच्छा फल मिलेगा,यदि आप बुरा कर्म करते हैं तो आपको बुरा फल मिलेगा। लेकिन फल तो मिलेगा ही।इससे कोई नहीं बच सकता है। यदि आप लोगों के साथ गलत और बुरा व्यवहार करते हैं तो भगवान आपको बहुत कड़ी सजा देगा जिसके बारे में शायद आपको अंदाजा भी नहीं है। और यदि आप लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं तो भगवान आपके साथ हमेशा अच्छा ही करेगा आपको अपने जीवन में हमेशा खुशियां ही मिलेंगे। और फिर मरने के बाद अच्छे कर्म करने वाले लोगों को बैकुंठ धाम भेजा जाता है, और जो बुरे कर्म करता है उसे नरक भेज दिया जाता है।
दोस्तों आपने बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि कर्मो का फल सबको मिलता है। संसार में देसी प्राणी ने जन्म लिया है उसे अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है और उनसे मुक्ति नहीं मिलती है यह अलग बात है कि कर्मों का फल कब मिलता है जो कर्म ज्यादा होते हैं उसे बाद में और जो कम होते हैं उसे पहले भोगना पड़ता है। बुरे कर्मों का फल इसी जन्म में भोगना पड़ता है और अच्छे कर्म अगले जन्म में या जन्म के ही कुछ दिनों बाद मिलते हैं। लेकिन कर्मों का फल हमेशा मिलता है

हमारे द्वारा पृथ्वी लोक में किए गए कर्मों का फल भगवान ऊपर देता है। जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है उसे भगवान स्वर्ग या नर्क में भेजता है और उसके हिसाब से ही उसे दंड दिया जाता है। हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग दंड दिए जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति बहुत पुण्य करता है तो उसे वैकुंठ भेजा जाता है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति गलत काम और बहुत पापी होता है तो उसे भगवान नर्क में भेजते हैं।

मानव अपने कर्मों का स्वर्ण निर्धारक होता है मानव द्वारा किए गए कर्म उसके जीवन की दिशा और दशा निर्धारित करते हैं। अच्छे कर्मों का परिणाम अच्छा व बुरे कर्मों का परिणाम बुरा ही होता है। मानव अपने जीवन काल में अनेकों परिस्थितियों को देखता है। तो हम यह कह सकते हैं कि मानव को अपने कर्मों का परिणाम अथवा फल इसी पृथ्वी में रहकर मिल जाता है इसलिए हमें सदैव अच्छे कर्म ही करनी चाहिए।

