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Sks Jain· 5 साल पहले
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कर्मों का फल कहां मिलता है?

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जवाब दिया गया11/15/23

आप जानने के इच्छुक है कि कर्मों का फल कहां मिलता है तो चलिए हम आपको इसकी जानकारी देते हैं।दोस्तों मैं आपको बता दूं कि कर्मों का फल आपको इसी धरती पर ही मिलेगा।आज नहीं तो कल आपको अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ेगा।यदि आप अच्छा कर्म करते हैं तो आपको अच्छा फल मिलेगा,यदि आप बुरा कर्म करते हैं तो आपको बुरा फल मिलेगा। लेकिन फल तो मिलेगा ही।इससे कोई नहीं बच सकता है। यदि आप लोगों के साथ गलत और बुरा व्यवहार करते हैं तो भगवान आपको बहुत कड़ी सजा देगा जिसके बारे में शायद आपको अंदाजा भी नहीं है। और यदि आप लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं तो भगवान आपके साथ हमेशा अच्छा ही करेगा आपको अपने जीवन में हमेशा खुशियां ही मिलेंगे। और फिर मरने के बाद अच्छे कर्म करने वाले लोगों को बैकुंठ धाम भेजा जाता है, और जो बुरे कर्म करता है उसे नरक भेज दिया जाता है।लेख की तस्वीर

Aanya  Singh
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जवाब दिया गया12/17/22

बहुत से लोगों का मानना है कि कर्मों का फल मरने के बाद ऊपर जब हम भगवान के पास जाते हैं तो हमें वहीं पर कर्मों का फल मिलता है लेकिन भागवत गीता में कहा गया है कि कर्मों का फल आपको पृथ्वी लोक पर ही भुगतना पड़ेगा यानी कि जो व्यक्ति जैसा कर्म करेगा उसे उसी के अनुसार पर भी प्राप्त होता है जैसे कि कोई व्यक्ति अच्छा कार्य करता है तो उसे अच्छे फल की प्राप्ति होती है और यदि कोई बुरा कर्म करता है तो उसे नर्क की प्राप्ति होती है इसलिए हमें कभी भी किसी के साथ बुरा नहीं करना चाहिए हमेशा सब के बारे में हित ही सोचना चाहिए।लेख की तस्वीर

Krishna Patel
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जवाब दिया गया12/17/22

कर्मो का फल भगवान ही देता है, और कर्मो का फल जन्म से लेकर मृत्यु के बीच इसी धरती लोक मे मिलता है कही जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। यदि हम कुछ अच्छे कर्म करते है तो उसका फल अच्छा ही मिलता है, जैसे कि हम किसी व्यक्ति के साथ अच्छा व्यवहार करते है तो उसका फल हमें अच्छा ही मिलता है, यदि हम किसी के साथ बुरे कर्म करते है यानि कि किसी व्यक्ति के साथ बुरा करते है उसका फल हमें भी बुरा ही मिलेगा।

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Mp

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जवाब दिया गया12/17/22

दोस्तों आपने बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि कर्मो का फल सबको मिलता है। संसार में देसी प्राणी ने जन्म लिया है उसे अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है और उनसे मुक्ति नहीं मिलती है यह अलग बात है कि कर्मों का फल कब मिलता है जो कर्म ज्यादा होते हैं उसे बाद में और जो कम होते हैं उसे पहले भोगना पड़ता है। बुरे कर्मों का फल इसी जन्म में भोगना पड़ता है और अच्छे कर्म अगले जन्म में या जन्म के ही कुछ दिनों बाद मिलते हैं। लेकिन कर्मों का फल हमेशा मिलता है

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अपडेट किया गया01/02/26
क्या है खमीर
 
खमीर एक कवक है। यह शर्करायुक्त कार्बनिक पदार्थ में बहुतायत से पाये जाने वाला विशेष प्रकार का कवक है। यह फूल विहीन पौधा है। इसका शरीर मूल, तना एवं पत्ति में विभक्त नहीं होता है.
 
आम बोलचाल की भाषा में खमीर को यीस्ट भी कहा जाता है, मुख्यत: खाद्य पदार्थों में उपयोग किया जाता है ताजा यीस्ट को आप आसानी से घर पर बना सकते हैं. लेकिन सूखा यीस्ट जिसे इंस्टेंट ड्राय एक्टिव यीस्ट कहते हैं, वह एक प्रकार की रासायनिक प्रक्रिया से तैयार किया जाता है.
 
खमीर एक प्रकार का यीस्ट ही होता है, यीस्ट द्वारा फुलाए गए आते को ही खमीर या खमीरी आटा कहतें हैं, इसका उपयोग बेकरी उद्योग में किया जाता है, आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की मनुष्य, खमीर यीस्ट का उपयोग हजारों सालों से करता आया है. पुरारात्त्व विदों को मिश्र में खुदाई के दौरान चार हज़ार साल पुराने ब्रेड सेकने की भट्टियां, और बेकर्स के चित्र मिले हैं.
 
घर पर कैसे बनता है खमीर
 
सबसे पहले मीडियम आंच में एक पैन में आधा कप पानी गुनगुना गरम करें और आंच बंद कर दें.
- गुनगुने पानी में मैदा डालकर गाढ़ा घोल बनाएं. फिर इसमें सौंफ, दही और चीनी डालकर अच्छे से मिक्स कर लें.
- इस घोल को 5-6 मिनट तक अच्छी तरह फेंटें. ध्यान दें कि जितनी अच्छी तरह से आप इसे फेंटेंगे, उतना ही बढ़िया यीस्ट तैयार होगा.
- फेंटने के बाद इसे छोटे एयरटाइट जार या डिब्बे में डालकर रख लें.
- 18 से 24 घंटे बाद घोल में छोटे-छोटे बुलबुले आ जाएंगे, इसका मतलब यीस्ट तैयार हो गया है.
- इस खमीर या यीस्ट को फ्रिज में 7 दिन तक रखा जा सकता है.
 
कहां होता है खमीर का उपयोग
 
खमीर का उपयोग उपयोग मुख्यतः बेकरी उद्योग में किया जाता है, ब्रेड, केक, पिज़्ज़ा, खमीरी रोटी, शराब आदि बनाने में उपयोग किया जाता है.
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जवाब दिया गया12/17/22

हमारे द्वारा पृथ्वी लोक में किए गए कर्मों का फल भगवान ऊपर देता है। जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है उसे भगवान स्वर्ग या नर्क में भेजता है और उसके हिसाब से ही उसे दंड दिया जाता है। हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग दंड दिए जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति बहुत पुण्य करता है तो उसे वैकुंठ भेजा जाता है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति गलत काम और बहुत पापी होता है तो उसे भगवान नर्क में भेजते हैं।लेख की तस्वीर

preeti  patel
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अपडेट किया गया12/23/25

मानव अपने कर्मों का स्वर्ण निर्धारक होता है मानव द्वारा किए गए कर्म उसके जीवन की दिशा और दशा निर्धारित करते हैं। अच्छे कर्मों का परिणाम अच्छा व बुरे कर्मों का परिणाम बुरा ही होता है। मानव अपने जीवन काल में अनेकों परिस्थितियों को देखता है। तो हम यह कह सकते हैं कि मानव को अपने कर्मों का परिणाम अथवा फल इसी पृथ्वी में रहकर मिल जाता है इसलिए हमें सदैव अच्छे कर्म ही करनी चाहिए।

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