मुगल सम्राट शाहजहां ने दिल्ली का लाल किला बनवाया था।आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि लाल किला का वास्तविक नाम किला-ए-मुबारक है। दिल्ली लाल किले में इमारत क़ो बनवाने के लिए कुछ हिस्सो मे चूना पत्थर का भी उपयोग किया जाने लगा था, इसलिए लाल कीले का रंग पहले सफेद था। फिर समय के साथ लाल किले की दीवारों पर सफ़ेद रंग के चूने के पत्थर गिरने लगे, तो इस किले को लाल रंग का कराया गया तभी से यह लाल कीले के नाम से प्रचलित हो गया।
दिल्ली लाल किला के मुख्य इतिहास-
दिल्ली लाल क़िला की इमारत क़ो बनवाने की शुरुवात शाहजहाँ द्वारा 17वीं सदी में की गयी थी। शाहजहाँ द्वारा दिल्ली लाल किला क़ो बनवाने का उद्देश्य दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी बनवाने क़ो रहा था।दिल्ली लाल क़िला 12 मई 1639 को बनकर तैयार हुआ था और शाहजहां ने लाल किलो का उत्तराधिकारी अपने बेटे दारा शिकोह को बना दिया था।
दिल्ली लाल क़िला का आकार बहुत ही बड़ा, विशाल था।लाल कीले मे कई सारे भवन, बाग,मस्जिदें, महल, और दरबार भी बनवाये गये थे। इसकी दीवारों का रंग लाल होने के कारण इसे 'लाल क़िला' के नाम से जाना जाता था।इसमें 6 मुख्य दरवाज़े बनाये गये हैं – दिल्ली दरवाज़ा, बर्ख़ि दरवाज़ा, नोबेल दरवाज़ा, अख़बर दरवाज़ा, लाहौर दरवाज़ा, और हुमायूं दरवाज़ा आदि।
दिल्ली लाल किले में मुख्य 2 गेट हैं पहला दिल्ली दरवाज़ा तथा दूसरा लाहौर दरवाज़ा है। लाहौरी दरवाजा मेन गेट होता है जो बहुत ही लंबा है, लौहारी दरवाजा के अंदर एक बाजार है, इसे चट्टा चौक कहा जाता हैं।
विश्व का सबसे नायाब माना जाने वाला हीरा कोहिनूर है,ये हीरा दिल्ली लाल किले के पास स्थिति शाहजहां के राज्य मे सिंहासन का हिस्सा हुआ करता था।सोने तथा हीरे जवाहरात से जड़ा हुआ शाहजहाँ का सिंहासन लाल किला 'दीवान-ए-ख़ास' का हिस्सा बन चूका था,लेकिन अंग्रेजो के शासनकाल के दौरान हीरे जवाहरात अंग्रेज अपने साथ लेकर चले गये थे। लेकिन अब यह हीरे ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया के पास मौजूद है।

