दोस्तों जैसा कि आप सभी जानते हैं की हिंदी भाषा हमारे भारत देश की राज्य भाषा है। हमारे भारत देश के सभी राज्यों में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हिंदी भाषा ही है। सरकारी दफ्तर से लेकर स्कूलों में पढ़ाई करने तक के लिए हिंदी भाषा का प्रयोग अधिक किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर हिंदी भाषा के जनक कौन है। तो दोस्तों क्या आप जानते हैं की हिंदी भाषा के जनक कौन है यदि आप जानते हैं तो अच्छी बात है और यदि आपको इसकी जानकारी नहीं है तो आज मैं आपको इसकी जानकारी देना चाहूंगी।
चलिए हम आपको बताते हैं की हिंदी भाषा के जनक कौन है :-
दोस्तों मैं आपको बता दूं कि भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक कहलाते हैं। भारतेंदु हरिश्चंद्र के बारे में बताया जाता है कि इन्होंने 19वीं साड़ी के उत्तरार्ध में अलग-अलग विधाओं में लेखन किया।दोस्तों भारतेंदु हरिश्चंद्र का जन्म 9 सितंबर सन 1850 को बनारस के कवि गोपाल चंद्र के घर पर हुआ था। दोस्तों भारतेंदु हरिश्चंद्र को हिंदी रंगमंच का पिता भी कहा जाता है। दोस्तों मैं आपको बता दूं कि भारतेंदु हरिश्चंद्र की हिंदी थिएटर के भी पितामह कहे जाते हैं।
चलिए हम आपको भारतेंदु हरिश्चंद्र जी के बारे में कुछ अन्य जानकारियां देते हैं :-
दोस्तों भारतेंदु हरिश्चंद्र जी को हिंदी के साथ साथ संस्कृति और उर्दू, पंजाबी, मारवाड़ी, गुजराती, मराठी आदि भाषाओं का भी ज्ञान था।
दोस्तों मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि भारतेंदु हरिश्चंद्र न केवल कवि थे बल्कि वह साहित्यकार, नाटककार, निबंधकार और समाज सुधारक भी थे।
भारतेंदु हरिश्चंद्र जी के बारे में कहा जाता है कि वह केवल 25 वर्ष की आयु में करीब 175 ग्रंथ की रचना की थी।
भारतेंदु हरिश्चंद्र के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपनी भाषाओं पर बेहद महारत हासिल की थी। उन्हें लिखने की कला में ब्रजभाषा और खड़ी बोली का उत्कृष्ट प्रयोग करने की पहचान होती थी।


