Updated on Jun 5, 2026health-beauty

क्यों सर्वाइकल और कमर दर्द की वजह बन रहा है स्मार्टफोन?

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Updated on Jun 5, 2026

अक्सर छोटा सा दिखने वाला स्मर्टफ़ोने बड़ी बीमारियों की जड़ बन जाता है। इसका एक अहम कारण यह है की मोबाइल आजकल हर किसी की जरुरत बन गया है।आजकल के व्यस्त जीवन में ज़िंदगी को फ़ोन के बिना सोचना मुमकिन ही नही।मगर हममें से कई लोग इस बात से अनजान है आपकी पॉकेट में समाने वाला एक छोटा सा स्मार्टफोन बड़ी बीमारी का कारण बन सकता है।

मोबाइल या लैपटॉप का गलत तरीके से इस्तेमाल कमर और गर्दन में दर्द की वजह बन रहा है।इस बात का खुलासा दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन डिपार्टमेंट द्वारा ग्रामीण इलाकों में मरीजों पर किए गए एक शोध में सामने आयी की 60 प्रतिशत लोग मस्कुलोस्केल्टन डिसऑर्डर यानी जोड़ों के दर्द से परेशान थे।

आपको बता दें की यह रिसर्च 200 लोगों पर किया गया था जिसमें से 54 फीसदी को कमर दर्द की शिकायत थी।

अगर स्मार्टफोन की डिस्प्ले को 60 डिग्री से ज्यादा गर्दन मोड़कर देखने से अक्सर ऐसी शिकायतें होती हैं। इससे हमारी रीढ़ की हड्डी निरंतर मुड़ने की अवस्था में रहती है और बाद में यही दर्द का कारण बन जाती है।
 
बचाव के तरीके -
 
- स्क्रीन से दूरी बनाएं रखें ।
- मोबाइल पर बात करने के लिए earphones का इस्तेमाल करें।
- ज़्यादा से ज़्यादा कोशिश करें की आप अपना - - - मोबाइल अपने पर्स में या किसी बैग में ले कर कैरी करें ।
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Updated on Jun 5, 2026

स्मार्टफोन आज हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका अत्यधिक और गलत तरीके से उपयोग हमारी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। आज के समय में सर्वाइकल (गर्दन का दर्द) और कमर दर्द की बढ़ती समस्याओं का सबसे बड़ा कारण मोबाइल का इस्तेमाल करते समय हमारी गलत शारीरिक मुद्रा (poor posture) है। जब हम फोन की स्क्रीन देखने के लिए अपनी गर्दन को आगे और नीचे की ओर झुकाते हैं, तो रीढ़ की हड्डी पर अस्वाभाविक दबाव पड़ता है। इसे चिकित्सा विज्ञान में "टेक्स्ट नेक" (Text Neck) कहा जाता है। सामान्य स्थिति में हमारी गर्दन पर सिर्फ 5 किलोग्राम का वजन होता है, लेकिन जब हम 60 डिग्री के कोण पर झुककर फोन चलाते हैं, तो यह दबाव बढ़कर लगभग 27 किलोग्राम तक पहुंच जाता है, जो एक छोटे बच्चे के वजन के बराबर है। लगातार बना रहने वाला यह दबाव धीरे-धीरे मांसपेशियों में कड़ापन और सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस को जन्म देता है।

इसके अलावा, घंटों तक एक ही जगह बैठकर सोशल मीडिया स्क्रॉल करने, रील्स देखने या गेमिंग करने से हमारा शरीर निष्क्रिय हो जाता है। इस गतिहीन जीवनशैली (sedentary lifestyle) के कारण रीढ़ की हड्डी को सहारा देने वाली पीठ और कोर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे रक्त संचार प्रभावित होता है और पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द शुरू हो जाता है। बहुत से लोग रात में अंधेरे में या बिस्तर पर अजीब तरीके से लेटकर लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करते हैं, जिससे मांसपेशियों में अचानक मोच या खिंचाव आ जाता है। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल द्वारा किए गए एक शोध में भी यह बात सामने आई है कि मोबाइल और लैपटॉप के गलत इस्तेमाल के कारण लगभग 60 प्रतिशत लोग जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द (मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर) से पीड़ित हैं।

इस गंभीर समस्या से बचने के लिए हमें अपनी आदतों में कुछ छोटे लेकिन जरूरी सुधार करने होंगे। सबसे महत्वपूर्ण उपाय यह है कि स्मार्टफोन का उपयोग करते समय उसे हमेशा अपनी आंखों के समानांतर (eye-level) रखें ताकि गर्दन को नीचे न झुकाना पड़े। इसके साथ ही, लगातार स्क्रीन देखने के बजाय हर 30 से 40 मिनट में एक छोटा ब्रेक लें, थोड़ा टहलें और अपनी बैठने की स्थिति को बदलें। लंबी बातचीत के लिए फोन को कान और कंधे के बीच दबाकर रखने की गलती बिल्कुल न करें, बल्कि इसके स्थान पर इयरफ़ोन या ब्लूटूथ का इस्तेमाल करें। इन आदतों को अपनाने के साथ-साथ रीढ़ और गर्दन को मजबूत बनाने वाले हल्के स्ट्रेचिंग व्यायाम (जैसे नेक रोटेशन और भुजंगासन) को अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप इस दर्द से पूरी तरह सुरक्षित रह सकते हैं।

यहां एक और दिलचस्प विषय है जिसका आप आनंद ले सकते हैं: सर्वाइकल कैंसर क्या होता है? और इसे कैसे रोका जा सकता है?

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