Asked 8 years ago

साल मे नवरात्री दो बार क्यों मनाई जाती है,और नवरात्री पूजन की आसान विधि बताइये ?

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Rakesh SinghAuthor

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नवरात्रि मुख्य रूप से साल में दो बार बड़ी श्रद्धा से मनाई जाती है — चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि। चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु में आती है, जबकि शारदीय नवरात्रि शरद ऋतु में मनाई जाती है। मान्यता है कि इन दिनों में माँ दुर्गा की पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा, शक्ति और मानसिक शांति मिलती है।

नवरात्रि पूजन की आसान विधि :

  • सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थान को साफ करके माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • कलश स्थापना करें और दीपक जलाएं।
  • माँ दुर्गा को फूल, फल और प्रसाद अर्पित करें।
  • दुर्गा चालीसा या मंत्रों का पाठ करें।
  • अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें।

वास्तव में, नवरात्रि का सबसे बड़ा महत्व श्रद्धा, अनुशासन और सकारात्मक सोच से जुड़ा माना जाता है।

Must Read: क्या है नवरात्रि का इतिहास?

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Answered By Madhav Sharma

Decoding the ancient language of the stars — with six years of practice, study, and thousands of consultations behind every word.
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Madhav Sharma is a professional astrologer with over 6 years of practice in Vedic astrology. He holds a Jyotish Visharad certification from the Indian Council of Astrological Sciences (ICAS), New Delhi — one of India's most recognised credentials in the field — and has studied under senior practitioners with decades of lineage in classical Vedic traditions. His content covers Vedic astrology, birth chart analysis, planetary transits, kundli matching, horoscope predictions, and the practical application of astrological principles in daily life. His work has been published on platforms including AstroSage, GaneshaSpeaks, and Boldsky Astrology, where he writes for readers seeking guidance grounded in classical astrological texts and consistent interpretive practice. Over six years, Madhav has conducted 2,000+ individual consultations and published 200+ articles on astrology, covering everything from beginner guides to in-depth analyses of rare planetary combinations. He is a practising member of the Indian Astrology Federation and has been a featured voice at astrology conferences and spiritual wellness events across India. Across all his writing, his approach remains consistent — classical knowledge, disciplined interpretation, and content that respects both the tradition of Vedic astrology and the intelligence of the reader.

Updated on05/23/26
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नवरात्री का अर्थ सामान्य शब्दों में माता के नौ दिनों से लगाया जाता है , जहाँ माता की इन नौ दिनों में पूजा आराधना की जाती है । लोग इन दिनों माता दुर्गा की पूजा करते हैं और व्रत करते हैं । ये तो हुई माँ दुर्गा के व्रत और पूजन की बात , मगर क्या कभी किसी ने यह सोचा है कि साल में नवरात्री दो बार क्यों मनाई जाती है । जहाँ हर त्यौहार सिर्फ एक बार मनाया जाता है वहीँ नवरात्री साल में दो बार मनाई जाती है । आइये आज इसका कुछ विशेष कारण जानते हैं ।

- प्राकर्तिक रूप से :-
अगर प्राकर्तिक रूप से देखा जाए तो नवरात्री 2 बार मानाने का यह कारण माना जाता है कि मौसम परिवर्तन । जैसा कि पहले नवरात्री गर्मियां शुरू होने पर होती हैं, ताकि देवी की आराधना की जाए और गर्मियों के समय में लोग अधिक परेशान न हो और वहीं दूसरी तरफ दूसरी बार नवरात्रे सर्दियां शुरू होने पर मनाया जाता है ताकि सर्दियां सभी के लिए अनुकूल रहे । दोनों ही नवरात्रों में न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी होती है जिसके कारण प्रकर्ति पूरी तरह सभी के अनुकूल बनी रहती है ।
 
- विज्ञान के रूप से :-
अगर विज्ञान के रूप से यह देखा जाए तो मार्च -अप्रैल महीने के बीच और सितंबर - अक्टूबर महीने के बीच , रात और दिन दोनों ही बराबर होते हैं। अर्थात दोनों समय की लम्बाई बराबर होती है । विज्ञान के आधार पर नवरात्री दो बार मानाने का यही कारण है ।
 
- पौराणिक मान्यता के रूप से :-
ऐसा कहा जाता है कि नवरात्री पहले सिर्फ गर्मियों के दिनों में ही मनाई जाती थी । परन्तु भगवान राम जब वनवास से अयोध्या लोटे थे तो उन्हें माता दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने के चैत्र तक का इंतज़ार नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्होंने माता दुर्गा का भव्य पूजन दोबारा किया जिसके कारण नवरात्री साल में दो बार मनाई जाने लगी ।
 
नवरात्री पूजन की आसान विधि :- 
 
- नवरात्री के पहले दिन सुबह जल्दी उठे और घर की सफाई करने के बाद स्नान करें । जिस जगह आप कलश की स्थापना करना चाहते हैं उस जगह को गंगाजल से साफ करें और वहां आटे से चौक बनाएं (रंगोली) और उसके ऊपर लकड़ी का पटला रखें ।
 
- इसके बाद आप लकड़ी के पटले के ऊपर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर माता दुर्गा की प्रतिमा या चित्र जो आप रखा चाहे उसको स्थापित करें ।
 
- इसके बाद एक तांबे के कलश में शुद्ध जल भरकर उसके ऊपर लाल कपड़े से बंधा हुआ एक नारियल रखें ।
 
- सबसे पहले कलश का पूजन करें और उसके बाद माता की प्रतिमा पर फूल से जल छिड़कें उन्हें लाल टिका और चावल चढ़ाएं। इसके बाद लाल फूल चढ़ाकर पूजा करें ।
 
- अब माता की प्रतिमा के आगे घी का दीपक जलाएं और आरती करें ।
 
यह माता की आसान पूजा विधि है ।
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Answered By Kanchan Sharma

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Updated on05/08/26
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