दंडवत प्रणाम का मतलब है कि दंड की तरह सीधे लेटकर प्रणाम करना। इसमें व्यक्ति का हर अंग सीधा जमीन से छूता है। माना जाता है कि यह अहंकार के अहसास को पूरी तरह से त्याग देने का प्रतीक है। इस तरह आदमी ईश्वर से कहता है कि वह सारी दुनियादारी छोड़कर उसकी शरण में आ गया है।
पर शास्त्रों में स्त्रियों को दंडवत प्रणाम करने की मनाही है। ऐसा इसलिये कि शास्त्रों के मुताबिक स्त्रियों का गर्भ और उनका वक्ष सीधा जमीन से कभी नहीं छूना चाहिये। क्योंकि स्त्रियों का गर्भ किसी को जीवन देता है। और वक्ष उसे पोषण देने का काम करते हैं। इसलिये शास्त्रों के अनुसार स्त्रियों को दंडवत प्रणाम कभी नहीं करना चाहिये।

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Answered By Ramesh Kumar
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