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Updated on Jan 24, 2022others

महिलाओं को दंडवत प्रणाम क्यों नहीं करना चाहिए?

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Answered on Jan 19, 2022

शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि महिलाओं को दंडवत प्रणाम कभी भी नहीं करना चाहिए हिन्दू धर्म शास्त्र के अनुसार कहां जाता है कि स्त्री का गर्भ और उसके वक्ष कभी जमीन में स्पर्श नहीं होना चाहिए। क्योंकि हर स्त्री का गर्भ एक जीवन को सजेहकर रखता है और उसी गर्भ से सृष्टि का चक्र चलता है इसी से मानव की उत्पत्ति होती है ठीक उसी ही प्रकार उस वक्ष से जीवन पोषण मिलता हैं इसी कारण से स्त्रियों को दंडवत प्रणाम नहीं करना चाहिए। अर्थात स्त्रियों को सिर झुका कर, हाथ जोड़कर ही प्रणाम करना चाहिए.।Article image

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Answered on Jan 19, 2022

क्या आपको पता है कि महिलाओं को दंडवत प्रणाम नहीं करना चाहिए दरअसल शास्त्रों में बताया गया है कि प्रणाम करते वक्त व्यक्ति का पूरा शरीर धरती को स्पर्श करता है इसलिए शास्त्रों के अनुसार कहा गया है कि महिला का गर्भ और उसका वक्ष कभी भी जमीन से स्पर्श नहीं होना चाहिए इसलिए कहा जाता है क्योंकि गर्भ एक जीवन को सहेज कर रखता है और जो उसके अंदर वक्ष होता है वह बस इस जीवन का पालन पोषण करता है इसलिए गर्भवती महिलाओं को दंडवत प्रणाम ही करना चाहिए और जो भी महिलाएं करती हैं उन्हें तुरंत ही इस प्रणाम को करना बंद कर देना चाहिए।Article image

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Answered on Jan 24, 2022

दंडवत प्रणाम का मतलब है कि दंड की तरह सीधे लेटकर प्रणाम करनाइसमें व्यक्ति का हर अंग सीधा जमीन से छूता है। माना जाता है कि यह अहंकार के अहसास को पूरी तरह से त्याग देने का प्रतीक है। इस तरह आदमी ईश्वर से कहता है कि वह सारी दुनियादारी छोड़कर उसकी शरण में आ गया है।

पर शास्त्रों में स्त्रियों को दंडवत प्रणाम करने की मनाही है। ऐसा इसलिये कि शास्त्रों के मुताबिक स्त्रियों का गर्भ और उनका वक्ष सीधा जमीन से कभी नहीं छूना चाहिये। क्योंकि स्त्रियों का गर्भ किसी को जीवन देता है। और वक्ष उसे पोषण देने का काम करते हैं। इसलिये शास्त्रों के अनुसार स्त्रियों को दंडवत प्रणाम कभी नहीं करना चाहिये।

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