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Updated on Jun 5, 2026health-beauty

बालासन कैसे करे ,इसके क्या लाभ है ?

React
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Updated on Jun 5, 2026
 

बालासन (Child Pose) एक बहुत ही सरल और आराम देने वाला योगासन है, जिसे शरीर और मन को शांत करने के लिए किया जाता है। इसे नियमित करने से तनाव, थकान और मानसिक चिंता में काफी राहत मिलती है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर घुटनों के बल बैठ जाएँ और दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिला लें। इसके बाद धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें और अपने माथे को जमीन पर टिका दें। दोनों हाथों को आगे की ओर फैला सकते हैं या शरीर के पास आराम से रख सकते हैं। इस स्थिति में सामान्य रूप से सांस लेते रहें और लगभग 30 सेकंड से 2 मिनट तक रहें, फिर धीरे-धीरे वापस सामान्य स्थिति में आ जाएँ। बालासन शरीर को गहरा आराम देने वाला आसन है।

बालासन के कई लाभ होते हैं। यह मानसिक तनाव और चिंता को कम करता है और दिमाग को शांत रखने में मदद करता है। लंबे समय तक पढ़ाई या काम करने के बाद यह शरीर की थकान दूर करता है और ऊर्जा को वापस लाता है। यह रीढ़ की हड्डी और कमर की मांसपेशियों को आराम देता है, जिससे कमर दर्द में राहत मिलती है। इसके अलावा यह पाचन तंत्र को भी बेहतर करता है क्योंकि यह पेट के अंगों पर हल्का दबाव डालता है। नियमित रूप से बालासन करने से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और अनिद्रा की समस्या कम हो सकती है। यह शरीर को लचीला (flexible) बनाने में भी मदद करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है। इसलिए बालासन एक बहुत ही उपयोगी और सुरक्षित योगासन माना जाता है, जिसे हर उम्र के लोग आसानी से कर सकते हैं।

यहां एक और दिलचस्प विषय है जिसका आप आनंद ले सकते हैं: योग के ऐसे कौन से आसन हैं, जो मानव शरीर को पूर्ण रूप से स्वस्थ रख सकते हैं?

React
K
Updated on May 15, 2026

योगशास्त्र में वर्णित "बालासन" सरल एवं आरामदायक आसनों में से एक है। संस्कृत शब्द बाल का अर्थ बालक या छोटा बच्चा होता है। इसका अभ्यास करते समय व्यक्ति की मुद्रा भ्रूण (बच्चे) की तरह दिखाई देने लगती है। बालासन आराम करने की मुद्रा या स्थिति है। जो पीठ दर्द को दूर करने के साथ ही जाँघों को प्रभावित करती है। यदि इस योगासन को सही ढंग से किया जाता है, तो ये आसन शारीरिक ,मानसिक ,तथा भावनात्मक सांत्वना की महान भावना को स्फुरित करता है। बालासन , योग के प्रति समर्पित भाव को दर्शाने की एक उत्तम रचना है। आध्यात्मिक स्तर पर भी इस आसन का बड़ा महत्व है। ये आसन हमें सिखाता है ,की हमें अपना अहंभाव छोड़कर ,किसी बालक की भांति प्रकृति के प्रति समर्पित भाव रखकर जीवन जीना चाहिए।



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