हाल ही में UAE के OPEC छोड़ने की खबर के बाद दुनिया भर में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या OPEC अब टूटने की कगार पर पहुंच चुका है। तेल बाजार से जुड़े विशेषज्ञ और निवेशक लगातार इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं क्योंकि OPEC कई दशकों से वैश्विक तेल बाजार को नियंत्रित करने वाला सबसे बड़ा संगठन माना जाता है।
OPEC की स्थापना 1960 में तेल उत्पादक देशों के हितों की रक्षा के लिए की गई थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच तेल उत्पादन को संतुलित रखना और बाजार में स्थिरता बनाए रखना था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सदस्य देशों के बीच मतभेद बढ़ते दिखाई दिए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ा कारण तेल उत्पादन को लेकर असहमति है। कई देश अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ज्यादा तेल उत्पादन करना चाहते हैं, जबकि OPEC उत्पादन सीमित रखने की नीति अपनाता है ताकि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहें। UAE का बाहर निकलना इसी असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
Saudi Arabia लंबे समय से OPEC में सबसे प्रभावशाली देश रहा है। कई छोटे सदस्य देशों को लगता है कि संगठन के बड़े फैसले Saudi Arabia के हितों के अनुसार लिए जाते हैं। यही वजह है कि कुछ देशों में असंतोष बढ़ रहा है।
इसके अलावा दुनिया तेजी से Renewable Energy, Solar Power और Electric Vehicles की तरफ बढ़ रही है। आने वाले समय में तेल की मांग घटने की संभावना को देखते हुए तेल उत्पादक देश अभी ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं। इससे संगठन के अंदर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
हालांकि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि OPEC पूरी तरह टूटेगा नहीं क्योंकि सदस्य देशों को अब भी सामूहिक ताकत की जरूरत है। यदि OPEC कमजोर पड़ता है, तो तेल बाजार में भारी अस्थिरता आ सकती है और कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है। यदि OPEC कमजोर होता है, तो कभी तेल सस्ता हो सकता है और कभी अचानक बहुत महंगा भी।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि OPEC टूट जाएगा, लेकिन इतना जरूर है कि UAE के बाहर निकलने से संगठन की एकता पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं। आने वाले समय में OPEC की रणनीति और सदस्य देशों के फैसले वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा तय करेंगे।





