OPEC यानी “Organization of the Petroleum Exporting Countries” दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों का एक संगठन है। इसकी स्थापना 1960 में हुई थी और इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखना और सदस्य देशों के हितों की रक्षा करना है। वर्तमान समय में Saudi Arabia, UAE, Iraq, Iran, Kuwait जैसे देश इसके प्रमुख सदस्य हैं।
OPEC दुनिया में तेल उत्पादन को नियंत्रित करके क्रूड ऑयल की कीमतों पर बड़ा प्रभाव डालता है। जब OPEC तेल उत्पादन कम करता है, तो बाजार में सप्लाई घट जाती है और तेल की कीमतें बढ़ने लगती हैं। वहीं यदि उत्पादन बढ़ाया जाए तो कीमतों में गिरावट आ सकती है। इसी कारण OPEC के फैसलों का असर सीधे पेट्रोल, डीज़ल और गैस की कीमतों पर दिखाई देता है।
भारत जैसे देश, जो अपनी तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं, OPEC के फैसलों से काफी प्रभावित होते हैं। यदि OPEC उत्पादन में कटौती करता है तो भारत में पेट्रोल और डीज़ल महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ती है। ट्रांसपोर्ट, खेती, उद्योग और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ता है।
हाल ही में UAE के OPEC छोड़ने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे OPEC की एकता कमजोर हो सकती है और आने वाले समय में तेल बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।
आज के समय में OPEC केवल तेल संगठन नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति को प्रभावित करने वाली एक बड़ी ताकत बन चुका है। इसलिए जब भी OPEC से जुड़ी कोई खबर आती है, उसका असर शेयर बाजार से लेकर आम आदमी की जेब तक दिखाई देता है।





