Advertisement

Advertisement banner

Advertisement

Advertisement banner

Advertisement

Advertisement banner
H
Apr 29, 2026news-current-topics

OPEC और OPEC+ में क्या अंतर है?

1 Answers
1

avatar
@rameshkumar7346Apr 29, 2026

दुनिया में जब भी तेल की कीमतों की बात होती है, तब OPEC और OPEC+ का नाम जरूर सुनने को मिलता है। लेकिन कई लोग इन दोनों के बीच का अंतर नहीं समझ पाते। हालांकि दोनों का संबंध तेल उत्पादन और वैश्विक बाजार से है, फिर भी इनके काम करने का तरीका अलग है।

OPEC का पूरा नाम “Organization of the Petroleum Exporting Countries” है। इसकी स्थापना 1960 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के तेल उत्पादन को नियंत्रित करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखना है। Saudi Arabia, Iraq, Iran, UAE, Kuwait और Venezuela जैसे देश इसके प्रमुख सदस्य हैं।

वहीं OPEC+ एक बड़ा समूह है जिसमें OPEC देशों के साथ कुछ अन्य बड़े तेल उत्पादक देश भी शामिल होते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण नाम Russia का है। OPEC+ की शुरुआत 2016 में हुई थी ताकि तेल बाजार में गिरती कीमतों को नियंत्रित किया जा सके और उत्पादन को सामूहिक रूप से मैनेज किया जा सके।

सरल भाषा में समझें तो OPEC केवल सदस्य देशों का संगठन है, जबकि OPEC+ में OPEC के साथ गैर-सदस्य तेल उत्पादक देश भी शामिल होते हैं। OPEC+ के जरिए दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देश मिलकर उत्पादन घटाने या बढ़ाने का फैसला लेते हैं।

जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें गिरती हैं, तब OPEC+ अक्सर उत्पादन कम कर देता है ताकि सप्लाई घटे और कीमतें बढ़ सकें। वहीं अगर तेल बहुत महंगा हो जाए तो उत्पादन बढ़ाने पर भी चर्चा होती है। इसी कारण OPEC+ का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

भारत जैसे देशों के लिए OPEC+ बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। यदि OPEC+ उत्पादन घटाता है, तो भारत में पेट्रोल और डीज़ल महंगे हो सकते हैं। इससे महंगाई और ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने की संभावना रहती है।

हाल ही में UAE के OPEC छोड़ने की खबर के बाद OPEC और OPEC+ फिर से चर्चा में आ गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इन संगठनों की भूमिका वैश्विक ऊर्जा बाजार को काफी प्रभावित करेगी।

0
React