
यह कहना कि इंसानियत खत्म हो रही है, पूरी तरह सही नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में बदलाव जरूर दिखता है। आज की तेज़ और व्यस्त जीवनशैली में लोग अक्सर स्वार्थ, प्रतिस्पर्धा और तनाव में उलझ जाते हैं, जिससे संवेदनशीलता कम लग सकती है। लेकिन दूसरी तरफ, आपदाओं, महामारी और जरूरतमंदों की मदद के समय लोगों की इंसानियत भी साफ दिखाई देती है। सोशल मीडिया और जागरूकता ने भी मदद और सहानुभूति को बढ़ाया है। इसलिए इंसानियत खत्म नहीं हो रही, बल्कि उसके रूप बदल रहे हैं। सही दिशा और सकारात्मक सोच से इसे और मजबूत किया जा सकता है।
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