भारत में जहां दशहरे के दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में रावण का पुतला जलाया जाता है, वहीं कुछ ऐसे राज्य और स्थान भी हैं जहाँ रावण को उसकी विद्वत्ता और शिव-भक्ति के कारण पूजा जाता है।
यहाँ प्रमुख राज्यों और उन स्थानों की सूची दी गई है:
1. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)
मंदसौर: माना जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी यहीं की रहने वाली थीं, इसलिए यहाँ रावण को 'दामाद' माना जाता है। यहाँ रावण की 35 फीट ऊंची प्रतिमा है जिसकी पूजा की जाती है।
विदिशा (रावन गांव): यहाँ के लोग रावण को अपना पूर्वज मानते हैं और दशहरे पर उसकी आरती उतारते हैं।
2. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)
बिसरख (ग्रेटर नोएडा): इसे रावण का जन्मस्थान माना जाता है। यहाँ रावण का मंदिर है और लोग उसे "महायज्ञी" और "महापंडित" के रूप में पूजते हैं। यहाँ दशहरे पर शोक मनाया जाता है।
कानपुर: यहाँ 'दशानन मंदिर' साल में सिर्फ एक बार दशहरे के दिन खुलता है। भक्त रावण की पूजा उसकी बुद्धि और शक्ति के लिए करते हैं।
3. राजस्थान (Rajasthan)
जोधपुर: यहाँ के मुदगल ब्राह्मण खुद को रावण का वंशज मानते हैं। उनका मानना है कि रावण का विवाह जोधपुर के मंदोर में हुआ था। दशहरे के दिन वे पुतला दहन नहीं करते बल्कि श्राद्ध और पूजा करते हैं।
4. महाराष्ट्र (Maharashtra)
अकोला (गढ़चिरौली): यहाँ के आदिवासी समुदाय (जैसे गोंड जनजाति) रावण को अपना देवता मानते हैं। उनके अनुसार रावण एक महान राजा था जिसे अन्यायपूर्ण तरीके से हराया गया।
5. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)
बैजनाथ (कांगड़ा): मान्यता है कि रावण ने यहाँ भगवान शिव की घोर तपस्या की थी। शिव के प्रति रावण की अटूट भक्ति के कारण यहाँ के लोग उसका पुतला जलाना पाप समझते हैं।
प्रमुख कारण क्यों की जाती है पूजा?
- महापंडित: रावण चारों वेदों और छह शास्त्रों का ज्ञाता था।
- शिव भक्त: उसे शिव का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है।
- वंशज: कई समुदायों में उसे अपना पूर्वज या दामाद माना जाता है।
विशेष तथ्य: दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों, विशेषकर कर्नाटक और तमिलनाडु में भी रावण को एक महान शासक और संगीतज्ञ (वीणा वादक) के रूप में सम्मान दिया जाता है।