भारत में हाइट यानी कद को लेकर एक बहुत बड़ा डबल स्टैंडर्ड देखने को मिलता है। लोग अक्सर कहते हैं कि “पर्सनैलिटी मायने रखती है, हाइट नहीं”, लेकिन असल जिंदगी में कई बार व्यवहार बिल्कुल उल्टा दिखाई देता है।
सबसे बड़ा डबल स्टैंडर्ड लड़कों के साथ देखा जाता है। समाज में अक्सर यह उम्मीद की जाती है कि लड़का लंबा होना चाहिए। रिश्तों, शादी, मॉडलिंग, यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी छोटे कद वाले लड़कों को मज़ाक या कम आत्मविश्वासी मान लिया जाता है। कई लोग सीधे बोल देते हैं:
- “लड़का लंबा होना चाहिए”
- “6 फीट से कम नहीं”
- “हाइट अच्छी नहीं है”
लेकिन जब लड़के किसी लड़की की हाइट को लेकर preference रखें, तब उन्हें तुरंत जज किया जाता है।
दूसरी तरफ, लड़कियों के मामले में भी डबल स्टैंडर्ड है। छोटी हाइट वाली लड़कियों को अक्सर “cute” या “adorable” कहा जाता है, जबकि लंबी लड़कियों को कई बार comments सुनने पड़ते हैं जैसे:
- “बहुत लंबी है”
- “लड़कों से भी लंबी लगती है”
यानि समाज हर situation में appearance को लेकर opinion रखता ही है।
सोशल मीडिया और फिल्मों ने भी इस सोच को बढ़ाया है। हीरो ज्यादातर लंबे दिखाए जाते हैं, जिससे लोगों के दिमाग में यह image बन जाती है कि अच्छी personality का मतलब सिर्फ लंबा कद है। जबकि असलियत में confidence, communication skills, behavior और talent कहीं ज्यादा important होते हैं।
एक और डबल स्टैंडर्ड यह है कि लोग body positivity की बात तो करते हैं, लेकिन height shaming को अक्सर मज़ाक समझकर ignore कर देते हैं। छोटे कद वाले लोगों पर jokes बनाना आज भी बहुत common है।
मेरे हिसाब से हाइट सिर्फ एक physical trait है, personality की पूरी पहचान नहीं। किसी इंसान की value उसके behavior, मेहनत, सोच और confidence से होनी चाहिए, सिर्फ कद से नहीं।



