रामायण के अनुसार, लंकापति रावण का परिवार बेहद अनोखा था क्योंकि उसका संबंध ऋषि कुल (ब्राह्मण) और राक्षस कुल दोनों से था। रावण के माता-पिता और दादा-दादी की पूरी जानकारी नीचे तालिका में दी गई है:
| संबंध | नाम | परिचय |
| पिता | महर्षि विश्रवा | एक महान और परम ज्ञानी ऋषि। |
| माता | कैकसी (निकषा) | राक्षस राजा सुमाली की पुत्री। |
| दादा | महर्षि पुलस्त्य | ब्रह्मा जी के मानस पुत्र और प्रसिद्ध सप्तऋषियों में से एक। |
| दादी | हविर्भू | प्रजापति कर्दम ऋषि और देवहूति की पुत्री। |
यदि उसके ननिहाल (नाना-नानी) की बात करें, तो:
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नाना: राक्षस राज सुमाली
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नानी: केतुमती
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एक दिलचस्प बात: रावण के पिता एक श्रेष्ठ ब्राह्मण थे और माता राक्षस कुल की थीं। यही कारण था कि रावण में एक ऋषि पुत्र की तरह चारों वेदों का परम ज्ञान, बुद्धि और तपस्या करने की क्षमता थी, तो वहीं अपनी माता के पक्ष के कारण उसमें भयंकर राक्षसी बल, पराक्रम और महत्वाकांक्षा भी कूट-कूट कर भरी थी।





