हम जानते है की हमारे देश में अभी भी स्पोर्ट्स का इतना कल्चर नहीं है। फिर भी पिछले कुछ सालो में हमने काफी ऐसे खिलाडी देखे ही जिन्होंने अपनी महेनत और काबिलियत के दम पर अपने क्षेत्र में एक अलग ही जगह बनाई है और ऐसे ही खिलाडियों ने इतिहास बनाया है। इन्ही चंद खिलाड़ियोंमे से एक है पुलेला गोपीचंद। बैंडमिंटन की दुनिया के यह खिलाड़ी ने खेल के प्रति अपनी रूचि और लगाव के चलते इस खेल में वो ऊंचाई हांसिल की है की आज बैडमिंटन की दुनिया में उन्हें एक रोल मॉडल माना जाता है।
सौजन्य: हिन्दू
गोपीचंद की सिद्धि और संघर्ष की गाथा है उन की जीवनी जिसे नाम दिया गया है द वर्ल्ड बेनेथ हिज फ़ीट। इस आत्मकथा में उन्होंने इस खेल से जुड़ने से पहले, खेल के दिन और उनके रिटायरमेंट के बाद के जीवन के विविध प्रसंगो का वर्णन किया है। आज के युवा जो की एक छोटी सी असफलता के चलते आहत हो जाते है उनके लिए यह किताब एक पथ प्रदर्शक बन सकती है। इस किताब में उनके ख़्वाब और बैडमिंटन से जुड़े काफी रोचक अनुभवों का भी वर्णन किया गया है। गोपीचंद को सरकार की और से खेल रत्न एवं अन्य पुरस्कार भी मिले है।

