संघर्ष तो जीवन की एक निशानी है। संघर्ष के बिना तो मां अपने बच्चे को दूध भी नहीं पिलाती। हिंदू और मुस्लिम के बीच में संघर्ष धार्मिक तौर पर तो बहुत कम है यह तो एक राजनीतिक षड्यंत्र होते है, जब मतदान नजदीक आते हैं तो विभिन्न धार्मिक मुद्दों को उठाकर राजनेता अपनी जीत को सुनिश्चित करते हैं दिखावे के लिए जतलाते हैं कि वह इस धर्म के साथ है वह उस धर्म के साथ हैं। साधारण जनता तो सिर्फ सुकून की जिंदगी ही व्यतीत करना चाहती है, चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो, इसाई हो।

ये भी पढ़े - हिन्दू मुस्लिम की लड़ाई में नुक्सान किसका है?





