औरतें अपनी जरूरत से ज्यादा अपने परिवार की जरूरतों को महत्व देती हैं, वो ऐसा क्यों करती हैं, इसकी कोई एक वजह नहीं हैं | एक औरत के जीवन में कई ऐसी वजह हैं, जो उसको कई बार अपनी जरूरतों को कम महत्व देने पर मजबूर करती हैं, और कई बार तो महत्व न देने पर मजबूर कर देती हैं | परन्तु सभी महिलाएं ऐसी नहीं होती |
अधिकतर महिलाएं बहुत बचत करने वाली होती हैं | बचत करने के लिए वो उन चीजों में कटौती करती है, जो चीज़ें उनको अपने लिए लेनी होती हैं | अगर कही बहार घूमने जाने के लिए कहा जाये तो वो अक्सर मन कर देती हैं, नहीं जाती, क्योकि उन्हें लगता हैं, फ़िज़ूल खर्चा होगा | कभी कहीं घूमने गए भी तो वो खाने-पीने की चीज़ें नहीं खरीदती क्योकि उन्हें लगता हैं, महंगा है, पैसे ज्याद खर्च हो जाएंगे|
अक्सर ऐसी महिलाएं ये सोच कर अपने लिए कुछ नहीं लेती, क्योकि उन्हें लगता हैं, अगर वो ये चीज़ नहीं लेंगी तो इसके बदले उसके बच्चें कोई दूसरी चीज़ ले लेंगे, या फिर उसको लगता हैं, अपने बच्चों के लिए या अपने परिवार के कुछ ले लेते हैं, अपने लिए दोबारा में ले लुंगी, और अक्सर यही सोचती रह जाती हैं |
बस यही सोच लेकर एक औरत अपनी हर इच्छा को मार देती हैं | एक औरत ये नहीं सोचती की उसका ऐसा करना शायद कहीं का कहीं उसको ही तकलीफ दे रहा हैं | जब एक औरत हर चीज़ के लिए यह कह कर मना कर देती हैं, कि "मुझे नहीं चाहिए" या "ये मुझे अच्छा नहीं लगता " तो उसके परिवार वालों को लगता हैं, कि सच में ये चीज़ उसको नहीं चाहिए, या उसको पसंद नहीं हैं |
अगर एक औरत अपनी इच्छा को यूहीं मारती रहें तो एक वक़्त ऐसा आएगा जब आपके परिवार को ऐसा लगेगा के आपको किसी चीज़ की जरूरत ही नहीं और वो आपसे पूछना ही बंद कर देंगे | अगर उन्होंने आपसे पूछना बंद किया तो फिर आपको ये एहसास होगा कि में अपनों के लिए कितने त्याग किये और इसके बदले मुझे क्या मिला | आपको ऐसा लगेगा कि, किसी को आपकी जरूरत ही नहीं हैं |
मुझे ऐसा लगता हैं, एक औरत कोअपनी इच्छा को कम करना चाहिए पर उसको पूरी तरह मार देना सही नहीं हैं |