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Educationलिंग किसे कहते हैं?लिंग के भेद, परिभाषा ...
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| Updated on March 11, 2026 | education

लिंग किसे कहते हैं?लिंग के भेद, परिभाषा तथा उदाहरण सहित समझाइए?

3 Answers
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@meenakushwaha8364 | Posted on September 20, 2023

लिंग -
संज्ञा के जिस शब्द से हम किसी व्यक्ति या फिर वस्तु के पुरुष के जाति या स्त्री के जाति के बारे मे पता लगाया जा सकते,उसे ही लिंग कहा जाता है।

लिंग की परिभाषा -
लिंग उन शब्दों का रूप होता है, जिसमे स्त्री और पुरुष में अंतर किया जा सकता हो,यानी यदि स्त्री और पुरुष का बोध कराया जाता है तों उसे लिंग कहते है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि लिंग संस्कृत भाषा का शब्द होता है जिसका अर्थ है “निशान” या “चिन्ह” होता है।

जैसे–

मालिक -मालकिन
लड़का -लड़की
माता -पिता
ऊंट -ऊंटनी
घोड़ा -घोड़ी
हाथी -हथनी
लेखक -लेखिका
राजा -रानी
कवि -कवित्री
माली -मालिनी
पंडित -पंडिताइन

लिंग के भेद -
लिंग के तीन भेद होते है -

1. पुल्लिंग लिंग
2.स्त्री लिंग
3.नपुंसक लिंग

1.पुल्लिंग लिंग -

पुल्लिंग लिंग वह शब्द होते है जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि वह पुरुष जाति का है, उसे पुल्लिंग लिंग कहते है। जैसे -बेटा, भेड़, कुत्ता, खरगोश, लोमड़ी, लड़का आदि।

2.स्त्री लिंग-
स्त्री लिंग वह शब्द होते है जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि वह स्त्री जाति का है, उसे स्त्री लिंग कहते है। जैसे - बेटी, गाय, मोरनी, शिक्षिका आदि।

3.नपुंसक लिंग -
नपुंसक लिंग होते है जिससे यह पता लगाया जा सकता है, वह नपुंसक जाति का है, उसे नपुंसक लिंग कहते है।Article image

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@kanchanpatel4206 | Posted on October 25, 2023

लिंग -

जिस संज्ञा शब्द से व्यक्ति की जाति का पता चलता है उसे लिंग कहते हैं। इससे यह पता चलता है की वह पुरुष जाति का है या स्त्री जाति का है। उदाहरण के लिए : पुरुष जाति में = मोहन, लड़का, शेर, घोड़ा, दरवाजा, पंखा, कुत्ता, पिता, भाई आदि। और स्त्री जाति में मोहिनी, लड़की, शेरनी, घोड़ी, कैची, अलमारी, माता, बहन आदि। तो चलिए देखते हैं।

लिंग की परिभाषा -

लिंग उन शब्दों का रूप होता है जिनसे स्त्री और पुरुष में अंतर किया जा सके। यानी अगर स्त्री और पुरुष का बोध कराते हो, उन्हें लिंग कहा जाता है। आपको बता दें कि लिंग संस्कृत भाषा का शब्द है।निशान” या “चिन्ह”।

जैसे–

हाथी – हथनी

माली – मालिन

कवि – कवियत्री

राजा – रानी

सम्राट – सम्राज्ञी

घोड़ा – घोड़ी

लेखक – लेखिका

लड़का – लड़की

पंडित –पडिताइन।

लिग के भेद -पुल्लिंग (पुरुष जाति)

स्त्रीलिंग (स्त्री जाति)

नपुंसकलिंग (जड़)

1.पुल्लिंग लिंग -

पुल्लिंग लिंग वह शब्द होते है जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि वह पुरुष जाति का है, उसे पुल्लिंग लिंग कहते है। जैसे -बेटा, भेड़, कुत्ता, खरगोश, लोमड़ी, लड़का आदि।

2.स्त्रीलिंग (स्त्री जाति):-शब्द का वह रूप जिससे पता लगाया जाता है कि वह स्त्री जाति है, उन्हें स्त्रीलिंग कहा जाता है। जैसे बेटी, पुत्री, शिक्षिका, गाय, मोरनी आदि।

3.नपुंसक लिंग :-जिससे यह पता लगाया जा सकता है, वह नपुंसक जाति का है, उसे नपुंसक लिंग कहते है।

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@rajeshyadav9188 | Posted on March 11, 2026

हिंदी व्याकरण में 'लिंग' (Gender) एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, जो संज्ञा शब्दों के पुरुष या स्त्री जाति के होने का बोध कराता है। सरल शब्दों में कहें तो, शब्द के जिस रूप से यह पता चले कि वह पुरुष है या स्त्री, उसे लिंग कहते हैं।

लिंग की परिभाषा

संज्ञा के जिस रूप से किसी व्यक्ति, वस्तु या प्राणी की नर (Male) या मादा (Female) जाति का बोध होता है, उसे व्याकरण में 'लिंग' कहा जाता है। उदाहरण के लिए— लड़का, लड़की, शेर, शेरनी, दादा, दादी आदि।

लिंग के मुख्य भेद (Types of Gender)

हिंदी भाषा में मुख्य रूप से लिंग के दो भेद होते हैं:

  1. पुल्लिंग (Masculine Gender): जिन संज्ञा शब्दों से पुरुष जाति का बोध होता है, उन्हें पुल्लिंग कहते हैं।

    • उदाहरण: राम, घोड़ा, मेज, पहाड़, सूरज, लोहा, बचपन।

  2. स्त्रीलिंग (Feminine Gender): जिन संज्ञा शब्दों से स्त्री जाति का बोध होता है, उन्हें स्त्रीलिंग कहते हैं।

    • उदाहरण: सीता, घोड़ी, कुर्सी, नदी, चांदनी, चांदी, ममता।

लिंग की पहचान के कुछ नियम

  • सजीव वस्तुओं में: सजीव प्राणियों में लिंग की पहचान करना आसान होता है (जैसे: बकरा-बकरी)।
  • निर्जीव वस्तुओं में: निर्जीव वस्तुओं का लिंग निर्धारण उनके साथ प्रयोग होने वाली क्रिया या विशेषण से होता है। जैसे: "पानी गिर रहा है" (पुल्लिंग) और "चाय गिर गई" (स्त्रीलिंग)।
  • सदैव पुल्लिंग रहने वाले शब्द: पर्वतों के नाम (हिमालय), देशों के नाम (भारत), महीनों के नाम (मार्च)।
  • सदैव स्त्रीलिंग रहने वाले शब्द: नदियों के नाम (गंगा), तिथियों के नाम (एकादशी), भाषाओं के नाम (हिंदी)।

निष्कर्ष: लिंग का सही ज्ञान न केवल वाक्य रचना को शुद्ध बनाता है, बल्कि यह क्रिया और विशेषण के सही प्रयोग में भी मदद करता है।

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