कंप्यूटर की दुनिया में वायरस, ट्रोजन और मैलवेयर ऐसे खतरनाक सॉफ्टवेयर होते हैं जो सिस्टम को नुकसान पहुंचाने या यूज़र की जानकारी चुराने के लिए बनाए जाते हैं। ये सभी अलग-अलग तरीके से काम करते हैं, लेकिन इनका मकसद आमतौर पर सिस्टम को नुकसान देना या डेटा चोरी करना होता है।
सबसे पहले बात करते हैं Computer Virus की। वायरस एक ऐसा प्रोग्राम होता है जो किसी फाइल या प्रोग्राम के साथ जुड़कर कंप्यूटर में फैलता है। जब आप किसी संक्रमित फाइल को खोलते हैं, तो वायरस सक्रिय हो जाता है और धीरे-धीरे सिस्टम की दूसरी फाइलों को भी खराब कर सकता है। इससे कंप्यूटर स्लो हो सकता है, फाइलें डिलीट हो सकती हैं या सिस्टम क्रैश भी हो सकता है।
इसके बाद आता है Trojan Horse। ट्रोजन एक ऐसा खतरनाक प्रोग्राम होता है जो दिखने में एक सामान्य या सुरक्षित सॉफ्टवेयर जैसा लगता है, लेकिन इसके अंदर छुपा हुआ वायरस या हानिकारक कोड होता है। जब यूज़र इसे इंस्टॉल करता है, तो यह बैकग्राउंड में सिस्टम को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। ट्रोजन अक्सर पासवर्ड, बैंक डिटेल्स और पर्सनल डेटा चुराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
अब बात करते हैं Malware की, जो एक बड़ा टर्म है। मैलवेयर का मतलब होता है “Malicious Software”, यानी कोई भी ऐसा सॉफ्टवेयर जो नुकसान पहुंचाने के लिए बनाया गया हो। इसमें वायरस, ट्रोजन, वॉर्म, स्पाईवेयर और रैनसमवेयर सभी शामिल होते हैं। मैलवेयर कंप्यूटर की सुरक्षा को कमजोर कर सकता है, फाइलों को लॉक कर सकता है या यूज़र की गतिविधियों को ट्रैक कर सकता है।
इन सभी का असर कंप्यूटर की परफॉर्मेंस पर पड़ता है। सिस्टम धीमा हो जाता है, बार-बार हैंग होने लगता है और कई बार जरूरी डेटा भी खो सकता है। कुछ मैलवेयर तो पूरे सिस्टम को लॉक करके पैसे मांगते हैं, जिसे रैनसमवेयर कहा जाता है।
बचाव के लिए हमेशा एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना चाहिए, अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए और सिर्फ भरोसेमंद वेबसाइट से ही फाइल डाउनलोड करनी चाहिए।
अगर आसान भाषा में समझें तो वायरस, ट्रोजन और मैलवेयर ऐसे डिजिटल कीटाणु हैं जो कंप्यूटर को बीमार कर सकते हैं। ये डेटा चोरी, सिस्टम खराब और सुरक्षा में बड़ी समस्या पैदा कर सकते हैं, इसलिए इनसे बचाव करना बहुत जरूरी है।