16वीं सदी में, विशेष रूप से मुगल साम्राज्य के उत्कर्ष के दौरान, भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक था। वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में भारत की हिस्सेदारी लगभग 24% से 25% थी, जो उस समय के पूरे यूरोप से भी अधिक थी।
भारत के एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनने के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण थे:
1. कपड़ा उद्योग का वैश्विक दबदबा
16वीं सदी में भारत का सूती वस्त्र उद्योग दुनिया में बेजोड़ था।
- निर्यात: भारतीय कपड़े (जैसे ढाका की मलमल, चंदेरी रेशम और कालीकट का कैलिको) की मांग पूरी दुनिया में थी।
- तकनीक: चरखे और जुलाहों की दक्षता ने भारत को दुनिया का "कपड़ा घर" बना दिया था। यूरोप से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारतीय कपड़ों का व्यापार होता था।
2. उन्नत जहाज निर्माण (Shipbuilding)
भारत के पास जहाज बनाने की उत्कृष्ट तकनीक थी।
- भारतीय जहाज लकड़ी की गुणवत्ता और मजबूती के मामले में यूरोपीय जहाजों से बेहतर माने जाते थे।
- गुजरात और बंगाल के तटों पर बड़े पैमाने पर मालवाहक जहाजों का निर्माण होता था, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रीढ़ थे।
3. कृषि और कच्चे माल की प्रचुरता
औद्योगिक विकास के लिए कच्चा माल कृषि से आता था।
- नकदी फसलें: कपास, नील (Indigo), अफीम और रेशम का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता था।
- खाद्य सुरक्षा: कृषि अधिशेष (Surplus) होने के कारण कारीगरों और मजदूरों को सस्ता भोजन उपलब्ध था, जिससे उत्पादन लागत कम रहती थी और निर्यात प्रतिस्पर्धी बना रहता था।
4. धातु कर्म (Metallurgy) और हथियार
भारतीय इस्पात, विशेष रूप से 'वूट्ज स्टील' (Wootz Steel), की मांग पूरी दुनिया में थी।
- इसी स्टील से मशहूर 'दमिश्क तलवारें' बनाई जाती थीं।
- धातु के बर्तन, तोपें और युद्ध सामग्री बनाने के मामले में भारत के पास उन्नत तकनीक थी।
5. व्यापारिक मार्ग और बुनियादी ढांचा
- सड़क और सराय: शेरशाह सूरी और बाद में मुगलों ने 'ग्रैंड ट्रंक रोड' जैसे मार्गों का विस्तार किया, जिससे आंतरिक व्यापार सुगम हुआ।
- बैंकिंग प्रणाली: भारत में 'हुंडी' (Hundi) प्रणाली प्रचलित थी, जो एक प्रकार का ऋण पत्र या क्रेडिट नोट था। इसने व्यापारियों को बिना नकद ले जाए लंबी दूरी तक व्यापार करने में मदद की।
6. कुशल कारीगर और विशेषज्ञता
भारत में जाति आधारित व्यावसायिक संरचना के कारण पीढ़ियों से कौशल (Skills) हस्तांतरित होते आ रहे थे। इससे अत्यधिक कुशल श्रम बल तैयार हुआ जो बारीकी और गुणवत्ता में दुनिया के अन्य देशों से काफी आगे था।





