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Sweety Sharma· 8 साल पहले
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हम तुलसी पर जल क्यों चढ़ाते हैं ?

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जवाब दिया गया09/25/23

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को पूजा जाता है क्योंकि इसमें लोगों का कहना है की देवी का वास होता है तुलसी के पौधों को मां लक्ष्मी का ही रूप माना जाता है हमारे हिंदू धर्म में शास्त्रों में तुलसी की पूजा करने जल चढ़ाने के कुछ नियम बताए गए हैं जिसका पालन करना जरूरी है वरना मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं धर्म शास्त्रों के अनुसार तुलसी जी के पौधे में रविवार के दिन जल नहीं चढ़ाना चाहिए माना जाता है इस दिन तुलसी जी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत जागते हैं ऐसे में रविवार को तुलसी के पौधे में जल चढ़ाने से उसका व्रत टूट जाता है इसीलिए हमें रविवार के दिन तुलसी के पौधे में जल नहीं चढ़ाना चाहिए तुलसी माता की पूजा करना चाहिए जिससे घर मे पावन होती है या धन आता है तुलसी माता की पूजा करनी चाहिए जिससे तुलसी माता का आशीर्वाद सदैव उसे व्यक्ति पर बना रहता है और उसे कभी धन की आवश्यकता नहीं पड़ती है उसके घर में भरपूर धन पाया जाता है Letsdiskuss

और पढ़े- तुलसी मे जल चढ़ाते समय भूलकर भी कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?

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जवाब दिया गया09/25/23

सनातन धर्म में तुलसी के पौधों को पूजने माना गया है इसलिए घर में तुलसी का पौधा लगाया जाता है और सुबह शाम में उसकी पूजा की जाती है जल चढ़ाया जाता है सुबह स्नान करके तुलसी के पौधे में जल चढ़ाना मां लक्ष्मी की आश्रम कृपा दिलाता है तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी का ही रूप माना जाता है घर में तेजी से धन की आवक होती है सुख समृद्धि बरकत बढ़ती है लेकिन धर्म शास्त्रों में तुलसी की पूजा करनी जल चढ़ाने के कुछ नियम बताए गए हैं जिनका पालन करना जरूरी है वरना मां लक्ष्मी नाराज हो जाती है।

धर्म शास्त्रों के अनुसार तुलसी जी के पौधे में रविवार के दिन जल नहीं चढ़ाना चाहिए माना जाता है कि इस दिन तुलसी जी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखते हैं ऐसे में रविवार को तुलसी के पौधे में जल डालने से उनका व्रत टूट जाता है इससे तुलसी जी और माता लक्ष्मी नाराज हो जाते हैं इसलिए कभी भी रविवार के विष्णु प्रिया तुलसी में जल नहीं चढ़ाना चाहिए।Letsdiskuss

Poonam Patel
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जवाब दिया गया09/26/23

दोस्तों सनातन धर्म में तुलसी का पौधा पूजनीय माना जाता है इसीलिए भारतीय घर में तुलसी का पौधा लगाया जाता है। जो लोग सुबह स्नान करके प्रतिदिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाते हैं तो उनके घर में मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास भी होता है लेकिन आज इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि आप किस दिन तुलसी के पौधे मैं चल नहीं चढ़ा सकते हैं तो आपको रविवार के दिन तुलसी के पौधे में जल नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि रविवार के दिन माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और जब कोई तुलसी के पौधे में जल चढ़ता है तो इससे माता तुलसी का व्रत खंडित हो जाता है ज्योतिष शास्त्र की माने तो जो लोग रविवार के दिन माता तुलसी के पौधे में जल चढ़ाते हैं तो उनके घर में नकारात्मक शक्तियों का वास होता है और माता लक्ष्मी रूड जाती हैं। इसीलिए भूल कर भी रविवार के दिन तुलसी के पौधे में जल नहीं चढ़ाना चाहिए।

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जवाब दिया गया09/25/23

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को पूजनीय माना गया है इसीलिए घर में तुलसी का पौधा लगाया जाता है सुबह शाम उसकी पूजा की जाती है सुबह समय उसकी पूजा की जाती है सुबह स्नान करके तुलसी के पौधे में जल चढ़ाना मां लक्ष्मी की असीम कृपया आता है तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी एक में से एक ही रूप माना गया है सुख समृद्धि बरकत पड़ती है धर्म शास्त्रों के अनुसार तुलसी के पेड़ में तुलसी जी और माता लक्ष्मी राजा की पूजा करने जल चढ़ाने के कुछ इस दिन तुलसी जी भगवान विष्णु जिसका पालन करना जरूरी है वरना मां लक्ष्मी नाराज हो जाती है तुलसी के पौधे के नियम घर में धर्म शास्त्रों के अनुसार रविवार के दिन मेरे जल नहीं चढ़ाना चाहिए रविवार के दिन तुलसी जी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती है लेख की तस्वीर

Kanchan  Patel
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अपडेट किया गया10/01/18
"तुलसी" हर घर में एक महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली और भगवान के बराबर दर्ज़ा रखती है | तुलसी हिन्दू धर्म में बहुत ही मान्यता रखती है | तुलसी को "तुलसी माता " कहा जाता है |

तुलसी माँ :-

तुलसी माँ का इंसान रूप में वृंदा नाम था | जिनका जन्म राक्षस कुल में हुआ था | राक्षस कुल में होने के बाद भी वह भगवान विष्णु की बहुत बड़ी भक्त थी | वृंदा का विवाह राक्षस कुल के दानव जलंधर के साथ हो गया | जलंधर ने समुद्र मंथन के समय समुद्र से जन्म लिया | उनकी उत्पत्ति जल से हुई इसलिए उनका नाम जलंधर पड़ गया |

वृंदा बहुत ही पतिव्रता स्त्री थी, और जब तक उसका सत उसके अंदर जीवित था, तब तकउसके पति को कोई भी किसी भी प्रकार का नुक्सान नहीं पंहुचा सकता था | एक समय जब जलंधर देवताओं से युद्ध के लिए गए, तो वृंदा ने संकल्प किया कि जब तक मेरा पति युद्ध से वापस नहीं आएगा तब तक मैं पूजा में बैठी रहूंगी |


यह बात सभी देवता जानते थे, कि जलंधर का सर्वनाश तब तक निश्चित नहीं जब तक वृंदा का सत उसके अंदर जीवित है | वृंदा का सत भंग करने के लिए सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचे, और उन्होंने विष्णु जी से आग्रह किया कि वो वृंदा का सत भंग करें, ताकि जलंधर का नाश हो सके और धरती पर राक्षस साम्राज्य का अधिकार होने से बच जाये |

विष्णु भगवान ने सभी का आग्रह माना और जलंधर का रूप लेकर वृंदा के पास गए | वृंदा ने अपने पति को युद्ध से वापस आता देखा और पूजा से उठ कर उनके चरण छूने लगी तभी जलंधर का कटा हुआ सिर वृंदा के पूजा स्थान पर आ गया | वृंदा ने जब देखा तो उसने जलंधर का रूप लिए इंसान को उसके असली रूप में आने को कहा और जैसे ही भगवान विष्णु ने अपना रूप धारण किया तो वृंदा ने उन्हें पत्थर हो जाने का श्राप दे दिया |

वृंदा के इस श्राप से भगवान विष्णु पत्थर के हो गए |माता लक्ष्मी के बहुत आग्रह के बाद उन्होंने विष्णु जी से अपना श्राप वापस ले लिया, और उस दिन से विष्णु भगवान का एक रूप पत्थर का हो गया | उसके बाद वृंदा ने अपने पति की चिता पर ही बैठकर अपनी जान दे दी | वृंदा की चिता की राख से एक पौधे ने जन्म लिया जो "तुलसी " कहलाता है, और भगवान विष्णु का पत्थर वाला रूप "शालिग्राम "कहलाता है | विष्णु ने वृंदा को एक वरदान दिया कि आज से हम दोनों को एक साथ पूजा जाएगा और मेरा भोग बिना तुलसी के कभी नहीं लगेगा | तुलसी को भगवान के समान ही पूजा जाएगा |
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जवाब दिया गया04/15/23

हम तुलसी पर जल क्यों चढ़ाते हैं क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है शायद आपने नहीं सोचा होगा चलिए हम आपको उसके पीछे का कारण बताते हैं। आपने देखा होगा कि आपके घर में आपके मम्मी पापा जब भी स्नान करके आते हैं तो सबसे पहले सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं इसके बाद एक लोटा जल तुलसी के पौधे में डालते हैं दरअसल ऐसा इसलिए किया जाता है ऐसी मान्यता है कि तुलसी को जल देने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और उनकी कृपा हमेशा भक्तों पर बनी रहती है और वैज्ञानिक मान्यता यह है कि तुलसी पर जल देने से तुलसी का पेड़ हरा भरा रहता है और हमारे वातावरण को शुद्ध बनाए रखने में हमारी मदद करता है।

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और पढ़े- गणेश भगवान को तुलसी क्यों नहीं चढ़ायी जाती है?

Krishna Patel
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अपडेट किया गया09/25/18

हिन्दू धर्म में तुलसी की पूजा बहुत ही महत्वपूर्ण है | बचपन से हम सुनते आ रहें, तुलसी पूजन के बारें में | हमारे बड़े हमेशा यही कहते रहते थे, सुबह उठकर नहाओ और एक लोटा जल तुलसी को जरुरी चढ़ाओ , उसके बाद जिसको जो काम करना है, करते रहो | सुबह उठे नहाएं, तुलसी को जल चढ़ाया, बस हो गया, कभी ये जानने की कोशिश नहीं की कि हम तुलसी पर जल क्यों चढ़ाते हैं, बस हमारे बड़ों ने कहा और मान लिया बात वही ख़त्म |


यह भी पढ़ें - तुलसी कब तोड़ना वर्जित है ?


आज का सवाल उन सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो हर रोज तुलसी पर जल चढ़ाते तो है, पर वो कारण नहीं जानते कि हम ऐसा कर क्यों रहें हैं | चलिए आज हम आपको बताते हैं,तुलसी पर जल क्यों चढ़ाया जाता है ? क्यों उन्हें पूजा जाता हैं ?


क्यों चढ़ाते हैं, तुलसी पर जल ?

घर में पौधे लगाने का शोक अधिकतर लोगों को होता है | कुछ लोग तो वो पौधे घर के अंदर भी रखते हैं, जो इनडोर प्लांट की श्रेणी में आते हैं | तुलसी का पौधा हमेशा लोग अपने आँगन में लगाते है | तुलसी एक ऐसा पौधा है, जो शुद्ध वातावरण के साथ-साथ एक धार्मिक वातावरण भी प्रदान करता है | तुलसी को देखते ही प्राकर्तिक रूप से मन में पूजा भाव उत्पन्न होता है |
तुलसी का पौधा आपके घर में सुख,सुविधा,ख़ुशी,ज्ञान,विवेक,धन,संपत्ति का आगमन कराता है | आपके घर का वातावरण शुद्ध रहता है | आपका तुलसी को रोज सुबह जल चढ़ाना आपके घर की सुख सुविधाओं को बढ़ाता हैं, और साथ ही नकारात्मकता को दूर रखता है | यदि आप सूर्य देव को जल चढ़ाने के बाद तुलसी पर जल चढ़ाते हैं, तो आपका स्वास्थ भी ठीक होता है |

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