कुछ लोगों को लगता है कि modern lifestyle, technology और busy routines की वजह से spirituality कम हो रही है। वहीं दूसरी तरफ social media, online satsang, temples और spiritual content की popularity भी काफी बढ़ी है। इसलिए पूरी तरह कहना मुश्किल है कि faith कम हो रहा है। आजकल लोग traditional practices की बजाय personal spirituality और mental peace पर ज्यादा focus करते दिखते हैं। Honestly, हर generation का धर्म और spirituality express करने का तरीका अलग होता है। Belief systems बदल सकते हैं लेकिन spirituality completely खत्म हो जाएगी ऐसा अभी नहीं लगता।
क्या कलयुग के समय मे भगवान की मान्यता कम होती जा रही है ?
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नमस्कार ब्रिज जी ,आपका सवाल है की कलयुग के समय लोगो के मन मे भगवान् की मान्यता है या नहीं? तो आपको बता दे के जिस तरह के हालात धरती मे है और जितने पाप इस धरती मे हो रहे है उसके हिसाब से तो धरती कब की ख़तम हो जाती | पर अगर धरती है और यहाँ सामन्य जीवन संभव है तो इसका यही मतलब है के यहाँ भगवन भी है |
जैसा की सभी जानते है के जहां धर्म है वहाँ अधर्म है , जहां जन्म है वहाँ मृत्यु है | जहां पाप है वहाँ पुण्य है, जहां लोभ है वहाँ दोष है , जहां शांति है वहाँ अशांति है उसी प्रकार जहां कलयुग है वहाँ भगवान भी है | ये बात सभी जानते है - त्रेता युग मे श्री राम ने अपने परम प्रिय मित्र हनुमान से कहा था "कोई भी युग होगा सतयुग , द्वापर युग ,सतयुग या कलयुग एक हनुमान ही धरती पर रहेंगे जो हर युग मे अपने भक्तो के संकट को काटेंगे और उनकी परेशानियों को कम करेंगे " | और कलयुग के समय धरती इतने पाप के बाद भी अपने स्थान पर खड़ी है तो वो इसलिए क्योकि कही न कही राम का नाम लेने वाला इस धरती मे मोजूद है |
चलिए आपको बताते है ऐसे चमत्कारी हनुमान जी के मंदिर जहां सच मे लोगो की मनोकामना पूरी होती है | ऐसे मंदिर जहां राम का नाम लेने वाला आज भी मौजूद है और अपने भक्तो के कष्टों को दूर कर रहा है |
1. हनुमान मंदिर इलाहबाद (उत्तर प्रदेश ) :
धर्म की नगरी इलाहाबाद में संगम किनारे शक्ति के देवता हनुमान जी का एक अनूठा मन्दिर है। यह पूरी दुनिया मे इकलौता मन्दिर है, जहां बजरंग बलि की लेटी हुई प्रतिमा को पूजा जाता है। ऐसी मान्यता है कि संगम का पूरा पुण्य हनुमान जी के इस दर्शन के बाद ही पूरा होता है। इस मान्यता के पीछे रामभक्त हनुमान के पुनर्जन्म की कथा जुड़ी हुई है।
2. हनुमानगढ़ी, अयोध्या :
यहां का सबसे प्रमुख श्रीहनुमान मंदिर “हनुमानगढ़ी” के नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर राजद्वार के सामने ऊंचे टीले पर स्थित है और यहां से काफी दूर से भी साफ - साफ देखा जा सकता है। कहा जाता है कि हनुमान यहाँ एक गुफा में रहते थे और रामजन्मभूमि और रामकोट की रक्षा करते थे। हनुमान को रहने के लिए यही स्थान दिया गया था। हनुमानगढ़ी जिसे हनुमान जी का घर भी कहा जाता है, यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है।
3. सालासर हनुमान मंदिर ( राजस्थान )
सालासर में बालाजी के आने के काफी सालों बाद यहां माता अंजनी का आगमन हुआ। कहते हैं कि बालाजी के अनुरोध पर माता अंजनी सालासर आई। लेकिन उन्होंने कहा कि वह साथ में नहीं रहेंगे इससे पहले किसकी पूजा होगी यह समस्या हो सकती है। इसलिए बालाजी की माता का मंदिर बालाजी मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित है। इस मंदिर में अंजनी माता की गोद में बालाजी बैठे हैं। इस मूर्ति के आगमन की कथा भी बड़ी रोचक है।
4. हनुमान धरा चित्रकूट :
हनुमान धारा के बारे में कहा जाता है की जब श्री हनुमान जी ने लंका में आग लगाई उसके बाद उनकी पूंछ में लगी आग को बुझाने के लिए वो इस जगह आये जिन्हे भक्त हनुमान धारा कहते है | यह विन्ध्यास के शुरुआत में राम घाट से 4 किलोमीटर दुर है | एक चमत्कारिक पवित्र और ठंडी जल धारा पर्वत से निकल कर हनुमान जी की मूरत की पूँछ को स्नान कराकर निचे कुंड में चली जाती है | कहा जाता है की जब हनुमानजी ने लंका में अपनी पूँछ से आग लगाई थी तब उनकी पूँछ पर भी बहूत जलन हो रही थी | रामराज्य में भगवन श्री राम से हनुमानजी विनती की जिससे अपनी जली हुई पूँछ का इलाज हो सके | तब श्री राम ने अपने बाण के प्रहार से इसी जगह पर एक पवित्र धारा बनाई जो हनुमान जी की पूँछ पर लगातार गिरकर पूँछ के दर्द को कम करती रही | यह जगह पर्वत माला पर है |
5. बाला जी हनुमान मंदिर : -
यूं तो भारत में हनुमानजी के लाखों मंदिर हैं। हर मंदिर पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है, पर राजस्थान के दौसा जिला स्थित घाटा मेंहदीपुर बालाजी की बात ही अलग है। मेंहदीपुर बालाजी को दुष्ट आत्माओं से छुटकारा दिलाने के लिए दिव्य शक्ति से प्रेरित हनुमानजी का बहुत ही शक्तिशाली मंदिर माना जाता है। यहां कई लोगों को जंजीर से बंधा और उल्टे लटके देखा जा सकता है। यह मंदिर और इससे जुड़े चमत्कार देखकर कोई भी हैरान हो सकता है। शाम के समय जब बालाजी की आरती होती है तो भूतप्रेत से पीड़ित लोगों को जूझते देखा जाता है।राजस्थान के दौसा जिले के पास दो पहाडिय़ों के बीच बसा हुआ मेहंदीपुर नामक स्थान है। यह मंदिर जयपुर-बांदीकुई- बस मार्ग पर जयपुर से लगभग 65 किलोमीटर दूर है। दो पहाडिय़ों के बीच की घाटी में स्थित होने के कारण इसे घाटा मेहंदीपुर भी कहते हैं।
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आप जानना चाहते हैं कि क्या कलयुग में भगवान की मान्यता कम होते जा रही है तो मैं आपको बता दूं कि बिल्कुल वर्तमान समय में है लोगों के मन से भगवान का डर तो बिल्कुल निकल ही गया है आए दिन लोग इतने बड़े-बड़े अपराध करते हैं और उन्हें भगवान से बिल्कुल भी डर नहीं लगता है उन्हें लगता है कि भगवान जैसी चीज कुछ है ही नहीं तो मैं आपको बता दूंगी आपको भले ही ईश्वर दिखाई नहीं देता मगर मृत्यु के बाद आपको भगवान सजा अवश्य देंगे इस बात को हमेशा याद रखना चाहिए।

जी हाँ बिल्कुल कलयुग के समय यानि वर्तमान समय मे सभी के मन मे भगवान के प्रति मान्यता कम होती जा रही है, क्योंकि आज के समय मे सभी लोग आपने जीवन मे इतना व्यस्त हो गए है कि वह भगवान के प्रति कोई आस्था नहीं रखते है क्योंकि उन्हें लगता है कि इस दुनिया भगवान जैसी कोई चीज होती ही नहीं लेकिन मै आपको बताना चाहूँगी कि इस दुनिया मे भूत, प्रेत है तो भगवान भी निवास करते है इसलिए हमें भगवान के प्रति मान्यता रखनी चाहिए, भगवान की पूजा, आराधना जरूर करनी चाहिए।
हिन्दू धर्म में सभी ग्रहो को देव माना जाता है और सभी का अपना एक स्थान है | जितने भी ग्रह हिन्दू धर्म मे है उनका अपना अपना प्रकोप व फायदा है | ये ग्रह मानव जीवन मे उनके जन्म के साथ ही जुड़ जाते है | अब वो अच्छे है या बुरे ये उन ग्रहो की स्तिथि पर निर्भर होता है | आपके ग्रह व सितारे ही आपके वर्तमान व भविष्य तय करते है |
वैसे तो सभी ग्रह अपने आप मे महत्व रखते है परन्तु सबसे महत्वपूर्ण ग्रह शनि को माना जाता है | शनि का नाम आते ही लोगो के मन मे डर बैठ जाता है | पर उसके बाद भी लोग उसका उपाय नहीं करते वो अपनी लाइफ मे इतना व्यस्त होते है के उनको समय नहीं मिलता | परन्तु अगर उनकी लाइफ मे कुछ बुरा होता है तो वो भगवन को दोषी मानते है | शनि दोष भी कुंडली मिलाप में महत्वपूर्ण माना जाता है। यह जन्म के समय शनि की स्थिति पर निर्भर करता है।
शनि के प्रकोप से कैसे बचे :-
1 . शनि देव को प्रसन्न करने के लिए उनके इस श्लोक का जाप करे जिनमे उनके 10 नाम शामिल हो जाते है |
"कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:।
सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:।।"
2 . सुबह सूर्योदय से पूर्व पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाए और सरसो के तेल का दिया लगाए |
3 . शाम सूर्य अस्त होने के बाद पीपल के पेड़ पर सरसो तेल का दिया जलाए |
4 . पुरुष वर्ग शनि देव के मंदिर जाकर उन पर सरसो तेल चढ़ा सकते है | परन्तु महिलाओ को ये अनुमति नहीं है |
5. शनिवार के दिन कुष्ट रोगियों को भोजन करवाए और काली दाल व सरसो तेल दान दे |
6. काले घोड़े की नाल की अंगूठी बना कर पहने |
7. मंगलवार हनुमान जी के सामने तिल के तेल का दिया जलने से भी शनि का प्रकोप काम होता है |
सावधानी :-
" एक बात का विशेष ध्यान दे शनि देव का पूजन केवल सूर्योदय से पहले और सूर्य अस्त के बाद ही करे ,ऐसा करने से शनि देव का प्रकोप आपकी राशि से कम हो जाएगा और आपको लाभ मिलेगा "
जी हाँ बिलकुल कलयुग के समय मे भगवान की मान्यता बहुत ही कम होती जा रही है, पहले के समय मे लोग भगवान के प्रति बहुत ही आस्था रखते थे भगवान की पूजा किये बिना घर के बाहर कदम नहीं रखते थे। लेकिन आज के समय लोग भगवान क़ो बिल्कुल नहीं मानते है, भगवान क़ो सिर्फ तभी याद करते है ज़ब कोई मुसीबत आती है,तब भगवान क़ो याद करके उनके सामने हाथ जोड़ते है बाकी समय भगवान की पूजा -पाठ नहीं करते है।
वर्तमान समय में जो चल रहा हैं , मुझे नहीं लगता के भगवान कि मान्यता बची हैं | अगर भगवान् कि मान्यता हैं, इसका मतलब हैं, भगवान् का डर हैं | जो इस देश में परेशानी का माहौल हैं, उसको देख कर मुझे नहीं लगता, कि भगवान् कि कुछ मान्यता बची हैं | कलयुग में बस अपराध ही हैं, जो इस धरती में बचे हैं, उसके सिवा और कुछ नहीं |

वैसे तो वर्तमान समय को देखकर यहीं कहा जा सकता हैं कि भगवान् कि मान्यता कम नहीं बल्कि ख़तम हो गई हैं | हर जगह बस ऐसी-ऐसी बातें हैं,जिसके कारण भगवान् की मान्यता तो क्या इंसान की इंसानियत भी शर्मसार हैं |जहां लोगों की इंसानियत ही खतम हैं,वहाँ भगवान् के होने पर तो सदैव संदेह ही बना रहेगा |
आपके हिसाब से आदित्य जी धरती में भगवान् की मान्यता हैं ,पर माफ़ कीजियेगा में इस बात से बिलकुल भी सहमत नहीं हूँ | मैं नहीं मानता इस दुनिया में भगवान् की मान्यता बची भी हैं | अगर आपको लगता है कि भगवान् हैं तो बताइये इतने पाप क्यों हो रहें हैं ? क्यों ऐसे गुनाह हो रहे हैं,जिनसे मानव जाति ख़त्म होने की कगार पर है ? भगवान् के नाम पर मंदिरों में इतना चढ़ावा जाता हैं,उसका क्या प्रयोग होता हैं ?
मेरे हिसाब से आदित्य जीभगवान् को व्यापार का एक ज़रिया बना दिया है बस और कुछ नहीं |

ज्योतिष शास्त्र में सभी चीज़ें अपनी-अपनी जगह मायने रखती है । ऐसे ही ज्योतिष शाश्त्र में सबसे जरुरी है, हस्त रेखा का ज्ञान । जो लोग ज्योतिष को मानते हैं वो लोग हस्त रेखा को भी मानते हैं । हस्त रेखा में आपकी किस्मत आपकी लकीरों और आपकी रेखाओं में होती है। आज हम बात करेंगे कि जिसकी हथेली में तिल होता है, उनकी रेखाएं क्या कहती हैं।
आपका सवाल बहुत ही अच्छा है | क्या आप जानते है अगर आप इस धरती में अपनी ज़िंदगी जी रहे है तो इसका मतलब ये है के भगवान् है | अगर भगवान्न होते तो शायद ही जीवन संभव होता | और एक बात आपकी जानकरी के लिए बता दे आपको के त्रेता युग में श्री राम ने हनुमान जी को वरदान दिया था के हनुमान जी को कलयुग तक धरती पर ही रहना है | क्योकि इस पाप की नगरी को बचने के लिए इस धरती पर संकट काटने वाले सिर्फ हनुमान जी ही है |
तो इससे एक बात साफ़ होती है की अगर इस धरती पर साधारण जीवन जीना संभव है तो इसका अर्थ है की धरती में आज भी भगवान्है और उनकी मान्यता है | और वैसे भी धरती में जितने भी पाप हो रहे है उसके हिसाब से तो धरती कब की नष्ट हो जाना चाहिए परन्तु अगर धरती है तो भगवन है | और ऐसा नहीं है के भगवान् की मान्यता ख़तम हो गए है | बहुत से लोग है जो आज भी भगवान् को मानते है | और भगवान्का पूजन प्रतिदिन करते है |



