बहुत अच्छा सवाल हैं, लेखक दिल से लिखता है या दिमाग से, मेरा मानना हैं, लेखक सिर्फ लेख लिखता हैं | एक अच्छा लेखक वही होता हैं , जो अपने लेख को परिस्थिति के हिसाब से लिखे और उस पर अमल भी करें |
वैसे तो एक लेखक विषय के हिसाब से लिखता हैं, जहां उसको दिल से लिखने की जरूरत होती हैं, वो वहाँ अपने दिल का इस्तेमाल करता हैं, और जहां उसको दिमाग़ की जरूरत होती हैं, वहां वो अपने दिमाग का इस्तेमाल करता हैं |
दिल से या दिमाग से :-
- अगर कोई लेख लिखने के लिए लेखक के पास कोई ऐसा विषय हैं, जो समाज से जुड़ा हुआ हैं, तो लेखक उस स्थिति में अपने दिल और दिमाग दोनों का इस्तेमाल करता हैं |
- अगर लेख समाज से सम्बंधित किसी नाज़ुक विषय पर हैं, तो लेखक उसमें अपनी भावना व्यक्त करता हैं, या तो वो भावना क्रोध की होगी, या तकलीफ की, पर ऐसे में लेखक अपने दिल का इस्तेमाल करता हैं |
- अगर कोई लेखक राजनीती के बारें में कोई लेख लिखता हैं, तो निसंदेह वो अपने दिमाग का इस्तेमाल करता हैं |
वर्तमान समय में तो ऐसी स्थिति आ गई हैं, कि एक लेखक को ये समझ नहीं आ रहा वो क्या लिखे, कैसे लिखे , क्योंकि देश के बिगड़ते हालात को देख कर, कुछ भी सही नहीं लगता कि क्या किया जाये | वर्तमान में दिल से लिखों या दिमाग से पर लोगों के दिमाग में कुछ नहीं आता |


