मध्य प्रदेश के सतना जिले में त्रिकूट पर्वत पर मैहर माता जी का मंदिर स्थित है। मैहर माता का मंदिर देवी शारदा जी को समर्पित है इस मंदिर की गिनती मां के शक्तिपीठ में होती है। मैहर का अर्थ मां के हार से माना जाता है। मान्यता यह है कि इस जगह पर मां सती का हार गिरा था। जिस कारण इस जगह का नाम मैहर पड़ा। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए 1001 सीढियां चढ़नी पडेगी।
ऐसा माना जाता है कि मैहर माता जी के मंदिर की खोज दो भाइयो आल्हा और ऊदल ने की थी। कहा जाता है कि आल्हा ने यहां पर 12 वर्षो तक की तपस्या की थी। एक और मान्यता यह भी प्रचलित है कि इस मंदिर में सबसे पहले पूजा आदि शंकराचार्य द्वारा की गई थी।
मैहर माता जी के मंदिर के बारें में कई तरह ही कहानियां है जो प्रचलित है। एक कहानी के अनुसार मैहर मंदिर का पट रात को बंद कर देने पर जब सुबह खोला जाता है तो पता चलता है कि माता जी की पूजा पहले से ही कोई करके चला गया है, कहा जाता है ये पूजा करने वाले वीर योद्धा आल्हा और ऊदल है जिनका मैहर माता जी के मंदिर से बहुत गहरा संबंध है क्योकि दोनो देवी शारदा के परम भक्त थे।
इस मंदिर तब पहुंचने के लिए आपको सतना के रेलवे स्टेशन से उतरने के बाद सीधे मंदिर जाने के लिए ऑटो या रिक्शा मिल जाएगा। स्टेशन और मंदिर के बीच की दूरी मात्र दो किमी है।














