दोस्तों! तकनीक दुनिया में कुछ न कुछ नया लाती ही रहती है और आजकल बाजार में सेंड यानी से रेत बनी बैटरी की चर्चाएं जोरों शोरो से चल रही है, इंटरनेट मीडिया और यूट्यूब पर इस तरह के बहुत से वीडियो आते रहते हैं और सभी लोग यह जानना चाहते हैं कि रेट या सेंड से बनी बैटरी क्या है? तो चलिए हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से सेंड बैटरी के बारे मे बताते है -
सेड बैटरी क्या है?
सैंड बैटरी एक तरह से उच्च तापमान तापीय ऊर्जा भंडारण होती है जो अपने भंडारण माध्यम के रूप में रेत या रेत जैसी सामग्री का इस्तेमाल करती है। यह रेत में ऊर्जा को ऊष्मा के रूप में संग्रहीत करती है और लम्बे समय तक ऊष्मा बनाए रखने के लिये रेत बहुत ही प्रभावी माध्यम होता है, जो महीनों तक की बिजली का भंडारण करके रखता है।
सेंड बैटरी में बहुत बड़ा स्टील सिलो लगा हुआ होता है,सेंड बैटरी मे स्टील सिलो की लम्बाई 7 मीटर होती है और 4 मीटर चौड़ाई होती है तथा सेंड बैटरी मे एक टैंक भी होता है, इसमें 100 टन रेत से भरी हुयी होती है।सेंड बैटरी फिनलैंड के शहर कंकानपा में स्थापित की गयी है,सेंड बैटरी शहर के केंद्रीकृत हीटिंग नेटवर्क से जुड़ा हुआ होता है, जो ऊँची इमारतों तथा सार्वजनिक जल प्रणालियों को गर्म रखने के लिए होता है।
सैंड बैटरी टेक्नोलॉजी इन इंडिया -
आप सभी जानते ही होंगे कि दिन प्रतिदिन बिजली से चलने वाले उपकरणों की बढ़ती हुई संख्या के कारण पावर कंजप्शन काफी अधिक बढ़ गया है,लोग अपने बिजली का बिल बचाने के लिए और निर्माण बिजली प्राप्त करने के लिए सोलर एनर्जी ऐसे विकल्पों का उपयोग अधिक करते है,लेकिन सोलर एनर्जी के साथ में एक ड्रॉबैक यह है कि सोलर एनर्जी का उपयोग आप सुबह 9:00 बजे से शाम के 4:00 बजे तक ही कर सकते है लेकिन हमारे घरों में पावर की अधिक जरूरत सुबह और शाम के समय होती है।
और इसी समय हमें मिनिमम या फिर ना के बराबर ऊर्जा प्राप्त होती है,ऐसे में बिजली प्राप्त करने के लिए हमें सोलर से मिलने वाली एनर्जी को बैटरी में स्टोर करते हैं और इसके लिए बैटरी बैंक का इस्तेमाल करना पड़ता है वर्तमान समय मे हर घर मे लेड एसिड बैटरी देखी जाती है।
सेंड बैटरी कैसे काम करती है?
सेंड बैटरी ज़ब काम करती है, ज़ब हम सबसे पहले सैंड सिलो को चार्ज करने के लिये इलेक्ट्रिक एयर हीटर में हवा को 600 डिग्री सेल्सियस मे गर्म करते है, इसके बाद सिलो के कोर में रेत के तापमान को 600 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करने के लिए हीट-एक्सचेंज पाइप तथा ब्लोअर का प्रयोग करके गर्म हवा को सिलो के अंदर रखा जाता है।
जब ताप भंडारण लगभग समापन की अवस्था में पहुंच जाता है, तो ब्लोअर का उपयोग करके सैंड सिलो के अंदर पाइप में हवा को पंप करने के लिए रख दिया जाता है। और फिर ज़ब एक बार हवा 200 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाती है, तो इसको एयर टू वाटर हीट एक्सचेंजर में ट्रांसफर कर दिया जाता है, और इसका उपयोग पानी को उबालने के लिए किया जाता है,फिर सेंड बैटरी क़ो हीटिंग नेटवर्क से जोड़ दिया जाता है।

