ज्योतिष में कुंडली मिलान के समय वर्ण का एक गुण देखा जाता है, जो व्यक्ति के स्वभाव और प्रकृति से जुड़ा होता है।
शूद्र वर्ण यहां जन्म या जाति को नहीं, बल्कि स्वभाव और प्रवृत्ति को दर्शाता है। इसका मतलब होता है कि व्यक्ति व्यवहार में सरल, मेहनती, व्यावहारिक और सेवा भाव रखने वाला हो सकता है।
कुंडली मिलान में वर्ण चार प्रकार के माने जाते हैं: ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। यह वर्गीकरण केवल गुण मिलान के लिए होता है, ताकि दोनों लोगों के स्वभाव में तालमेल समझा जा सके। इसका सामाजिक ऊंच-नीच या भेदभाव से कोई संबंध नहीं होता, बल्कि यह ज्योतिषीय आधार पर किया जाता है।
कुंडली में शूद्र वर्ण का अर्थ व्यक्ति के स्वभाव से जुड़ा एक वर्ग होता है, न कि उसकी सामाजिक स्थिति से।