ढाई अक्षर प्रेम का पढ़ा सो पंडित होय मे...

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| Updated on September 30, 2021 | Education

ढाई अक्षर प्रेम का पढ़ा सो पंडित होय में ढाई अक्षर का मतलब क्या है ?

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@komalsolanki9433 | Posted on September 30, 2021

ढाई अक्षर प्रेम का पढा सो पंडित होये मे ढाई अक्षर से तात्पयर प्रेम से है। कबीर कहते है कि प्रेम मे वैसे तो ढाई अक्षर होते है लेकिन यदि कोई इसे समझ ले तो प्रेम ढाई नही पुरा माना जाता हैं। कबीर कहते है प्रेम कभी पुरा नही होता अर्थात प्रेम परमात्मा है कजैसा है कितना भी विकसित हो जाए, विकास जारी ही रहता है। प्रेम आदि अनादि हैं। इस जगत में प्रेम परमात्मा है। इसलिए प्रेम को ढाई अक्षर कहा गया है। Loading image...

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