भगवान विष्णु का जन्म कई अवतारों में हुआ है! क्योंकि, वह अपने दुष्ट राक्षसों का संहार करने के लिए कभी राम बने तो कभी कभी कृष्ण बनकर धरती पर आए! भगवान विष्णु के बायें हाथ में कमल, दाहिने हाथ में कौमोदकी गदा,ऊपर वाले बाएँ हाथ में पाञ्चजन्य नामक शंख और अपने ऊपर वाले दाहिने हाथ में सुदर्शन चक्र धारण किए रहते हैं। वह बहोत ही शक्तिशाली है और अपने भक्तों की हमेशा रक्षा करते हैं!उनके सभी भक्त उन्हें नारायण कहकर पुकारते हैं और कहा जाता है कि नारायण नाम ही हमें भवसागर से पार करेगा.
भगवान विष्णु का स्वरूप क्या है?
भगवान विष्णु का स्वरूप बहुत ही मनमोहक होता है। भगवान विष्णु के 108 नाम होते हैं। लेकिन उनकी सभी भक्तों ने ज्यादातर नारायण नाम से ही पुकारते हैं। भगवान विष्णु को नर भी कहा जाता है क्योंकि यह जल में निवास करते थे। भगवान विष्णु अपने हथियारों को कुछ इस प्रकार लिए रहते थे अपने नीचे वाले बाएं हाथ में कमल लिए रहते थे और नीचे वाले दाएं हाथ में गदा लिए रहते थे ऊपर वाले बाएं हाथ में शंख लिए रहते थे और ऊपर वाले दाये हाथ में सुदर्शन चक्र लिए रहते थे उनका संपूर्ण बहुत ही मनमोहक लग रहा है। और भगवान विष्णु हमेशा शेषनाग पर ही सवार रहते थे।
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भगवान विष्णु का स्वरूप बहुत सुंदर है और उनके द्वारा धारण किए गए आभूषण और हथियारों का विशेष महत्व है भगवान विष्णु अपने नीचे वाले बाएं हाथ में कमल और नीचे वाले दाएं हाथ में कौमोदकी नाम की गदा लिए हुए हैं ऊपर वाले बाएं हाथ में शंख और अपने ऊपर वाले दाएं हाथ में सुदर्शन चक्र धारण किए हुए हैं उनका पूरा स्वरूप ज्ञानात्मक है इस प्रकार भगवान विष्णु अपने शरीर में आभूषण और हथियारों को धारण किए हुए हैं!
भगवान विष्णु का स्वरुप बहुत ही मनमोहक है, क्योंकिभगवान विष्णु ने जितने भी आभूषण धारण किये है उन सब मे बहुत ही सुंदर लग रहे है। भगवान विष्णु नीचे वाले बाए हाथ मे कमल लिए हुए है तथा नीचे वाले दाहिने हाथ मे कोमोन्दकी नाम की गदा लिए हुए है और अपने ऊपर वाले बाएं हाथ मे पाञ्चजन्य नाम की शंख लिए, ऊपर वाले दाहिने हाथ मे सुदर्शन चक्र लिए हुए है, इन सम्पूर्ण स्वरुपो मे बहुत ही आकर्षक लग रहे है।
