जब भीड़ ने कर दी इंसानियत की सारी हदें पार ! - letsdiskuss
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pravesh chuahan,BA journalism & mass comm | पोस्ट किया |


जब भीड़ ने कर दी इंसानियत की सारी हदें पार !


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@letsuser | पोस्ट किया


उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में 19 जुलाई, शुक्रवार को जो हुआ उसे देखते हुए तो ये ही लग रहा है कि यहां लोकतंत्र से ज्यादा भीड़ तंत्र को बढ़ावा दिया जा रहा हैं!, क्योंकि एक बार भी यूपी से मॉब लिचिंग की एक वारदात सामने आई है.


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pravesh chuahan,BA journalism & mass comm | पोस्ट किया


हमारे पास अक्ल तो होती है मगर उस अकल का प्रयोग हम नहीं करते, अब आप सोच रहे होंगे कि तो अकल हम कहां पर उपयोग करते हैं हमारा दिमाग फालतू के कामों में बहुत ज्यादा और तेज गति से चलने लग जाता है. मगर जब हमें किसी की मदद करनी होती है तब हमारा दिमाग बिल्कुल भी काम नहीं करता, क्योंकि हमारा सवार्थ कभी भी आगे नहीं बढ़ने देता|

आपको एक ऐसी सच्ची कहानी से रूबरू करवाता हूं जो कि आपको मेरी बात समझने में बहुत ज्यादा आसानी होगी....नाच गाना बज रहा है बच्चे महिलाएं बूढ़े सब नचनिया को नाचते हुए देख रहे हैं स्टेज के इर्द-गिर्द भारी संख्या में लोग मौजूद हैं चारों तरफ लाउडस्पीकर लगे हुए हैं यानी कि आवाज इतनी तेज है कि आपस में बात भी करेंगे तो नहीं सुन पाएंगे. सभी लोग नाच बाजे का लुफ्त उठा रहे हैं इसी बीच में एक महिला रोती चिल्लाती लोगों के बीच में भटक रही हैं. ऐसा लगता है मानो जैसे उसने अपनी जिंदगी की बहुत ही अनमोल चीज खो दी हो, उसको देखकर तो यही लगता था|  उस महिला की तरफ इतनी भारी संख्या में मौजूद लोगों में से किसी की भी नजर नहीं पड़ती. क्योंकि आजकल का तो वैसे भी ट्रेंड चल गया है कि कोई मरे या जिए भैया हमको क्या ! मगर जिसने हम सभी इंसानों को बनाया है उसने भी कुछ सोच समझकर बनाया है. उन्हीं भीड़ में शुमार एक युवक की नजर उस महिला पर पड़ती है. वह युवक सोचता है कि आखिर सभी लोग खुश है तो यह महिला ही क्यों रो रही है क्यों चिल्ला रही है क्यों दुखी है और  इधर उधर क्यों भटक रही है. आखिर वह इतना दुखी क्यों है|

वह युवक उस महिला को 5 मिनट तक देखता है और अब उसी युवक से उस महिला का दुख बिल्कुल भी नहीं देखा जाता. वह युवक उस महिला के पास गया और उसने पूछा मैं आपको 5 मिनट से देख रहा हूं और आप इधर उधर किसको ढूंढ रही हैं और आप क्यों रो रही हैं. महिला और तेज रोने लग जाती है तभी वह कहती है कि मेरा बच्चा गुम हो गया है युवक पूछता है कहां गुम हुआ.उसने कहा कि वह मेरे साथ ही था अचानक ही उसका साथ मेरे से छूट गया और वह इस भीड़ में गुम हो गया. उस वक्त बच्चा चोरी करने वाले गैंग की भी बहुत तेजी से अफवाह फैली हुई थी जिस वजह से उस महिला के डर का अंदाजा लगाना और भी ज्यादा मुश्किल हो गया था. 

वह युवक तुरंत अपने दोस्तों के पास जाता है और अपने दोस्त को कहता हैं. उस महिला का बच्चा गुम हो गया है वह बहुत परेशान है हमें उसकी मदद करनी चाहिए तभी उसका मित्र कहता है छोड़ो जाने दो हमको उससे क्या अपने आप मिल जाएगा. यह सुनकर उस युवक को बहुत दुख होता है और वह सोचता है कि अगर वही बच्चा हमारे घर का होता तो हम कितना दुखी होते आखिर दुख तो दुख ही होता है. मित्र के मना करने के बाद वह युवक तुरंत उस महिला को लेकर नाच बाजे वाली जगह पर जाता है और नाच बाजे को तुरंत रुकवा देता है. उसी दौरान नाच बाजे को चलाने वाला पूछता है! क्या समस्या है आपने क्यों बंद करवाया, तो वे युवक कहता है कि कृपया आप इस महिला की मदद कीजिए. इसका 5 साल का बच्चा यहां गुम हो गया है अगर आप अनाउंसमेंट कर देंगे तो जरूर इस महिला का बच्चा मिल जाएगा वह महिला अपने बच्चे का नाम उम्र और पहचान बताती हैं. अनाउंसमेंट हो जाता है उसके 10 मिनट पश्चात ही उस महिला को अपना बच्चा मिल जाता है.

इस कहानी को बताने का उद्देश्य यह है कि वहां पर इतनी संख्या में भीड़ थी मगर कोई भी उस महिला की तरफ ध्यान नहीं दे रहा था ऊपर वालों ने दिमाग तो सबको दिया है मगर उसको कब इस्तेमाल करना है यह सब हम इंसान नहीं जानते. मगर ऊपर वाले ने इसी वजह से हम सबको अलग अलग बनाया है मेरा सवाल उस भीड़ से हैं, अगर उन्हीं में से किसी का बच्चा गुम हुआ होता तो वह भी उस महिला की तरह इधर-उधर छटपटा रहा होता.मदद नहीं मिलती तो उसको कैसा महसूस होता. हम सभी को सिर्फ किसी के दुख को महसूस करने की जरूरत होती है.जब दुख किसी के साथ भेदभाव नहीं करता. दुख सभी को बराबर की नजर से ही देखता है और दुख तो दुख ही होता है तो हम क्यों उस सुख के लिए जो कि सिर्फ कुछ पल का ही होता है उस दो पल के सुख के लिए स्वार्थी बन जाते हैं वास्तव में जिस इंसान पर बितती है. जिस पर घटता है वही उस स्थिति को अच्छे से जानता हैं.
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