किसी भीशिशु के जीवन की शुरुआत उसके माता-पिता के द्वारा ही होती है। माता पिता के द्वारा ही सबसे पहले उसे इस दुनिया में पहचाना व प्यार मिलता है। यदि बात स्वभाव कि, की जाए तो माता का स्वभाव उसके शिशु के लिए सदैव शीतल मधुर व प्रेम भरा होता है। वही पिता का स्वभाव भी उसके शीशु के लिए प्रेम भरा ही होता है। और मेरे लिए मेरे माता-पिता का प्रेम एक सामान है। और उनके प्यार में तुलना नहीं की जा सकती। दोनों का प्यार ही अमूल्य है।
मामी-पापा दोनों ही मुझे बराबर प्यार करते है। माता-पिता दोनों का प्यार अमूल्य धन होता है किसी भी बच्चे के जीवन में। बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास में माता-पिता का प्यार बहुत मायने रखता है। जिन बच्चों को माता-पिता का प्यार मिलता है, वे मानसिक तौर पे बहुत मजबूत होते है। बच्चे का मानसिक और बौद्धिक गठन बचपन में ही होता है, और माता-पिता का प्यार इसमें बहुत बड़ा भूमिका पालन करती है।

वैसे तो माता पिता दोनों ही अपने बच्चें को प्यार करते है, पर पिता का प्यार इतना दिखता नहीं, जितना माँ का प्यार नजर आता है। यूं कहे सकते है, पिता अपना प्यार बच्चों पर इतना दिखा नहीं पाता या दिखाता नहीं, जितना मां अपना प्यार बच्चों पर दिखाता है। पिता को थोड़ा बहुत सख्त भी होना पड़ता है बच्चों की भलाई के लिए। ज्यादा प्यार अगर बच्चों पर दिखाएंगे, तो इससे बच्चें बिगड़ भी सकते है। मेरे पापा का प्यार भी उतना दिखाई नहीं देता, जितना मम्मी का प्यार दिखाई देती है। लेकिन, सच्चाई ये है, मम्मी-पापा दोनों ही मुझे बहुत प्यार करते है।

अपने बच्चो को माता -पिता दोनों प्यार करते है लेकिन ज्यादा प्यार माँ करती है, क्योंकि माँ अपने बच्चो को नौ महीने पेट मे रखती है बहुत से कष्टों को झेलती हुयी बच्चे को जन्म देती है, और बच्चे का पालन -पोषण करती है। उसे बोलना, चलना, खाना खिलाना आदि सब कुछ माँ ही करती है, यहाँ तक जैसे -जैसे बच्चा बड़े होते ही पहला शब्द माँ ही बोलता है। माँ का प्यार अपने बच्चे प्रति हमेशा सच्चा प्यार होता है, एक पिता भी अपने बच्चे प्यार करता है लेकिन माँ के जैसे बच्चे की परवरिश कोई नहीं कर सकता है।

यह बात तो स्वाभाविक है कि माता-पिता अपने बच्चों से दोनों बराबर प्यार करते हैं। लेकिन कुछ माता-पिता ऐसे होते हैं जो लड़का या लड़की में से एक से ज्यादा अधिक प्यार करते हैं। जैसे कि लड़का को मम्मी ज्यादा प्यार करती है और लड़की को पापा ज्यादा प्यार करते हैं।और बच्चों के लिए भी माता-पिता एक समान होते हैं इसलिए भगवान से बढ़कर भी माता-पिता होते हैं हमें अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए पिता थोड़ी सख्त होते हैं क्योंकि अगर वह सख्त नहीं होंगे तो बच्चे बिगड़ सकते हैं और माता का हृदय कोमल होता है इसलिए मां बच्चों को कम डांटती है।
मुझे मेरी मम्मी और पापा दोनों प्यार करते है, लेकिन मेरी मम्मी मुझे से ज्यादा प्यार करती है क्योंकि मेरी मम्मी मेरे पापा से ज्यादा मेरा ख्याल रखती है मेरी मम्मी मेरे पसंद का नाश्ता बनाती है मुझे लोरी सुनाकर सुलाती है और ज़ब मै कोई गलती करती हूँ तो पापा डांटते है तो पापा की डांट से मम्मी मुझे तुरंत बचाती है,और मुझे मेरी गलती करने से रोकने के लिए प्यार से समझाती है, सच मै बहुत हीं भाग्यशाली हूँ मुझे इतना प्यार करने वाली मम्मी मिली और मै भगवान का भी सुक्रिया अदा करना चाहूँगी इतनी अच्छी मम्मी देने के लिए।
दोस्तों आज इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि मम्मी पापा में से ज्यादा प्यार कौन करता है तो मम्मी पापा दोनों ही अपने बच्चों से प्यार करते हैं लेकिन मां अपने बच्चों से ज्यादा प्यार करती है क्योंकि वह अपने 9 महीने तक बच्चों को कोख में रखती है और बहुत से कष्टों को सहकर बच्चे को जन्म देती है। अपने बच्चे के देखभाल के लिए वह रात रात भर जाती है। एक मां अपने बच्चों की रक्षा के लिए किसी भी हद से गुजर जाती है।

आज मैं आपको इस आर्टिकल में बताऊंगी कि मुझे सबसे ज्यादा प्यार कौन करता है मेरे मम्मी या मेरे पापा वैसे तो मम्मी और पापा मुझे दोनों बराबर प्यार करते हैं।लेकिन हां कभी-कभी मुझे ऐसा लगता है कि मेरे पापा मुझे ज्यादा प्यार करते हैं।क्योंकि जब भी मैं पापा के सामने कोई भी जिद करती हूं तो पापा हमेशा मेरी जिद को मान लेते हैं और उनसे जो भी हो सकता है उसे पूरा करने की कोशिश करते हैं। और जब मैं मम्मी के सामने जिद करती हूं तो मम्मी मुझे डांटने लगती है और मारती भी है। इसलिए मुझे ऐसा महसूस होता है कि मेरे पापा मेरे मम्मी से ज्यादा मुझे प्यार करते हैं। मेरे पापा इस दुनिया के बेस्ट पापा हैं। इसलिए मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि भगवान जी आप मेरे मम्मी पापा को हमेशा खुश रखिएगा





