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pravesh chuahan,BA journalism & mass comm | पोस्ट किया |


आखिर क्या कारण है प्रवासी मजदूर अब सड़क को छोड़कर रेल की पटरी के रास्ते से जा रहे हैं ?


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pravesh chuahan,BA journalism & mass comm | पोस्ट किया


आपको अब  रेल की पटरी पर ट्रेनें दौड़ती हुई नहीं दिखाई देंगी.अगर दिखाई देगी तो उन प्रवासी लोगों की भीड़ जो अपने-अपने राज्यों की ओर पैदल ही  पटरियों के सहारे बोरिया बिस्तर समेटे, चप्पल पहने, नुकीले पत्थर पर चलकर अपने अपने राज्यों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं. ट्रेन की पटरियों के सहारे मजबूत क्यों जा रहे हैं और यह कुछ ही दिनों से देखने को मिल रहा है आखिर क्या कारण हो सकता है जो पटरियों के सहारे अपने राज्य  लौट जाने को मजबूर हैं.....

अभी हाल ही में 16 मजदूरों की मौत हुई थी इसका कारण ट्रेन की पटरी थी.वह मजदूर रेल की पटरी के सहारे अपने राज्य मध्य प्रदेश महाराष्ट्र से जा रहे थे मगर बीच में ही वे लोग औरंगाबाद के निकट ट्रेन की पटरी को में आराम करने के लिए सो जाते हैं और एक मालगाड़ी हम सोए हुए मजदूरों के ऊपर से हो कर चली जाती है जिससे 16 मजदूर की मौत हो जाती है.

अभी हाल ही की बात थी ऐसा लगा था कि शायद सरकार अब कुछ  ठोस कदम उठाएगी जिससे लोग पैदल ही पटरीयो के सहारे अपने-अपने राज्यों के और ना निकल पड़े मगर ऐसा होता अभी भी नहीं दिख रहा है.तमाम मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मजदूरों का सब्र टूट चुका है वह पैदल ही फिर से अपने अपने गांव की ओर निकल पड़े हैं इन सभी में सवाल यह उठता है कि आखिर वह पटरियों के रास्ते से ही पैदल क्यों जा रहे हैं वह सड़क के रास्ते से भी तो जा सकते हैं.

इसका कारण यह है कि प्रवासी लोगों के मुताबिक जब वे लोग सड़क के रास्ते से पैदल जाते हैं तब रास्ते में पुलिस वाले उन्हें बुरी तरह से लाठी-डंडों से पीट रही होती है और उन्हें वापस लोट जाने के लिए कहती हैं. सड़क के रास्ते जाने पर  पुलिस वालों द्वारा  नाकाबंदी की गई होती है और सड़क के रास्ते से जाना बिल्कुल भी संभव नहीं है पुलिस वालों का कहना होता है  कि जहां से आए वहीं से चले जाए, मजदूर कहते हैं  हमारे पास पैसा नहीं है पैसा नहीं होने की वजह से ना हम किराया दे सकते हैं और ना ही राशन वाले को पैसा दे सकते हैं एक तो मकान मालिक हमारा किराया भी माफ नहीं कर रहा है जिस वजह से अब हम बिल्कुल भी यहां पर नहीं रुक सकते हैं इसलिए हम पैदल ही घर की ओर जा रहे हैं और सरकार की तरफ से हमें किसी भी तरह से कोई सुविधा उपलब्ध नहीं हो रही है.

प्रवासी लोगों का कहना है कि पुलिस द्वारा बार-बार लाठी-डंडों से पीटा जाने से परेशान होकर अब हम पटरियों के रास्ते से निकल रहे हैं. आप इस बात को औरंगाबाद में 16 मजदूरों की मौत  से भी जोड़ सकते हैं  उनकी मौत का कारण भी इन पुलिस वालों को ही मान सकते हैं अगर यह पुलिस वाले लाठी-डंडों से लोगों को ना मारे तो यह लोग रेल पटरी के सहारे अपने अपने राज्य की ओर रवाना नहीं होंते. सरकार उचित प्रबंध करें तो यह लोग पटरियों के सहारे अपने-अपने राज्य की ओर नहीं लौटेंगे.
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