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Updated on Mar 22, 2023others

क्या केवल लड़कियां दूसरों के सामने रोती है लड़के नहीं ?

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Answered on Mar 21, 2023

दोस्तों इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि क्या लड़कियां दूसरों के सामने रोती हैं लड़के नहीं। तों यहाँ पर हम आपको बता दें कि जब लड़कियों को दर्द या उसका दिल टूटता है तो लड़कियां दूसरों के सामने रो सकती हैं। लेकिन जब किसी लड़के का दिल टूटता है या उसे दर्द होता है तो वह किसी के सामने अपने दर्द को नहीं दिखाता है बल्कि वह खुद को मजबूत दिखाता है कि जैसे उससे कोई दर्द नहीं होता उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।

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Answered on Mar 20, 2023

आज आपने यहां पर बहुत ही अच्छा सवाल किया है कि क्या केवल लड़कियां ही दूसरों के सामने रोते हैं लड़के नहीं तो मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है लड़का और लड़की दोनों के अंदर भावनाएं पाई जाती है लेकिन लड़कियों का दिल बहुत ही कोमल होता है कहते हैं कि लड़कियों के आंसू उनके पलकों में रहते हैं इसलिए लड़कियां भावनाओं में बह जाती है और जल्दी रो देती है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि लड़के नहीं रोते लड़की भी अपने दुख को बयां करने के लिए अकेले में रोते हैं।Article image

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Updated on Apr 12, 2019

हम सभी लोग भावनाओ से बने है. हम में इमोशंस है, जज्बात है, भावनाये है और एक कॉमन चीज़ भी है, दिल. ऐसा नहीं है की दुसरो के सामने केवल लड़किया ही रोती है लड़के नहीं. कई बार देखा गया है की लड़के लड़कियों की अपेक्षा जल्दी टूट जाते है और जब वह अपनी भावनाये व्यक्त नहीं कर पते है तो अंदर ही अंदर रो लेते है या अपने जज्बात, दर्द को दबा लेते है पर जब दर्द बर्दाश से बाहर हो जाता है तो जरा भी देर नहीं लगती है आँखे नम होने में .

कुछ लोग मानते है की लड़कियों के आंसू उनकी पलकों में होते है पर दरअसल, सच तो ये है कि, लड़किया भावनात्मक रूप से लड़को से ज्यादा स्ट्रांग होती है इसलिए उन्हें धरा की संज्ञा भी दी जाती है.
लेकिन समाज के द्वारा बनाये गए इस पुरुष प्रधान समाज में आज भी लड़को का रोना उनकी कमजोरी की निशानी माना जाता है या दोस्तों, अपने के बीच हंसी का कारण बन जाता है. इस कारण भी कई बार लड़के अपनी भावनाये चाह कर भी बता नहीं पाते है.
कई बार घर की स्थिति, छोटो का दर्द, अपनों की जिम्मेदारी, समाज का लिहाज उन्हें अपनी भावनाओ को व्यक्त करने से रोक देता है.
पर कई बार ऐसा भी होता है की पानी के मोती जब तक दिल से होते हुए पलकों तक नहीं आते, लोगो को नहीं दिखते, उन्हें यकीन नहीं होता है.
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बस अंतर इतना है..
"कोई बाहर रोता है.. कोई अंदर (दिल में) रोता है..
कोई दर्द से रो देता है.. कोई दर्द देखकर रो देता है "



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