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Updated on Mar 20, 2026others

चन्द्रगुप्त मौर्य की मृत्यु कैसे हुई?

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4 Answers

A
Answered on Nov 21, 2023

आज हम आपको बताते हैं चंद्रगुप्त मौर्य जी के बारे में। महान सम्राट चंद्रगुप्त जिनका नाम आज भी आदर के साथ लिया जाता है। चंद्रगुप्त ने अपनी प्रजा को काल के भारी दुख में देखकर उन्होंने अन्य जल का त्याग कर दिया और वह अपनी मृत्यु को प्राप्त हो गए। यह सही है की महान सम्राट चंद्रगुप्त जीवन भर हिंदू रहे परंतु उन्होंने जैन धर्म को स्वीकार कर लिया। क्योंकि उसे समय हिंदुओं में धर्म कांड अधिक बढ़ गए थे। ढोंगियों और पाखंडियों ने आम आदमी का जीना मुश्किल कर दिया था। लोगों को धर्म के नाम पर शोषण एक आम बात हो गई थी। परंतु चंद्रगुप्त की मृत्यु संथारा पूर्वक हुई थी। इसका कोई प्रमाण नहीं है। ऐसा सिर्फ जैन धर्म वालों का कहना है ऐसा हिंदू धर्म या ग्रंथो में इस बात का उल्लेख नहीं है। आता है कई लोग बौद्ध धर्म में दीक्षित हो गए और हिंदू धर्म की बड़ी हानि हुई।Article image

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Multi-Niche Content Researcher
Answered on Nov 23, 2023

दोस्तों क्या आप जानते हैं कि चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु कैसे हुई थी।मौर्य साम्राज्य के संस्थापक एवं इतिहास के सबसे महान योद्धा चन्द्र गुप्त मौर्य जब 50 साल के हुए तब वे जैन धर्म के विचारों से काफी प्रेरित हुए, और फिर बाद में उन्होंने जैन धर्म को अपना लिया और जैन संत भद्रबाहु को अपना गुरु बना लिया।महान शासक चन्द्रगुप्त की मौत के बाद उनके पुत्र बिंदुसार ने अपने विवेक एवं पूर्ण कुशलता के साथ मौर्य साम्राज्य का शासन संभाला और इसको और अधिक मजबूत करने के प्रयास किए।चंद्रगुप्त के पोते सम्राट अशोक ने भी अपने अ्द्भुत साहस और कुशल शासन के माध्यम से मौर्य साम्राज्य का विस्तार दक्षिण भारत में कलिंग और तमिल आदि क्षेत्रों में भी करने में विजय हासिल कर ली थी।ऐसा हिंदू धर्म या ग्रंथो में इस बात का उल्लेख नहीं है। आता है कई लोग बौद्ध धर्म में दीक्षित हो गए और हिंदू धर्म की बड़ी हानि हुई।Article image

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S
Knowledge Obsessed Mind
Updated on Mar 19, 2026

दोस्तों क्या आपको पता है कि चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु कैसे हुई थी अगर आपको नहीं पता तो चलिए आज हम आपको इस बारे में जानकारी देते हैं।

मौर्य साम्राज्य के संस्थापक एवं इतिहास के सबसे महान योद्धा चन्द्र गुप्त मौर्य जब 50 साल के हुए थे। तो तब वे जैन धर्म के विचारों से काफी प्रेरित हुआ ।और फिर बाद में उन्होंने जैन धर्म को अपना लिया था और जैन संत भद्रबाहु को अपना गुरु बना लिया था।महान शासक चन्द्रगुप्त की मौत के बाद उनके पुत्र बिंदुसार ने अपने विवेक एवं पूर्ण कुशलता के साथ मौर्य साम्राज्य का शासन संभाला और इसको और अधिक मजबूत करने के प्रयास की थी। चंद्रगुप्त के पोते सम्राट अशोक ने भी अपने अ्द्भुत साहस और कुशल शासन के माध्यम से मौर्य साम्राज्य का विस्तार दक्षिण भारत में कलिंग और तमिल आदि क्षेत्रों में भी करने में विजय हासिल कर ली थी।Article image

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V
Answered on Mar 19, 2026

प्राचीन भारतीय इतिहास के महान शासक चंद्रगुप्त मौर्य के जीवन का अंत एक खास धार्मिक परंपरा से जुड़ा माना जाता है। माना जाता है कि उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय में जैन धर्म अपना लिया था।

वे जैन संत भद्राबाहु के साथ दक्षिण भारत गए थे। वहां उन्होंने सल्लेखना नामक व्रत अपनाया, जिसमें व्यक्ति धीरे-धीरे भोजन और पानी त्यागकर शरीर का त्याग करता है। यह प्रक्रिया जैन धर्म में एक धार्मिक और तपस्या का मार्ग मानी जाती है।

माना जाता है कि उन्होंने इसी व्रत के माध्यम से अपनी मृत्यु को प्राप्त किया। उनका अंत एक आध्यात्मिक और धार्मिक प्रक्रिया के रूप में बताया जाता है, जो उनके जीवन के अंतिम चरण को दर्शाता है।

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