झारखंड में एक फल विक्रेता ने अपने दुकान का नाम -हिन्दू फल दुकान- रख लिया तो पुलिस ने उस पर प्राथमिकी दर्ज कर दिया और उसे बैनर हटाने पर मजबूर किया। इस मामले पर आपके क्या विचार है ? - letsdiskuss
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Fashion enthusiast | पोस्ट किया |


झारखंड में एक फल विक्रेता ने अपने दुकान का नाम -हिन्दू फल दुकान- रख लिया तो पुलिस ने उस पर प्राथमिकी दर्ज कर दिया और उसे बैनर हटाने पर मजबूर किया। इस मामले पर आपके क्या विचार है ?


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pravesh chuahan,BA journalism & mass comm | पोस्ट किया


इन दिनों हिंदू और मुस्लिम का खेल फिर से जोरो से आरंभ हो चुका है.अगर कोई अपनी दुकान के आगे हिंदू फल विक्रेता का पोस्टर लगा लेता है तो क्या उससे उस दुकानदार को गिरफ्तार कर लिया जाएगा यह किस हद तक जायज है वह हिंदू है और गर्व से हिंदू लिख सकता है. मगर इस पूरे मामले में षडयंत्र का सहारा लिया गया है.

क्या था पूरा मामला :-
दुकानों पर लगे बैनरों पर भगवान राम और शिव की तस्वीरें हैं. उसके नीचे दुकानदारों के पते दर्ज हैं. ऐसे बैनरों की तादाद हाल के दिनों में तेजी से बढ़ी है. खासकर उस अफवाह के बाद, जिसमें कहा गया था कि एक विशेष समुदाय के लोग कोरोना महामारी फैलाने के लिए फल और सब्जियों पर थूक लगा रहे हैं. दुकानदारों का ऐसा मानना था कि पिछले कुछ दिनों से दुकानों की बिक्री कम हो गई थी क्योंकि एक विशेष समुदाय द्वारा इस वायरस को फैलाने की सूचना  जोरों शोरों से फैली हुई थी इसलिए ऐसा लगता था कि अब बिक्री नहीं होगी क्योंकि लोगों को भी भ्रम हो चुका था कि कहीं ऐसा फल खरीदने से कोरोना वायरस का खतरा ना बढ़ जाए.. ऐसी स्थिति में यही उपाय बचा था कि लोगों में यह संदेश दिया जाए कि दुकानदार राम, हनुमान या शिव भक्त हैं. इसे देखते हुए ऐसे बैनर लगाए गए.

मगर जब दुकानदार से बात की गई तो इस बात को दुकानदार ने सिरे से खारिज कर दिया उसका कहना था ऐसा बिल्कुल भी नहीं है इस मामले को लेकर कई तरह की अफवाह उड़ाई जा रही है ट्विटर पर फेसबुक पर अफवाहों को जन्म दिया जा रहा है लोगों का कहना है कि यह पोस्टर इसलिए लगाया गया ताकि मुस्लिम वर्ग को उनसे दूर रखा जा सके. मगर ऐसा बिल्कुल नहीं है इस पूरे मामले को जानने के लिए झारखंड के जमशेदपुर से एक फल विक्रेता से बातचीत की गई.

फल विक्रेता ने अपना नाम ना उजागर करने की शर्त पर जानकारी देते हुए कहा कि हम लोगों ने विश्व हिंदू परिषद ज्वाइन किया हुआ है और इस पोस्टर को तबलीगी जमात के मामले से जोड़ा जा रहा है. ताकि मुस्लिम वर्ग को दूर रखा जा सके. दुकानदार ने बताया कि इस पोस्टर की फोटो खींचकर किसी ने ट्विटर पर इस पूरे मामले को तबलीगी जमात और मुस्लिमों से जोड़ दिया और इस पूरे मामले को हिंदू मुस्लिम का रूप दे डाला जिसको लेकर पुलिस ने हम पर  सीआरपीसी की धारा 107 के तहत शांति भंग करने की कार्यवाही करने की बात कह डाली.मगर एक अच्छी बात यह रही कि हम लोगों का साथ मीडिया वालों ने दिया मीडिया वालों ने इस खबर को अपने चैनल पर चलाया जिस वजह से पुलिस पर दबाव पड़ा और पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है.

दुकानदार बताता है कि सबसे अहम बात यह है कि हमने इस पोस्टर को कुछ दिनों से नहीं लगाया है इस पोस्टर को हमने 2 महीने पहले से लगाया है यानी कि हमारा इस पोस्टर को लगाने का मुख्य मकसद बस नाम के लिए हिंदू लगाना है ना कि हिंदू मुस्लिम दंगा भड़काने के लिए लगाना है. जब इस पोस्टर को हमने 2 महीने पहले लगाया था जब यह तबलीगी जमात वाला मामला भी नहीं उठा था तो फिर कैसे इस पूरे मामले को हिंदू और मुस्लिम से जोड़ दिया गया यह कहना बिल्कुल ही गलत है. झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास ने हम लोगों को आश्वासन दिया है कि अगर पुलिस आप पर कार्रवाई करती है तो हम आप लोगों के साथ हैं और हमारा पूरा सहयोग है आप लोगों के साथ.

दुकानदार ने कहा कि जमशेदपुर में विशेष धर्म को प्रचार प्रसार करते हुए कई हजार दुकानें हैं पुलिस उन पर कार्रवाई क्यों नहीं करती यह पूरा मामला राजनीति से प्रेरित है और कांग्रेसका शासन भी होने की वजह से हम पर अत्याचार किया जा रहा है. 

जब दुकानदार से यह पूछा गया कि क्या आपके पास अधिकतर हिंदू ग्राहक ही आते हैं तो उन्होंने बताया कि मैं अगर हिंदू और मुस्लिम में फर्क करने लगूंगा तो मेरी दुकान कहां से चलेगी मुझे इससे क्या मतलब मेरे पास हिंदू ग्राहक आए या मुस्लिम ग्राहक..मुझे तो फल बेचने से मतलब है अगर मैं यह सोचकर फल बेचुंगा कि मेरे पास हिंदू ग्राहक आए तो फिर तो मैं कभी फल ही नहीं बेच पाऊंगा.

मुझे रोज 400 से 500 कॉल आती है और वह मुझे जान से मारने की धमकी देते हैं उन लोगों का कहना होता है कि तुम हिंदू लिख कर दंगा भड़काने का क्या काम कर रहे हो हैं. खासकर यह फोन महाराष्ट्र और सऊदी अरब से आ रहे हैं जब दुकानदार ने महाराष्ट्र की बात बताई तो ऐसा लगा जैसे यह पूरा मामला ही कांग्रे से ही प्रेरित है क्योंकि महाराष्ट्र में भी कांग्रेश शासित प्रदेश है ऐसा लगता है जैसे दुकानदार को आधी से ज्यादा बातें समझाई गई थी आपको क्या बोलना है.

मेरा मानना है कि यह पूरा मामला राजनीति से प्रेरित है और इस पूरे मामले में राजनीति की गई है अभी इस मामले के बारे में कहना बिल्कुल भी उचित नहीं रहेगा. क्योंकि अभी महाराष्ट्र में भी कांग्रेश शासित प्रदेश होने की वजह से कितना हंगामा हुआ है और झारखंड में भी कांग्रेस शासित प्रदेश होने की वजह से भी अब हंगामा शुरू हो चुका है ऐसा लगता है जैसे प्रायोजित तरीके से सिलसिलेवार कांग्रेस पर निशाना साधा जा रहा है. अभी तक यह नहीं पता चला है कि पुलिस ने कार्रवाई अपने मन से की है. या किसी राजनीतिक पार्टी के इशारे पर की गई है.

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