क्या आप जानते हैं कि शेषनाग रामायण में किस अवतार में थे। यदि आपने टीवी पर रामायण देखी होगी तो आपको इसकी जानकारी होगी। यदि आपको इसकी जानकारी नहीं है तो कोई बात नहीं हम आपको इसकी जानकारी देंगे।
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखित रामायण में भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बताया गया है। और भगवान श्री राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे।
चलिए जानते हैं शेषनाग रामायण में किस अवतार में थे :-
महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में बताया गया है कि लक्ष्मण जी शेषनाग के अवतार थे। अतः लक्ष्मण जी की अपार शक्ति के बारे में जानने के लिए पहले हम शेषनाग की शक्ति के बारे में जानना होगा। मैं आपको बता दूं कि भगवान विष्णु छीरसागर में शेषनाग के ऊपर विश्राम किया करते थे। इसलिए शेषनाग स्वयं सृष्टि के पालनहार भगवान श्री नारायण का भार सह सकते हैं। तो निश्चित ही अपार बलशाली कहलाएंगे। पुराणों में यह भी बताया गया है कि शेषनाग पृथ्वी को अपने फन पर धारण करते थे।
हम आपको बताएंगे कि शेषनाग कौन थे :-
शेषनाग के बारे में कहा जाता है कि इन्हीं के फन पर धरती टिकी हुई है। मैं आपको बता दूं कि शेषनाग भगवान विष्णु की सेवक हैं और ऐसी मान्यता है कि शेषनाग के हजार मस्तक हैं इनका कहीं अंत नहीं है इसलिए इन्हें अनंत कहा जाता है।
मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं की रामायण कथा में लक्ष्मण जी शेषनाग के अवतार माने जाते थे और उनकी माता का नाम सुमित्रा है।
इसके अलावा शेषनाग के 12 अवतार हैं। शेषनाग को नागराज भी कहा जाता है। जो की वासुकी को भगवान शिव का प्रिया सेवक माना जाता है। और वासुकी शेषनाग के भाई माने जाते हैं। भगवान शिव के गले में जो नाग धारण है उसे ही वासुकी कहते हैं।
