एक बहुत साधारण सा वाक्य है "पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती", आपकी बात सुनकर मुझे यही वाक्य याद आया | सचमुच पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती | यदि आप यह सवाल कर रहें हैं तो जायज़ सी बात है की सवाल आपके खुद के लिए तो नहीं है | यदि आप अपने परिवार के किसी सदस्य या किसी दोस्त के लिए यह सवाल कर रहे हैं जो अनपढ़ है, तो यकीनन आप उनकी मदद कर सकते हैं और उन्हें पढ़ना सिखा सकते हैं |
हमारे समाज में आज भी ऐसे बहुत से व्यक्ति हैं जो बचपन में किसी न किसी कारण से पढ़ाई नहीं कर पाते और अनपढ़ रह जाते हैं | अनपढ़ होने का एहसास उन्हें ज़िन्दगी के हर मोड़ पर होता ही होगा | यदि आपचाहे तो उनकी मदद कर सकते है | आपको सबसे पहला काम तो यह करना है कि आप उन्हे पढ़ाई करने के लिए मनाए | अधिकतर व्यक्ति उम्र बढ़ी होने पर यह सोचते हैं की पढ़ाई लिखाई उनसे नहीं होगी या प्रायः वह शर्माते हैं, तो पहला कार्य तो ये कीजिये कि उनको पढ़ने के लिए मनाइये |
दूसरा काम आपको यह करना है की उन्हें रोज 1 घंटा पढ़ने के लिए बिठाना है ओर एक घंटा खाली समय में खुदसे पढ़ने के लिए कहना है | आप उन्हें कायदा ( जिसमे अ से ज्ञ तक व गिनती आदि लिखा हो ) खरीदकर दे सकते है | आप उन्हें धीरे धीरे पढ़ाइये, किसी प्रकार की जल्दी न करें और न ही उनपर दबाव डालिये |
तीसरा कार्य यह करिये की उनको नियमित पाठ के साथ साथ अन्य चीज़ों से अवगत कराइये | जैसे अगर वह अक्षर पढ़ना, शब्द आदि बनाना सीख गए हैं तो बाजार से उन्हें नई नई कहानियों की, गणित कि किताबे लाकर दीजिये | जितना ज्यादा हो सके उन्हें उतना बच्चो को पढ़ाई जाने वाली, सिखाई जाने वाली चीज़े कराइये जिससे की उनका आधार मजबूत हो जाए |
यदि आप नियमित रूप से एक ज़िम्मेदारी के रूप में अपने घर के किसी अनपढ़ व्यक्ति को पढायेंगे, तो वह दिन दूर नहीं रहेगा जब वह भी आप ही की तरह पढ़ना लिखना सीख जायँगे |
