मां कात्यायनी व्रत के बारें में बताएं ? - letsdiskuss
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digital marketer | पोस्ट किया | ज्योतिष


मां कात्यायनी व्रत के बारें में बताएं ?


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student | पोस्ट किया


नवदुर्गा के छठे स्वरूप में मां कात्यायनी की पूजा की जाती है. मां कात्यायनी का जन्म कात्यायन ऋषि के घर हुआ था अतः इनको कात्यायनी कहा जाता है. इनकी चार भुजाओं मैं अस्त्र शस्त्र और कमल का पुष्प है, इनका वाहन सिंह है. ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं.

गोपियों ने कृष्ण की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा की थी. विवाह सम्बन्धी मामलों के लिए इनकी पूजा अचूक होती है. योग्य और मनचाहा पति इनकी कृपा से प्राप्त होता है. ज्योतिष में बृहस्पति का सम्बन्ध इनसे माना जाना चाहिए.

इनकी पूजा से किस तरह की मनोकामना पूरी होती है?

- कन्याओं के शीघ्र विवाह के लिए इनकी पूजा अद्भुत मानी जाती है.

- मनचाहे विवाह और प्रेम विवाह के लिए भी इनकी उपासना की जाती है.



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Blogger | पोस्ट किया


कात्यायनी अमरकोष में पार्वती के लिए दूसरा नाम है, संस्कृत शब्दकोश में उमा, कात्यायनी, गौरी, काली, हेमावती व ईश्वरी इन्हीं के अन्य नाम हैं। शक्तिवाद में उन्हें शक्ति या दुर्गा, जिसमें भद्रकाली और चंडिका भी शामिल हैं। यजुर्वेद के तैत्तिरीय आरण्यक में उनका उल्लेख किया है। स्कन्द पुराण में उल्लेख है कि वे परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुई थीं, जिन्होंने देवी पार्वती द्वारा दिए गए सिंह पर आरूढ़ होकर महिषासुर का वध किया। वह शक्ति की आदि रूपा हैं, जिनका उल्लेख पाणिनि पर पतंञ्जलि के महाभाष्य में किया गया है, जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में रचित है। उनका वर्णन देवीभागवत पुराण, और मार्कंडेय ऋषि द्वारा रचित मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य में किया गया है। इसे 400 से 500 ईसा में लिपिबद्ध किया गया था। बौद्ध और जैन ग्रंथों और कई तांत्रिक ग्रंथों, विशेष रूप से कालिका पुराण (दसवीं शताब्दी) में उनका उल्लेख है, जिसमें उड़ीसा में देवी कात्यायनी व भगवान जगन्नाथ का स्थान बताया गया है।




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Marketing Manager | पोस्ट किया


नवरात्रि का छठा दिन माता कात्यायनी का माना जाता है और इस दिन उनकी की पूजा की जाती है। माता की उपासना मानव जीवन में अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष इन सभी फलों की प्राप्ति करती है । सभी प्रकार के रोग खत्म होते हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी होती है । आपको माता कात्यायनी के व्रत और पूजन के बारें में बताते हैं । माता कात्यायनी का श्रृंगार पीले रंग से करना चाहिए और भक्तों को इस दिन लाल रंग पहनना चाहिए ।


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पूजा विधि :-
सबसे पहले सुबह उठकर स्नान फिर उसके बाद घट का पूजन करें । जल छिड़के और रोली और अक्षत से पूजन करने के बाद फूल माला चढ़ायें । ऐसे ही नवग्रहों का पूजन और उसके बाद माता का पूजन करें । घी का दीपक जलायें और व्रत कथा को पढ़ें ,उसके बाद आरती करें । माता कात्यायनी की सच्चे मन से आराधना भक्तों के सभी पापों को हर लेती है । जिन लोगों के विवाह में विलम्ब हो रहा हो उन्हें माता कात्यायनी का पूजन करना चाहिए इससे उनका विवाह जल्दी हो जाता है और वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानी भी दूर हो जाती है । पूजा के बाद इस मंत्र का जाप 108 बार अवश्य करें "एतत्ते वदनं सौम्यम् लोचनत्रय भूषितम्,पातु नः सर्वभीतिभ्यः कात्यायिनी नमोस्तुते"
व्रत कथा :-
प्राचीन समय में महर्षि कात्यायन ने माता भगवती की कठिन तपस्या की। वह माता को अपनी पुत्री के रूप में चाहते थे । मां भगवती उनकी तपस्या से खुश हुई और उन्होंने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया । महर्षि कात्यायन की पुत्री का नाम कात्यायनी रखा । माता कात्यायनी वैद्यनाथ नामक स्थान पर प्रकट होकर पूजी गईं। माता कात्यायनी के पूजन की एक मान्यता प्रचलित है , भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने माता कात्यायनी की पूजा की थी । माता कात्यायनी को सूजी का हलवा और पंचमेवे का भोग लगाना चाहिए यह उन्हें बहुत ही प्रिय है ।



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