साल 2018 में IFFI में भारतीय सिनेमा से इस बार सलमान और कटरीना कैफ स्टारर "टाइगर ज़िंदा है " का चयन किया गया है | लेकिन रजनीकांत की super-duper hit फिल्म " काला " IFFI कही भी जगह नहीं बना पायी है, और दर्शको का कहना है की यह बात बिलकुल ठीक नहीं है क्योंकि रजनीकांत की फिल्म काला जिन तथ्यों पर बनी है उसके मुक़ाबले फिल्म टाइगर ज़िंदा है कुछ ख़ास नहीं है |
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IFFI यह एक अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय फिल्म फेस्टिवल्स है, जिसे बेहद ख़ास और जरुरी माना जाता है | यह फेस्टिवल सिनेमा जगत को एक साथ लाता है और सभी को एकजुट होकर जश्न मनाने का मौका देता है | यही वजह हो सकती है की इस बार अलग अलग भाति की फिल्मो में टाइगर ज़िंदा है को भी शामिल किया गया बल्कि रजनीकांत की काला को नहीं |
पनोरमा श्रेणी में 26 feature और 21 नॉन-feature फिल्म्स को शामिल किया गया है |
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हाँ अगर हम दोनों फिल्मो के मुद्दों के बारे में बात करे तो रजनीकांत की "काला " ने समाज केएक गंभीर मुद्दे को उठाया है जबकि "टाइगर ज़िंदा है " में ऐसा कुछ भी नहीं है, लेकिन देखने में टाइगर ज़िंदा है का आभाव बहुत सुन्दर और अच्छा था|
यही कारण है की सलमान की टाइगर ज़िंदा है इस श्रेणी में काला को पछाड़ कर आगे पहुंच गयी है |
साथ ही एक कारण यह भी हो सकता है की हमारा समाज अभी तक इन मूल मुद्दों के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि रजनीकांत की काला पूरी तरह से एक अलग तरीके का सिनेमा दर्शाता है |
हालांकि काला को अस्वीकार करना और टाइगर ज़िंदा है को क्यों चुना गया है इस बात पर IFFI की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है |