
त्वरित उत्तर: दोपहर का खाना आराम से बैठकर, आधी थाली सब्ज़ी-सलाद, एक चौथाई प्रोटीन और एक चौथाई साबुत अनाज के साथ खाएँ। खाने का समय रोज़ लगभग एक ही रखें और पेट भरने से पहले रुक जाएँ। इससे दोपहर बाद की सुस्ती कम होती है और शाम तक ऊर्जा बनी रहती है।
"खाना क्या है" से पहले "खाना कैसे है" देखें
ज़्यादातर लोग लंच में क्या खाना है, इसी पर अटके रहते हैं। पर तीन बजे की नींद अक्सर थाली से ज़्यादा इस बात से आती है कि आपने खाना कितनी जल्दी, कितना और किस क्रम में खाया। इसलिए आदतों की शुरुआत थाली से नहीं, तरीके से करते हैं।
शुरुआती आदतें (आज से शुरू करें)
1. समय तय रखें
दोपहर 12:30 से 2:30 के बीच खाना खाने की कोशिश करें। बहुत देर से खाने पर भूख इतनी बढ़ जाती है कि हम ज़रूरत से ज़्यादा और जल्दी-जल्दी खाते हैं।
2. थाली का संतुलन
भारतीय थाली के लिए एक आसान तरीका:
थाली का हिस्साक्या रखेंउदाहरणआधासब्ज़ी और सलादलौकी, भिंडी, पालक, खीरा-टमाटरएक चौथाईप्रोटीनदाल, राजमा, पनीर, दही, अंडाएक चौथाईसाबुत अनाज1-2 रोटी या आधा कटोरा चावल
यह हार्वर्ड की "हेल्दी ईटिंग प्लेट" की सोच से मेल खाता है, जिसमें सब्ज़ियाँ सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं। भारतीय संदर्भ में ICMR-NIN के आहार दिशानिर्देश भी अनाज की मात्रा सीमित रखने और दालों, सब्ज़ियों व फलों को बढ़ाने की सलाह देते हैं।
3. धीरे खाएँ
पेट भरने का संकेत दिमाग तक पहुँचने में करीब 20 मिनट लगते हैं। कम से कम 15-20 मिनट में खाना खत्म करें। हर निवाले को ठीक से चबाएँ।
बीच के स्तर की आदतें
4. खाने का क्रम बदलकर देखें
पहले सलाद या सब्ज़ी, फिर दाल-प्रोटीन, और रोटी-चावल सबसे आख़िर में। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि सब्ज़ी और प्रोटीन पहले खाने से खाने के बाद ब्लड शुगर का उछाल कम रहता है। यह खासकर उन लोगों के लिए काम का है जिन्हें दोपहर में बहुत नींद आती है। अगर आपको डायबिटीज़ है, तो अपने डॉक्टर से पूछकर ही बदलाव करें।
5. स्क्रीन बंद रखें
फ़ोन या लैपटॉप देखते हुए खाने पर हमें अंदाज़ा नहीं रहता कि कितना खा लिया। दस मिनट का "स्क्रीन-फ्री लंच" भी फ़र्क़ डालता है।
6. खाने के साथ पानी
खाने से आधा घंटा पहले एक गिलास पानी पिएँ। खाने के बीच घूँट-घूँट पानी ठीक है, पर एक साथ बहुत ज़्यादा पीने से बचें।
7. घर की छाछ या दही जोड़ें
भारतीय थाली में दही या छाछ प्रोटीन, कैल्शियम और अच्छे बैक्टीरिया देती है। यह भारी खाने को पचाने में भी हल्की मदद करती है।
उन्नत आदतें (जो अक्सर छूट जाती हैं)
8. शुक्रवार या सोमवार के लिए नहीं, पूरे हफ़्ते की योजना
रविवार को 10 मिनट लगाकर तय करें कि हफ़्ते के पाँच लंच में क्या बनेगा। जब रोज़ सुबह "आज क्या बनाऊँ" सोचना पड़ता है, तो हम आसान और तला हुआ विकल्प चुन लेते हैं।
9. प्रोटीन की मात्रा जाँचें
भारतीय लंच में अक्सर प्रोटीन कम रह जाता है, क्योंकि थाली में रोटी-चावल का हिस्सा बड़ा होता है। एक कटोरी दाल, थोड़ा पनीर या एक कटोरी दही रखने से आप ज़्यादा देर तक भरे रहते हैं और शाम को नमकीन-बिस्किट की इच्छा कम होती है।
10. खाने के बाद 10 मिनट टहलें
भारी लंच के बाद सीधे कुर्सी पर बैठ जाना सबसे आम गलती है। हल्की सैर पाचन में मदद करती है और ब्लड शुगर को स्थिर रखने में सहायक पाई गई है।
11. लंच को "बचे हुए खाने" का काम न बनाएँ
रात का बचा खाना बुरा नहीं है, पर अगर रोज़ वही चलता है तो सब्ज़ियों की विविधता घट जाती है। हफ़्ते में कम से कम 4-5 अलग रंग की सब्ज़ियाँ थाली में आएँ।


