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manish singh· 6 साल पहले
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दोपहर के भोजन के लिए कुछ अच्छी भोजन आदतें क्या हैं?

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त्वरित उत्तर: दोपहर का खाना आराम से बैठकर, आधी थाली सब्ज़ी-सलाद, एक चौथाई प्रोटीन और एक चौथाई साबुत अनाज के साथ खाएँ। खाने का समय रोज़ लगभग एक ही रखें और पेट भरने से पहले रुक जाएँ। इससे दोपहर बाद की सुस्ती कम होती है और शाम तक ऊर्जा बनी रहती है।

"खाना क्या है" से पहले "खाना कैसे है" देखें

ज़्यादातर लोग लंच में क्या खाना है, इसी पर अटके रहते हैं। पर तीन बजे की नींद अक्सर थाली से ज़्यादा इस बात से आती है कि आपने खाना कितनी जल्दी, कितना और किस क्रम में खाया। इसलिए आदतों की शुरुआत थाली से नहीं, तरीके से करते हैं।

शुरुआती आदतें (आज से शुरू करें)

1. समय तय रखें
दोपहर 12:30 से 2:30 के बीच खाना खाने की कोशिश करें। बहुत देर से खाने पर भूख इतनी बढ़ जाती है कि हम ज़रूरत से ज़्यादा और जल्दी-जल्दी खाते हैं।

2. थाली का संतुलन
भारतीय थाली के लिए एक आसान तरीका:

थाली का हिस्साक्या रखेंउदाहरणआधासब्ज़ी और सलादलौकी, भिंडी, पालक, खीरा-टमाटरएक चौथाईप्रोटीनदाल, राजमा, पनीर, दही, अंडाएक चौथाईसाबुत अनाज1-2 रोटी या आधा कटोरा चावल

यह हार्वर्ड की "हेल्दी ईटिंग प्लेट" की सोच से मेल खाता है, जिसमें सब्ज़ियाँ सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं। भारतीय संदर्भ में ICMR-NIN के आहार दिशानिर्देश भी अनाज की मात्रा सीमित रखने और दालों, सब्ज़ियों व फलों को बढ़ाने की सलाह देते हैं।

3. धीरे खाएँ
पेट भरने का संकेत दिमाग तक पहुँचने में करीब 20 मिनट लगते हैं। कम से कम 15-20 मिनट में खाना खत्म करें। हर निवाले को ठीक से चबाएँ।

बीच के स्तर की आदतें

4. खाने का क्रम बदलकर देखें
पहले सलाद या सब्ज़ी, फिर दाल-प्रोटीन, और रोटी-चावल सबसे आख़िर में। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि सब्ज़ी और प्रोटीन पहले खाने से खाने के बाद ब्लड शुगर का उछाल कम रहता है। यह खासकर उन लोगों के लिए काम का है जिन्हें दोपहर में बहुत नींद आती है। अगर आपको डायबिटीज़ है, तो अपने डॉक्टर से पूछकर ही बदलाव करें।

5. स्क्रीन बंद रखें
फ़ोन या लैपटॉप देखते हुए खाने पर हमें अंदाज़ा नहीं रहता कि कितना खा लिया। दस मिनट का "स्क्रीन-फ्री लंच" भी फ़र्क़ डालता है।

6. खाने के साथ पानी
खाने से आधा घंटा पहले एक गिलास पानी पिएँ। खाने के बीच घूँट-घूँट पानी ठीक है, पर एक साथ बहुत ज़्यादा पीने से बचें।

7. घर की छाछ या दही जोड़ें
भारतीय थाली में दही या छाछ प्रोटीन, कैल्शियम और अच्छे बैक्टीरिया देती है। यह भारी खाने को पचाने में भी हल्की मदद करती है।

उन्नत आदतें (जो अक्सर छूट जाती हैं)

8. शुक्रवार या सोमवार के लिए नहीं, पूरे हफ़्ते की योजना
रविवार को 10 मिनट लगाकर तय करें कि हफ़्ते के पाँच लंच में क्या बनेगा। जब रोज़ सुबह "आज क्या बनाऊँ" सोचना पड़ता है, तो हम आसान और तला हुआ विकल्प चुन लेते हैं।

9. प्रोटीन की मात्रा जाँचें
भारतीय लंच में अक्सर प्रोटीन कम रह जाता है, क्योंकि थाली में रोटी-चावल का हिस्सा बड़ा होता है। एक कटोरी दाल, थोड़ा पनीर या एक कटोरी दही रखने से आप ज़्यादा देर तक भरे रहते हैं और शाम को नमकीन-बिस्किट की इच्छा कम होती है।

10. खाने के बाद 10 मिनट टहलें
भारी लंच के बाद सीधे कुर्सी पर बैठ जाना सबसे आम गलती है। हल्की सैर पाचन में मदद करती है और ब्लड शुगर को स्थिर रखने में सहायक पाई गई है।

11. लंच को "बचे हुए खाने" का काम न बनाएँ
रात का बचा खाना बुरा नहीं है, पर अगर रोज़ वही चलता है तो सब्ज़ियों की विविधता घट जाती है। हफ़्ते में कम से कम 4-5 अलग रंग की सब्ज़ियाँ थाली में आएँ।

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अपडेट किया गया10/22/26

भोजन क्या है -

भोजन शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है | भोजन को ग्रहण करने के बाद हमे काम करने कि शक्ति मिलती है ओर हमारे शरीर का विकास होता है | भोजन के रूप मे हम ठोस ओर तरल पदार्थों का सेवन करते है | भोजन मे उचित प्रकार पोषक तत्व मिले होते है जैसे - विटामिन्स , प्रोटीन , वसा , कार्बोहाइट्रेड , खनिज लवण आदि | यह हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होते है | इन्ही पोषक तत्वों कि कमी से शरीर मे विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न होने कि संभावना बढ़ जाती है |

ठोस भोजन मे - रोटी ,चावल , सब्जियां ,फल आते है |

तरल भोजन मे - दाले , फलों का ज्यूस ,दूध आदि आते है |

हमे भोजन कितनी बार करना चाहिए -

मुख्यतः हमे भोजन दिन मे 3 बार करना चाहिए | भोजन हमे शरीर कि जरूरत के अनुसार करना चाहिए | भोजन कि मात्रा सही रखना बहुत आवश्यक है | जरूरत से ज्यादा भोजन करना भी शरीर के लिए नुकसानदायक होता है | समय ,मात्रा ओर उम्र तीनों के हिसाब से भोजन कि मात्रा का चुनाव होना चाहिए|

1.सुबह का नाश्ता - सुबह उठने के बाद पहला खाना नाश्ता कहलाता है | इसमे हमे पौष्टिक तथा लंबे समय तक ऊर्जा देने वाले भोजन का सेवन करना चाहिए | सुबह के नाश्ते मे हमे पोहा , दूध , दलिया , फलों का जूस ,फल , अंकुरित अनाज लेना चाहिए इससे हमे अत्यधिक ऊर्जा मिलती है |

2.दोपहर का खाना - दोपहर का खाना कैसा होना चाहिए? दिन का दूसरा भोजन दोपहर का खाना कहलाता है इसे लंच भी बोल सकते है | इसमे उचित मात्रा मे पोषक तत्व होना जरूरी है क्युकि इससे ही हमारे शरीर को ताकत मिलती है काम करने या पढ़ाई करने के लिए | दोपहर का भोजन हमारे दिन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है | दोपहर का भोजन पोषक तत्वों से युक्त होना चाहिए जैसे - दाल , चावल ,रोटी ,सब्जी , सलाद ओर दही या छाछ |

दोपहर के भोजन कि कुछ अच्छी आदते -

  • भोजन का समय हमेशा सही होना चाहिए।

  • भोजन के पहले अपने हाथों को साबुन से धो लेना चाहिए।

  • खाना खाने मे जल्द बाजी नहीं करनी चाहिए।

  • खाने को हमेशा चबा चबा कर खाना चाहिए।

  • भोजन मे सलाद ओर दही का प्रयोग जरूर करना चाहिए जिससे पाचन अच्छा होता है |

  • दोपहर के भोजन कि मात्रा का ध्यान रखना चाहिए |

  • दोपहर मे अत्यधिक भोजन के सेवन से बचना चाहिए।

  • शुद्ध ओर ताजा भोजन का ही सेवन करना चाहिए।

3.रात का खाना - रात का खाना बहुत हल्का ओर पौष्टिक तत्वों से युक्त होना चाहिए | रात मे हल्का खाना इसलिए खाना चाहिए ताकि वह आसानी से पाच जाए क्युकि रात के समय मेटाबोलिज़्म कमजोर हो जाता है | खाना खा कर तुरंत नहीं सोना चाहिए नहीं तो गैस ओर अपच जैसी समस्याओ का सामना करना पड़ सकता है | खाhना खाने के बाद थोड़ा टहलना चाहिए | हमे रात के भोजन मे - दूध, दलिया , खिचड़ी , दाल चावल या दाल रोटी खाना चाहिए |

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जवाब दिया गया10/22/20
1. दोपहर के भोजन के बाद सौंफ और मिश्री खाएं (पाचन में मदद करता है, खराब सांस के बाद का दोपहर का भोजन और शरीर के स्तर को संतुलित करता है। बस यह सुनिश्चित करें कि आप इसे कभी नहीं खा सकते हैं क्योंकि यह आपको कब्ज़ कर सकता है, बस इसे आवश्यक राशि पर रखें।
2. अपने लंच से पहले या इसके साथ कुछ सलाद दें (फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट और आवश्यक विटामिन और खनिजों का अच्छा स्रोत) कोशिश करें कि आप सबसे पहले अपना सलाद खाएं।
3. दोपहर के भोजन के साथ कुछ छाछ (अपने शरीर को ठंडा करने में मदद करता है, पाचन के लिए अच्छा है)
4. किसी भी टी / वी या किसी अन्य माध्यम को न देखें, बस अपने दोपहर के भोजन पर ध्यान देने की कोशिश करें और अपनी इंद्रियों के साथ हर काटने को खाएं (जो भोजन आप खाते हैं उसके साथ जुड़ने की कोशिश करें)
5. यदि संभव हो तो अपने दोपहर के भोजन के बाद टहलने की कोशिश करें (फिर से अपने दोपहर के भोजन के बाद महसूस करने की अच्छी तरह से समाप्त करें)
6. अपने दोपहर के भोजन का आनंद लेने की कोशिश करें और भोजन के हर काटने का आनंद लें, मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से मैं अपने भोजन में कुछ घर का बना अचार (कभी-कभी) जोड़ता हूं।


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