मै चीख़ कर चुप हो जाता हूँ , तुम चुप होकर चीख़ती हो ।।
मैं हर रात तुम्हें फूंक देता हूं अपनी सिगरेट में , हर रोज़ तुम मेरी बालकनी में घास बन के उग आती हो !!
मुझे उसकी नजरों से उतारा गया , मै आशिकों की मौत मारा गया ।।
यु ही कई साल तक तुमसे इज़हार-ए-मोहब्बत ना की हमने , सुना था धीमी आँच पे खाना बड़ा स्वाद बनता है ।।
पहले कभी ना कहा अब बता रहा हूं मैं, बाजदफा तुमको यूं ही तकता रहा हूं मैं ।। (बाजदफा : कई बार)
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Zyan MalikThe Curious Introvert
Answered on06/03/20
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