वर्तमान समय में डियो और परफ्यूम किसी भी व्यक्ति की आम जरूरत की तरह बन गया है मानो डियो की सुगंध के बिना हम अच्छे ही नहीं लगेंगे | या फिर यह कहना गलत नहीं होगा कि आज के इस फैशनेबल जमाने में हर कोई अपने आपको सुंदर और आकर्षक दिखने की दौड़ में अव्वल रखने की कोशिश में लगा है, और इस अव्वल आने की दौड़ में डियो और परफ्यूम उनका साथ दें रहे है | डियो और परफ्यूम एक ऐसा ट्रेंड बन चुका है जिससे आम जीवन के बारें में अब सोचना भी मुश्किल है |
मगर हर सिक्के के दो पहलु होते है ठीक वैसे ही डियों और परफ्यूम के कुछ ऐसे नुक्सान भी है जिनके बारे में हम सबका जानना बहुत जरुरी है |
(इमेज-उज्जवल प्रभात)
- परफ्यूम में मौजूद घातक केमिकल शरीर को बुरी तरह से प्रभावित करते है, और इसके रोजाना इस्तेमाल से त्वचा में जलन और खुजली या रैसेज़ जैसी परेशानियां पैदा हो जाती है जो त्वचा को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त करती है।
- परफ्यूम और डियो को एंटीबैक्टीरियल बनाते वक्त ट्राइक्लोसन केमिकल का प्रयोग किया जाता है। लेकिन यह केमिकल शरीर के अच्छे एंटी-बैक्टीरियल को नष्ट कर शरीर को एलर्जी की समस्या देता है। इसलिए इनके स्तेमाल से दूर रहना ही बेहतर है |
- एक रिसर्च में पाया गया है कि परफ्यूम में नूरो टोक्सीन मौजूद होते है जिससे मानव शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है। परफ्यूम के अधिक इस्तेमाल से त्वचा पर हानिकारक बैक्टीरिया का जन्म होता है जिससे त्वचा पर घाव, रैशेज जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है। साथ ही हार्मोन्स का संतुलन भी बिगड़ता है।
-पसीना शरीर के लिए अच्छा माना जाता है इससे रोम-छिद्र खुले रहते है और हमारी त्वचा भी साँस ले पाती है। लेकिन कुछ परफ्यूम पसीनें का अवरोधक बनते है जिससे शरीर में आर्सेनिक, लीड, कैडमियम, मरकरी जैसे घातक तत्व जमा होने लगते है। सीधे तौर पर कहा जायें तो यह सभी तत्व शरीर को रोगग्रस्त बनाए रखने का काम करते है।
- साल 2017 में हुए एक सर्वे में यह बात सामने आयी की जिस डियो और परफ्यूम की महक जितनी तेज़ होती है उसमें केमिकल की मात्रा भी बहुत जायदा होती है |




