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pravesh chuahan,BA journalism & mass comm | पोस्ट किया |


आज दिल्ली के हालातों को लेकर आप क्या कहना चाहते हैं ?


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phd student | पोस्ट किया


ईस समय दिल्ली की हालत देखकर यही कह सकते है कि आने वाले कुछ समय दिल्ली के लिए बहुत बुरा होगा क्योकी यहा पर कोरोना के मरीज की लगातार बढ़ोतरी हो रही है


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pravesh chuahan,BA journalism & mass comm | पोस्ट किया


देश की राजधानी दिल्ली क्रोना वायरस की वजह से धराशाई होती नजर आ रही है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है आम आदमी पार्टी विशेषकर स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा काम करने के लिए जानी जाती हैं.मगर आज यह सरकार कोरोना वायरस के आगे घुटने टेकते नजर आ रही है.इनकी स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की सारी पोल कोरोना वायरस ने खोल दी है.....

वायरस के सामने घुटने टेकते हुए दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि  राजधानी में कोरोना मरीजों की संख्या जुलाई के आखिर तक 5.5 लाख के करीब मरीज होंगे.करीब 80,000 लोगों को बिस्तरों की जरुरत होगी. दिल्ली की दशा को अच्छे से समझने के लिए आपको कुछ लोगों के  उदाहरण दिए गये है जिससे आप दिल्ली सरकार की क्रोना की समस्या से निपटने के लिए क्या क्या इंतजाम किए गए हैं यह पता चलेगा ?

अभी हाल ही में मीडिया कर्मी वीरेंद्र की क्रोना की वजह से मृत्यु हो गई है. दिल्ली के अस्पतालों में करोना टेस्ट के लिए दर-दर भटक रहा मगर उनका टेस्ट नहीं हो पाया,पत्रकार अजय ने अपनी एक वीडियो सामने आई है जिसमें वह कह रहे हैं कि उनका पूरा परिवार क्रोना की चपेट में है और उनकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है.उनके सास और ससुर की मौत भी हो चुकी है.आज उनका पूरा परिवार कोरोना के काल में समा चुका है. कोई भी दिल्ली का अस्पताल उन्हें एडमिट नहीं कर रहा है. वह दिल्ली सरकार और दिल्ली स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर रहे हैं मगर फिर भी कोई नतीजा नहीं मिल रहा है.

कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने दिल्ली के अस्पतालों की पोल खोलते हुए बताया कि उन्हें अपनी पत्नी का कोरोना टेस्ट करवाना था और इसके लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी तब जाकर कोरोना टेस्ट हुआ.

इन सभी बातों से एक बात साफ जाहिर होती है दिल्ली में आम व्यक्ति कोरोना टेस्ट नहीं करवा पाएगा. क्योंकि वहां पर केवल वही टेस्ट करवाने में कामयाब हो पा रहा है जिसकी पहुंच है. कांग्रेस के दिग्गज नेता मनीष तिवारी को जब अपनी पत्नी का कोरोनावायरस टेस्ट करवाना था तब उन्हें इतनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा,तो सोचिए आम व्यक्ति कैसे टेस्ट करा पाएगा यानी कि कोरोनावायरस गरीब व्यक्ति को अपनी चपेट में लेकर ही छोड़ेगा. पत्रकारों को अपना टेस्ट करवाने के लिए बहुत पर्यतन करना पड़ रहा हैं मगर फिर भी नाकाम हो रहे है. 

अगर कोई भी व्यक्ति एडमिट होने के लिए जाता है तो वह उन्हें एडमिट करने अस्पताल कतराते हैं आखिर लोग अस्पतालों से उम्मीद ना रखे तो, धर्मशाला से उम्मीद रखेंगे. सरकार दिल्ली की बार-बार यही कहती है कि बेड की कमी है. तो मेरे को यह समझ में नहीं आ रहा अगर बेड की कमी है तो क्या बेड खरीद नहीं सकते हैं.बेड क्या करोड़ों रुपए के आते हैं जो अब खरीद नहीं पा रहे है. जानबूझकर समस्या को बड़ा बना कर सरकार ने लोगों को कोरोना से मरने के लिए उनके हालातों पर छोड़ चुकी है.

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