सर्दियों का मौसम जितना सुहाना होता है उतना तकलीफ भी देता है। कम ठंड सभी सहन कर लेते है लेकिन जब अत्यधिक ठंड पड़ने लगती है तो हम लोग घबरा जाते है।
सर्दियों के मौसम में जब तापमान 10 डिग्री से गिर कर 07 से 06 पर आ जाता है और ठंडी ठंडी हवाएं चलने लगती है तो से कोल्ड वेव कहते है।
इसे शीत लहर भी कहते है। यह आम तौर पर 1 सप्ताह या उससे ज्यादा दिन रह सकती है ।
शीत लहर से शरीर को कई प्रकार के नुकसान भी होते है। यह सभी उम्र के लोगो के लिए घातक साबित होती है।
आइये शीत लहर से होने वाले नुकसान -
- शीत लहर से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
- इससे सर्दी जुखाम , बुखार जैसी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता हैं।
- मवेशियों के लिए यह सबसे बुरी होती है ज्यादा ठंड बर्दाश्त नही सकने के कारण वह मर जाते है।
- ठंड ना सहन कर सकने के कारण कई बुजुर्गो की भी मृत्यु हो जाती है।
- हाइपोथेमिया जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा बना रहता है ।
- कई तरह की फसले बर्बाद हो जाती है।
- इम्युनिटि कम हो जाती है जिससे बीमार होने का खतरा बढ़ जाता हैं ।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाने से अटैक आने की संभावना बढ़ जाती हैं।
- सर्दियों का मौसम अस्थमा के रोगियों के लिए काफी कठिन समय होता है। इस समय उन्हे सांस लेने में काफी समस्या होती हैं।
हर साल कोल्ड वेव जोरों की होती है और कई तरह के नुकसान भी होते है। किसानो की फसले बर्बाद हो जाती हैं तो कई को गंभीर बिमारियाँ हो जाती है।
शीत लहर का सबसे ज्यादा प्रकोप उत्तर भारत के मैदानी इलाको मे ज्यादा होता है। इसके अलावा दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, झारखंड, हिमाचलप्रदेश आते है।
अभी भी कोल्ड वेब का कहर जारी है। इससे बचाव बहुत जरूरी है।





