चलिए आज हम आपको इसमें आर्टिकल के माध्यम से बताते हैं की गज उत्सव क्या है,प्रोजेक्ट एलीफेंट के 30 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में गज उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।इसका उद्देश्य हाथियों के संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाना, मानव हाथी संघर्ष को रोकना और हाथी गलियारों वह आवाज की रक्षा करना है।भारत सरकार ने हाथियों, उनके प्रवास मार्गों एवं प्राकृतिक आवासों की रक्षा के लिये वर्ष 1992 में प्रोजेक्ट एलिफेंट की शुरुआत की थी।कर्नाटक के बाद असम देश में हाथियों का दूसरी आबादी वाला राज्य है,यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल होने के कारण काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान गज स्थल के लिए एक आदर्श उत्सव है।प्रोजेक्ट एलीफैंट भारत में हाथियों और उनके आवासों की रक्षा के लिए 1991-92 में शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है। 30,000-40,000 हाथियों की अनुमानित आबादी के साथ, भारत में वैश्विक जंगली हाथियों की आबादी का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। हाथियों को वन्य जीवन संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I केतहत संरक्षित एक राष्ट्रीय विरासत पशु माना जाता है।
गज उत्सव क्या है?
@aanyasingh3213 | Posted on October 18, 2023
गज उत्सव क्या है इसकी जानकारी हम आपके यहां पर देंगे:-
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू प्रोजेक्ट एलिफेंट के 30वें वर्ष के सफल समापन के उपलक्ष्य में और संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए 7 अप्रैल को असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में दो दिवसीय "गज उत्सव" का शुभारंभ करेंगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि लोग हाथियों के प्रति जागरूकता रखें और उनका संरक्षण करें। इस योजना के तहत हाथियों का संरक्षण करने के लिए लोगों को कई तरह के नियम बताए जाएंगे जिनका पालन करके लोग हाथियों का संरक्षण करेंगे क्योंकि वर्तमान समय में हाथियों की जनसंख्या इतनी अधिक घटती जा रही है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। खासकर हमारे भारत देश में हाथियों को भगवान श्री गणेश जी का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में और भी अधिक जरूरी है कि हम हाथियों की रक्षा करें और उनकी पूजा करें।

गज उत्सव क्या है इसकी जानकारी हम आपके यहां पर देंगे-
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाथी परियोजना के 30 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में ' गज उत्सव 2023' का उद्घाटन किया।
प्रोजेक्ट एलिफेंट 1992 में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा राज्यों को उनके प्राकृतिक आवासों में हाथियों के दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने में सहायता करने के लिए शुरू की गई एक केंद्र-प्रायोजित योजना है।कर्नाटक के बाद असम देश में हाथियों का दूसरी आबादी वाला राज्य है,यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल होने के कारण काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान गज स्थल के लिए एक आदर्श उत्सव है।प्रोजेक्ट एलीफैंट भारत में हाथियों और उनके आवासों की रक्षा के लिए 1991-92 में शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है।खासकर हमारे भारत देश में हाथियों को भगवान श्री गणेश जी का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में और भी अधिक जरूरी है कि हम हाथियों की रक्षा करें और उनकी पूजा करें।
