मिल्खा सिंहभारत के महान एथलीट मे से एक थे। उन्होंने भारत के धावको मे अपना नाम पूरी दुनिया में फैला दिया था।
मिल्खा सिंह का जन्म29 नवम्बर 1929को पाकिस्तान के एक सिख परिवार में हुआ था। मिल्खा भारतीय सेना में 1951 में भर्ती हुए। उनके जस्बे और काबिलियत सहरानीय थी। बहुत ही कम उम्र में उन्होंने अपना नाम बना लिया था।
मिल्खा सिंह ने 1962 को भारतीय महिला वॉलिबॉल टीम की कप्ताननिर्मित कौरसे शादी की। निर्मित और मिल्खा के चार बच्चे है जिसमे 3 बेटियाँ और 1 बेटा है।
मिल्खा ने 1958 में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था यह आज़ाद भारत का पहला गोल्ड मेडल के लिस्ट मे दर्ज है।
मिल्खा सिंह को "फ्लाइंग सिख" कहा जाता है।
- फ्लाइंग सिख नाम के पीछे एक छोटी सी कहानी है -
- मिल्खा पाकिस्तान के बटवारे के कभी भी पाकिस्तान नही जाना चाहते थे लेकिन 1960 में पाकिस्तान से इंटरनेशनल एथलीट कंपीटीशन का संदेश मिला।
- मिल्खा नही जाना चाहते थे लेकिन प्रधानमन्त्रीजवाहर लाल नेहरूजी के कहने पर वह पाकिस्तान जाने और कंपीटीशन में भाग लेने के लिए राजी हो गए।
- पाकिस्तान में उस समय अब्दुल खालिक का शोर था। क्योकि वह सबसे तेज धावक था।
- अब्दुल खालिक और मिल्खा के बीच दौड़ शुरू हुई। देखते ही देखते मिल्खा सिंह ने अब्दुल खालिक को हरा दिया।
- मिल्खा की रफ्तार देखकर सभी चौक गए।
- जीत के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपतिफील्ड मार्शल अयूब खानने मिल्खा को जीत की बधाई दी।
- अयूब खान ने मिल्खा से कहाँ -आज तुम दौड़े नही हो, उड़े हो ।
इसलिए हम तुम्हे फ्लाइंग सिख का खिताब देते है।
इसी वाक्ये की वजह से मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख के नाम से भी जाना जाने लगा।
मिल्खा ने अपनी ज़िंदगी में कई लडाइयाँ लडी और जीती भी लेकिन कोरोना जैसी महामारी से वह जीत ना सके महज 91 साल मे उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली।







