मिल्खा सिंह का नाम तो आप सभी ने सुना ही होगा। इस दुनिया में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होगा जो मिल्खा सिंह को नहीं जानता होगा। दुनिया के बड़े-बड़े एथलीटों को धूल चटाने वाले पंजाब के शेर मिल्खा सिंह अब तो इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन भारतीय सेवा में कप्तान पद से सेवानिवृत मिल्खा सिंह को सम्मान से लोग फ्लाइंग सिख बुलाते हैं। मैं आपको बता दूं कि मिल्खा सिंह को यह उपाधि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति से मिली थी।
चलिए आज हम आपको मिल्खा सिंह के बारे में कुछ जानकारी देते हैं:-
मैं आपको बता दूं कि मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवंबर सन 1929 को ब्रिटिश इंडिया में पंजाब प्रांत के मुजफ्फरगढ़ शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर गोविंदपुर में हुआ था। जो कि वर्तमान समय में पाकिस्तान के मुजफ्फरगढ़ जिले में स्थित है। मैं आपको बता दूं कि शुक्रवार 18 जून सन 2021 की देर रात मिल्खा सिंह ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
चलिए हम आपको बताते हैं कि मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख क्यों कहा जाता है:-
सन 1958 के कॉमनवेल्थ गेम में मिल्खा सिंह ने गोल्ड मेडल जीता था। मैं आपको बता दूं कि यह आजाद भारत का पहला गोल्ड मेडल था। इसके बाद साल 1960 में ही उन्हें पाकिस्तान के इंटरनेशनल एथलीट कंपटीशन में न्योता मिला। लेकिन मिल्खा के मन में बंटवारे का दर्द था। क्योंकि वह पाकिस्तान जाना नहीं चाहते थे। लेकिन बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की समझाने पर उन्होंने पाकिस्तान जाने का फैसला लिया। मैं आपको बता दूं कि उसे समय पाकिस्तान में अब्दुल खालिक का जोर था। खालिक कहां की सबसे तेज धावक थे।
फिर दोनों के बीच दौड़ हुई। और इस दौड़ में मिल्खा की जीत हुई। मिल्खा की जीत के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फीड मार्शल अयूब खान ने फ्लाइंग सिख का नाम दे दिया।



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