महात्मा गाँधी जी को कौन नही जानता। उनके सीख, सत्य और अहिंसा की मार्ग पर हर किसी को चलने की सलाह दी जाती हैं।
महात्मा गाँधी भारत में ही नही विदेश मे भी अपना नाम प्रसिद्ध करके आये थे। महात्मा गाँधी जी को राष्ट्रपिता की उपाधि दी गई है।
महात्मा गाँधी का पुरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था।मई 1883 मे गाँधी जी ने कस्तूरबा से शादी की थी। शादी के समय कस्तूरबा की उम्र 14 वर्ष थी। कस्तूरबा और गाँधी जी के पिता दोनो करीबी मित्र थे जिसके कारण दोनो ने अपने रिश्ते को एक नया नाम देने के विचार से अपने बच्चों की शादी की थी।
कस्तूरबा गाँधी का जन्म 11 अप्रैल 1869 मे गुजरात के काठियावाड के पोरबंदर मे हुआ था।कम उम्र में ही कस्तुरबा की शादी गाँधी जी के साथ हो जाने की वजह से उनकी पढाई बंद हो गई थी। वह घर पर ही रहकर पढाई करती थी। उन्होंने हमेशा गाँधी जी साथ दिया। उन्होंने अपने गहने बेच कर गाँधी जी की पढाई के लिए पैसे जुटाए थे । जिससे वह विदेश गए और अपनी वकालत की पढाई पूरी की थी।
कस्तूरबा गाँधी ने हमेशा गाँधी जी का साथ दिया। लेकिन गाँधी जी विदेश से लौटने की बाद देश की सेवा, आंदोलनों, भारत की आजादी की लडाई मे व्यस्त हो गए।लेकिन उन्होंने कभी भी गाँधी जी से शिकायत नही की और उनका आंदोलनों मे भी साथ दिया। वह स्वतंत्रता संग्राम की लडाई मे गाँधी जी के साथ ही थी।
पति का साथ देने के अलावा कस्तूरबा गाँधी ने दक्षिण अफ्रीका मे भारतियो पर हो रहे अत्याचारो को देखा और उनके खिलाफ आवाज उठाई।
इस प्रदर्शन के कारण उन्हे जेल हो गई थी। जेल मे कस्तूरबा ने सभी के दुख दर्द को समझा और उन्हे प्रार्थना का महत्व बताया।
उनके ममत्व के भाव की वजह से लोग कस्तूरबा गाँधी को बा कहकर बुलाते थे।






