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Himani Saini· 2 years ago
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श्री राम की बहन का नाम क्या था ?

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Answered on01/04/24

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भगवान श्री राम राजा दशरथ और देवी कौशल्या के पुत्र थे। इसके अलावा भगवान राम के तीन भाई थे जिनका नाम लक्ष्मण, भरत, और शत्रुघ्न था। और इस बात को बहुत ही कम लोग जानते हैं कि भगवान श्री राम की एक बहन भी थी जिसका नाम शांता था और शांता सभी भाइयों से सबसे बड़ी थी।

चलिए जानते हैं की रामायण में क्यों देवी शांता का जिक्र नहीं किया गया :-

रामायण महाकाव्य में देवी शांता यानी कि भगवान राम की सबसे बड़ी बहन का जिक्र बहुत कम ही सुनने को मिलता है। इसी वजह से बहुत ही कम लोगों को पता है कि राम जी की एक बड़ी बहन भी थी। मैं आपको बता दूं की देवी शांता राजा दशरथ और देवी कौशल्या की बेटी थी। लेकिन इन्होंने अपनी बेटी को गोद दिया इसलिए रामायण में देवी शांता का जिक्र बहुत ही कम सुनने को मिलता है। और भगवान राम और उनके भाइयों की चर्चा सबसे अधिक सुनने को मिलती है।

चलिए बताते हैं कि क्यों शांत के माता-पिता नहीं बने दशरथ और कौशल्या:-

एक कथा में बताया गया है कि एक बार अंग देश के राजा रम पद अपनी पत्नी रानी वर्षिणी के साथ अयोध्या आए हुए थे। राजा रोमपद और वर्षिणी को कोई संतान नहीं थी। और जब राजा दशरथ को इस बात का पता चला तो उन्होंने कहा आप मेरी पुत्री शांता को संतान के रूप में गोद ले लीजिए। राजा दशरथ की यह बात सुनकर रोमपद बहुत खुश हो गए उन्होंने शांता को गोद लेकर बहुत ही स्नेहपूर्वक उसका पालन पोषण किया और माता पिता होने के सारे कर्तव्य भी निभाये ।

चलिए हम आपको बताते हैं की देवी शांता का विवाह महर्षि विभाणडक के पुत्र श्रृंगी ऋषि के साथ हुआ था।

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Answered on01/04/24

रामायण के द्वारा हम सभी राम जी के जीवन के हर पहलू को जानते है। उनके परिवार के बारे में भी जानते है। भगवान राम के तीन भाई थेलक्ष्मण, शत्रुघ्न और भरत।

लेकिन उनके भाई के अलावा उनकी एक बहन भी थी। भगवान राम जी की बहन का नामशांताथा। यह चारो भाइयो में सबसे बड़ी थी।

शांता राजा दशरथ और कौशल्या जी की बेटी थी। शांता का विवाह ऋषि शृंग के साथ हुआ था।

शांता को गोद दे देने की वजह से उनका आयोध्या से कम नाता था। उन्हे अंग देश के राजा रोमपद और कौशल्या की बड़ी बहन वर्षिणी ने गोद लिया था। रोमपद और वर्षिणी कभी माँ बाप नही बन सकते थे। संतान नही होने की वजह से उन्होंने शांता को गोद लिया था।

शांता बहुत ही सुंदर और सुशील कन्या थी। उन्हे वेद, कला और शिल्प का अच्छा ज्ञान था। वह सर्वगुणसंपन्न थी।

दशरथ और कौशल्या जी ने शांता को बचपन मे ही गोद दे दिया था क्योकि पुत्री होने की वजह से वह राजसिंहासन पर नही बैठ सकती थी। इसके बाद राजा दशरथ ने पुत्रप्राप्ति यज्ञ करवाया जिससे उन्हे चार पुत्र की प्राप्ति हुई।

देवी शांता और ऋषि शृंग दोनो का विवाह रोमपद ने करवा दिया था। क्योकि एक समय राजा रोमपद और पुत्री शांता बातचीत करने में व्यस्त थे तभी एक ब्राहमण अपनी समस्या ले कर आया किंतु राजा रोमपद ने उनकी बात ना सुनी इसी पर उस ब्राह्मण ने सुखा पड़ने का श्राप दे दिया। अंग देश में सुखा पड़ गया तभी रोमपद ने ऋषि शृंग को हवन आदि के द्वारा राजा इंद्र को खुश करने को कहा।

ऋषि श्रंग ने हवन के द्वारा इंद्रदेव को खुश किया जिससे वहा फिर से हरियाली आ गई। रोमपद ऋषि श्रंग से बहुत खुश हुए इसी वजह से उन्होंने अपनी कन्या का विवाह श्रंग से कर दिया।

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komal Solanki
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