हमारे भारत देश में जितनी भी नदियां बहती हैं सभी नदियों को मां का दर्जा दिया जाता है। जब भी हमारे भारत देश में नदियों की बात आती है तो गंगा यमुना और नर्मदा का नाम सबसे ऊपर आता है। नर्मदा नदी को रेवा के नाम से भी जाना जाता है। यह नदी मध्य भारत की उपमहाद्वीप की पांचवीं सबसे लंबी नदियों में से एक है। नर्मदा नदी मध्य भारत के मध्य प्रदेश और गुजरात राज्य में बहने वाली एक प्रमुख नदी है। मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मैकाल पर्वत के अमरकंटक शिखर से नर्मदा नदी की उत्पत्ति हुई है। नर्मदा नदी की लंबाई लगभग 1312 किलोमीटर है। इसी वजह से इसे भारत की सबसे लंबी नदियों में से एक माना जाता है।
चलिए जानते हैं कि नर्मदा नदी की सहायक नदियां कौन सी है :-
नर्मदा नदी की 41 सहायक नदियां हैं। नर्मदा नदी का स्रोत नर्मदा कुंड है जो मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक में स्थित है। आपने देखा होगा कि सभी नदियां सीधी दिशा में बहती हैं लेकिन नर्मदा नदी सभी नदियों के विपरीत है यानी की नर्मदा नदी उलटी दिशा में बहती है। इस नदी की खूबी यही है कि यह नदी सबसे अलग है। मध्य प्रदेश के लोग नर्मदा नदी पर पूरी तरह से निर्भर है। इसीलिए यहां की स्थानीय लोग नर्मदा नदी को मध्य प्रदेश की जीवन रेखा मानते हैं। इतना ही नहीं नर्मदा नदी को भारत की प्रमुख नदियों में से एक माना जाता है।
हम आपको नर्मदा नदी से जुड़ी एक पौराणिक कथा सुनाते हैं:-
पौराणिक कथा के अनुसार नर्मदा नदी एक कुंवारी नदी के रूप में प्रचलित है। पौराणिक कथा के अनुसार सोनभद्र और नर्मदा दोनों के घर पास में थे इसलिए अमरकंटक की पहाड़ियों में दोनों का बचपन बीता, दोनों जगह किशोर हुए तो लगाओ बढ़ गया और एक दूसरे से प्रेम करने लगे। लेकिन अचानक से दोनों के बीच में नर्मदा की सहेली जुहिला आ गई। और फिर सोनभद्र जुहिला के प्रेम में पड़ गया। और जब नर्मदा को इस बात का पता लगता है तो नर्मदा सोनभद्र को समझती हैं लेकिन सोनभद्र कुछ नहीं समझता इससे नाराज होकर नर्मदा दूसरी दिशा में चली जाती है और कुंवारी रहने की कसम खाती है। इसलिए कहा जाता है की प्रमुख नदियां बंगाल की खाड़ी में मिलती है। लेकिन नर्मदा अरब सागर में मिलती है। और आज भी यह नदी सभी नदियों से विपरीत दिशा में बहती है। इसलिए कहा जाता है कि नर्मदा नदी में स्नान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।



