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Jan 3, 2024education

स्वर्ण मंदिर कहां स्थित हैं ?

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Jan 2, 2024

पंजाब राज्य के अमृतसर शहर में स्वर्ण मंदिरस्थित है।

यह सिख धर्म का पालन करने वाले अनुयायियों का मन्दिर है। यह एक गुरुद्वारा है।

स्वर्ण मन्दिर सिख धर्म के प्रसिद्ध धर्म स्थलों में से एक है। स्वर्ण मन्दिर कोहरमंदिर साहिबके नाम से भी जाना जाता है।

यह गुरुद्वारा है लेकिन यहाँ हर धर्म के लोग आते है । भारत ही एक मात्र एक ऐसा देश है जहाँ सभी लोग एक दूसरे के धर्म को अपना मानते है।

स्वर्ण मंदिर की नींव1577में चौथे सिख गुरुरामदासने रखी थी। इसके बाद सिख धर्म के पांचवे गुरुअर्जुन देवजीने स्वर्ण मंदिर का निर्माण किया।

1604 में स्वर्ण मंदिर पूरी तरह बन कर तैयार हुआ था।

स्वर्ण मंदिर के कुछ रोचक तथ्य -

  1. स्वर्ण मंदिर में चारो और दरवाजे है जो चारो दिशाओं में खुलते हैं।
  2. यह गुरुद्वार सभी धर्मो के लोगो के लिए है।
  3. हर साल लगभग 1 लाख से ज्यादा लोग स्वर्ण मंदिर आते है ।
  4. अमृत सरोवर के बीच स्वर्ण मंदिर को बनाया गया है। पहले ये सरोवर सुखा था। इसे पवित्र सरोवर भी कहते है।
  5. सिख धर्म का सबसे पवित्र ग्रंथगुरु ग्रंथ साहिबसबसे पहले स्वर्ण मंदिर में ही रखा गया था।
  6. यह मंदिर सफेद मार्वल से बना हुआ है और उस पर असली सोने की परत चढ़ी हुई है। इसलिए इसे स्वर्ण मंदिर कहते है।
  7. मंदिर के अंदर सिख धर्म का ऐतिहासिक विवरण किया गया है।
  8. इस मंदिर को सीढ़िया ऊपर की और नही बल्कि नीचे की और जाती हैं।
  9. अंदर की कला आक्रति हाथो द्वारा पेंट की ही हुई है।
  10. यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा किचन है। यहाँ लगभग 1 लाख से ज्यादा लोगो का भोजन हर दिन बनता है। इसेलंगरकहाँ जाता हैं।
  11. लंगर को यहाँ का प्रसाद कहा जाता हैं।
  12. सिख धर्म की अपनी विशेषता है इसलिए स्वर्ण मंदिर में अंदर जाने से पहले सिर को कपड़े से ढकना होता है। धूम्रपान, मदिरा पर रोक है।

Letsdiskuss

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Jan 2, 2024

स्वर्ण मंदिर भारत के राज्य पंजाब के अमृतसर शहर में स्थित है। अमृतसर शहर एक आध्यात्मिक केंद्र भी है। पूरा अमृतसर शहर स्वर्ण मंदिर के चारों तरफ बसा हुआ है। स्वर्ण मंदिर को हरिमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर देश के तीर्थ स्थलों में से एक है, और यहां पूरे साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। दरबार साहिब के नाम से मशहूर स्वर्ण मंदिर को अमृतसर में सन 1577 में चौथे सिक्ख गुरु, गुरु रामदास ने शुरुआत की थी और 16वीं शताब्दी में 5वें सिक्ख गुरु, गुरु अर्जुन देव जी ने स्वर्ण मंदिर की स्थापना की। मंदिर के पहले संस्करण को पूर्ण करने में 8 साल लगे थे। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में महाराजा रणजीत सिंह नें इस गुरुद्वारें के ऊपरी छत को 400 किलोग्राम सोने क से ढकवा दिया, जिससे इसका नाम स्वर्ण मंदिर हो गया। संगमरमर से बना यह दो तल्ला गुरुद्वारा अमृत सरोवर नाम के एक पवित्र तालाब से गिरा हुआ है। सिक्ख धर्म के पवित्र ग्रंथ आदि ग्रंथ को दिन के समय इसके पवित्र स्थान पर रखा जाता है। स्वर्ण मंदिर में चार द्वार है, जो मानवीय भाईचारे और समानता का संदेश देते हैं। भले ही स्वर्ण मंदिर का महत्व सिक्ख धर्म में हो, पर अमृतसर आने वाले भारतीय और विदेशी पर्यटक भी इससे दूर नहीं रह पाते हैं। स्वर्ण मंदिर अपने पूर्ण सुनहरे गुंबद के लिए प्रसिद्ध है, यह सिक्खों के लिए सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक हैं। कहा जाता है कि स्वर्ण मंदिर को कई बार नष्ट किया जा चुका है। लेकिन भक्ति और आस्था कारण हिंदुओं और सिक्खों ने इसे दोबारा बना दिया। जितनी बार स्वर्ण मंदिर को नष्ट किया गया, उतनी बार इस मंदिर को दोबारा बनवाया गया। उसकी हर घटना को मंदिर में दर्शाया गया है। गुरुद्वारे में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खाने पीने की पूरी व्यवस्था होती है। गुरु का लंगर श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे खुला रहता है। खाने पीने की व्यवस्था गुरुद्वारे में आने वाले चढ़ावे और दूसरे कोषों से होती है। अनुमान है कि यहां करीब 40 हजार लोग रोज यहां लंगर का प्रसाद ग्रहण करने आते हैं।

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